दिनांक 2.10.2019 को महानगर कांग्रेस कमेटी,नोएडा द्वारा गिझोड़ कार्यालय पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 150वी जयंती वे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया व उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर दोनों महान शख्सियतों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई ब्लॉक कांग्रेस कमेटी नोएडा अध्यक्ष साबुद्दीन नोएडा ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि ऐसी महान दोनों शख्सियतों को हम उनकी जयंती पर शत-शत नमन करते हैं उनके बताए हुए रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं इस मौके पर सभी कांग्रेस जन उपस्थित थे
गुरुवार, 3 अक्टूबर 2019
हरियाणा में सभी सीटों कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित किये
हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डा. अशोक तंवर के विरोध प्रदर्शन, कांग्रेस विधायक दल की पूर्व नेता किरण चौधरी तथा पूर्व सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय यादव की नाराजगी के बीच आधी रात के बाद जारी हुई इस सूची में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तथा प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सैलजा की पसंद के उम्मीदवारों का दबदबा रहा।
कालका- प्रदीप चौधरी, पंचकूला-चंद्रमोहन, नारायणगढ़-श्रीमती शैली, अंबाला सिटी-जसबीर मालौर, मुलाना (सुरक्षित)-वरुण चौधरी, सढौरा (सुरक्षित)-रेनू बाला, जगाधरी-अकरम खान, यमुनानगर-निर्मल, शाहबाद (सुरक्षित)-अनिल धंतौड़ी, थानेसर-अशोक अरोड़ा, पिहोवा-मनदीप सिंह, गुहला (सुरक्षित)-दिल्लू राम, कलायत- जयप्रकाश (जेपी), कैथल- रणदीप सुरजेवाला, पुंडरी-सतबीर सिंह जांगड़ा, नीलोखेड़ी (सुरक्षित)-बंताराम बाल्मीकि, इंद्री-डॉ.नवजोत कश्यप, करनाल-त्रिलोचन सिंह
घरौंडा- अनिल राणा, पानीपत ग्रामीण-ओपी जैन, पानीपत शहर-संजय अग्रवाल, इसराना (सुरक्षित)-बलवीर बाल्मीकि, समालखा-धर्म सिंह छोकर, गन्नौर-कुलदीप शर्मा, राई-जयतीर्थ दहिया, खरखौदा (सुरक्षित)-जयवीर बाल्मीकी, सोनीपत-सुरेंद्र पंवार, गोहाना-जगबीर सिंह मलिक, बरौदा-श्रीकृष्ण हुड्डा, जुलाना-धर्मेंद्र ढुल, सफीदों-सुभाष देशवाल, जींद-अंशुल सिंगला, उचाना कलां-बालाराम कठवाल, नरवाना (सुरक्षित)-विद्या रानी, टोहाना-परमवीर सिंह, रतिया (सुरक्षित)-जरनैल सिंह, कालांवली (सुरक्षित)-शीशपाल, डबवाली-अमित सिहाग, रानिया-विनीत कंबोज, सिरसा-होशियारी लाल शर्मा, ऐलनाबाद-भरत सिंह बेनीवाल, आदमपुर-कुलदीप बिश्नोई, उकलाना (सुरक्षित)-बालादेवी, नारनौंद-बलजीत सिहाग, हांसी-ओमप्रकाश, हिसार-रामनिवास, नलवा-रणधीर पनिहार, लोहारू-सोमवीर सिंह, बाढड़ा-रणबीर महेंद्रा, दादरी-नृपेंद सिंह, भिवानी-अमर सिंह, तोशाम-किरण चौधरी, बवानीखेड़ा-(सुरक्षित)-रामकिशन फौजी, महम-आनंद सिंह डांगी गढ़ी सांपला किलोई-भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रोहतक- भारत भूषण बतरा, कलानौर (सुरक्षित)-शकुंतला खटक, बहादुरगढ़-राजेंद्र जून, बादली-कुलदीप वत्स, झज्जर (सुरक्षित)-गीता भुक्कल, बेरी-डॉ.रघुबीर सिंह कादयान, अटेली-राव अर्जुन सिंह, महेंद्रगढ़- राव दान सिंह, नारनौल-राव नरेंद्र सिंह, नांगल चौधरी-राजाराम गोलवा, बावल (सुरक्षित)-एमएल रंगा, कोसली-यादवेंद्र सिंह, रेवाड़ी-चिरंजीव राव, पटौदी-(सुरक्षित)-सुधीर चौधरी, बादशाहपुर-कमलबीर यादव, गुरुग्राम- सुखबीर कटारिया, सोहना-शमशुद्दीन, नूंह-आफताब अहमद, फिरोजपुर झिरका-मामन खान, पुन्हाना-मोहम्मद एजाज खान, हथीन-मोम्मद इजराइल, होडल(सुरक्षित)-उदयभान, पलवल-करण दलाल, पृथला-रघुबीर सिंह तेवतिया, एनआइटी फरीदाबाद- नीरज शर्मा, बड़खल-विजय प्रताप सिंह, बल्लभगढ़-आनंद कौशिक, फरीदाबाद-लखन सिंगला, तिगांव- ललित नागर
मंगलवार, 1 अक्टूबर 2019
स्वाध्यायः एक जाग्रत देवता
ज्ञान की वृद्धि के लिए, ज्ञानोपासना के लिए, पुस्तकों का अध्ययन एक महत्वपूर्ण आधार है। मानव जाति द्धारा संचित समस्त ज्ञान पुस्तकों में संचित है। खासकर जब से लिखने और छापने का प्रचार हुआ, तबसे तो मानव द्धारा उपलब्ध ज्ञान लिपिबद्ध करके संचित किया जाने लगा। इसलिए उŸाम पुस्तकों का अध्ययन करना ज्ञान प्राप्ति क लिए बहुत ही आवश्यक होता है। अच्छी पुस्तकें एक विकसित मस्तिष्क का 'ग्राफ' होती हैं। मिल्टन ने कहा है- 'अच्छी पुस्तक एक महान आत्मा का जीवन रŸा है क्योंकि उसमें उसके जीवन का विचारसार सन्न्ािहित होता है, व्यŸिा मर जाते हैं, लेकिन ग्रंथों में उनकी आत्मा का निवास होता है। ग्रंथ सजीव होते हैं। इसलिए मिल्टन ने कहा है 'ग्रंथ में आत्मा होती है। सद्ग्रंथों का कभी नाश नहीं होता।'
विकासशील जीवन के लिए पुस्तकों का साथ होना आवश्यक है, अनिवार्य है, क्योंकि पुस्तकों में उसे जीवन का मार्गदर्शन तथा प्रकाश स्त्रोत मिलता है। वस्तुतः संसार के भीषण सागर में डूबते उतराते मनुष्य के लिए पुस्तकें उस प्रकाश स्तंभ की तरह सहायक होती हैं, जैसे समुद्र में चजने वाले जहाजों को मार्ग दिखाने वाले प्रकाशगृह।
सिसरो ने कहा है 'ग्रंथ रहित कमरा आत्मा रहित देह के समान है।' तात्पर्य यह है कि उŸाम पुस्तकें नहीं होने से मनुष्य ज्ञान से वंचित रह जाता है और ज्ञान रहित जीवन मुर्दे के समान व्यर्थ होता है। जो व्यŸिा दिन-रात अच्छी पुस्तकों का संपर्क प्राप्त करते हैं उनमें मानवीय चेतना, ज्ञान प्रकाश से दीप्त होकर जगमगा उठती हैं। ज्ञान का अभाव भी एक तरह की मृत्यु है। उŸाम विचार उदाŸा भावनाएं, भव्य कल्पनाएं जहां है, वहीं स्वर्ग हैै। लोकमान्य तिलक ने कहा है 'मैं नरक में भी उŸाम पुस्तकों का स्वागत करुंगा क्योंकि इनमें वह शŸिा है कि जहां ये रहेंगी वहां अपने आप ही स्वर्ग बन जाएगा।' स्वर्ग का दृश्य अस्तित्व कहीं नहीं है। मनुष्य की उत्कृष्ट मनःस्थिति जो उŸाम विचारों का फल है, वहीं स्वर्ग है। उŸाम पुस्तकों का सन्न्ािध्य मनुष्य की बुद्धि को जहां भी मिलता है, वहीं उसे स्वर्गीय अनुभूति होने लगती हैै। सच्चे, निःस्वार्थी, आत्मीय मित्र मिलना कठिन हैं। बहुतों को इस संबंध में निराश ही होना पड़ता है, लेकिन अच्छी पुस्तकें सहज ही हमारी सच्ची मित्र बन जाती हैं। वे हमें सही रास्ता दिखाती हैं, जीवन पथ पर आगे बढ़ने में हमारा साथ देती हैं। महात्मा गांधी ने कहा है ' अच्छी पुस्तकें पास होने पर हमें भले मित्रों की कमी नहीं खटकती, वरन मैं जितना पुस्तकों का अध्ययन करता हूं उतनी ही वे मुझे उपयोगी मित्र मालूम होती हैं।' मानव जीवन संसार का ज्ञान असंख्य अनेकताओं से भरा पड़ा है। मनुष्य का अपना मानस ही इतने अधिक विचारों से भरा रहता है, क्षण- क्षण नई लहरें उत्पन्न्ा होती रहती हैं। इन अनेकताओं का परिणाम होता है मनुष्य के अंतर बाह्म जीवन में अनेकों संघर्ष। विचार संग्राम में पुस्तकें ही मनुष्य के लिए प्रभावशाली शस्त्र सिद्ध होती हैं। एक व्यŸिा का ज्ञान सीमित एकांगी हो सकता है लेकिन उŸम पुस्तकों के स्वाध्याय से मनुष्य सही-सही समाधान खोज सकता है। खासकर विचारों के संघर्ष में पुस्तकें ही सहायक सिद्ध होती हैं। पुस्तकें मन को एकाग्र और संयमित करने का सबसे सरल साधन हैं। अध्ययन करते-करते मनुष्य जीवन में समाधि अवस्था को प्राप्त कर सकता है। एक बार लोकमान्य तिलक का आपरेशन होना था। इसके लिए उन्हें क्जोरोफार्म सुंघाकर बेहोश करना था लेकिन इसके लिए डाॅक्टर को मना कर दिया और कहा 'मुझे एक गीता की पुस्तक ला दो, मैं उसे पढ़ता रहूंगा और आपरेशन कर लेना।' पुस्तक लाई गई। लोकमान्य उसके अध्ययन में ऐसे लीन हुए कि डाॅाक्टरों ने आपरेशन किया तब तक वे तनिक हिले भी नहीं, न कोई दुख ही महसूस किया। पुस्तकों के अध्ययन में ऐसी तल्लिनता प्राप्त हो जाती है कि जो लंबी योग साधनाओं से भी प्राप्त नहीं होती है।
पुस्तकों के अध्ययन के समय मनुष्य की गति एक सूक्ष्म विचार लोक में प्रवाहित होने लगती है। दृश्य जगत, शरीर यहां के कई व्यापार हो-हुल्लड़ भी मनुष्य उस समय भूल जाता है। सूक्ष्म विचार लोक में भ्रमण करने का यह अनिर्वचनीय आनंद योगियों की समाधि-अवस्था के आनंद जैसा ही होता है। इस स्थिति में मनुष्य दृश्य जगत से उठकर अदृश्य संसार में, सूक्ष्म लोक में विचरण करने लगता है और वहां कई दिव्य चेतन विचारों का मानसिक स्पर्श प्राप्त करता है। यह ठीक उसी तरह है जैसे योगी दिव्य चेतना का सन्न्ािध्य प्राप्त करता है ध्यानावस्ािा में। पुस्तकों का अध्ययन ऐसा साधन है, जिससे मनुष्य अपने अंतर्बाह्म जीवन का पर्याप्त विकास कर सकता है। मनोविकार से परेशान, दुःख-दर्द के समय उŸाम पुस्तकें अमृत हैं, जिनका सान्न्ािध्य प्राप्त कर वह अपना उस समय दुःख दर्द, क्लेश सब कुछ भूल जाता है। अच्छी पुस्तकें मनुष्य को धैर्य, शांति, सांत्वना प्रदान करती हैं। किसी ने कहा है- 'सरस पुस्तकों से रोग पीड़ित व्यक्ति को बड़ी शांति मिलती है। वैसे ही मन या शरीर की पीड़ा को शांत करने के लिए उŸाम पुस्तकों का अवलंबन लेना सुखकर होता है। उŸाम पुस्तकें आदर्श ग्रंथ बहुत बड़ी संपŸिा है। अपनी संतति के लिए सर्वोपरि मूल्यवान वस्तु है संसार में। जो अभिभावक अपनी संतान के लिए धन, वस्त्र, सुख, अमोद-प्रमोद के साधन ना छोड़कर उŸाम पुस्तकों का संग्रह छोड़ जाते हैं वे बहुत बड़ी संपŸिा छोड़ते हैं। क्योंकि उŸाम ग्रंथों का अध्ययन करके मनुष्य, ऋषि, देवता महात्मा, महापुरुष बन सकता है। जिन परिवारों में ज्ञानार्जन का क्रम पीढियों से चलता रहता है, उनमें से पंडित, ज्ञानी, विद्वान अवश्य निकलकर आते हैं। जहां पुस्तकें होती हैं। वहां मानों देवता निवास करते हैं। वह स्थान मंदिर है, जहां पुस्तकों के रुप में मूक किंतु ज्ञान के चेतनायुŸा देवता निवास करते हैं। वे माता-पिता धन्य हैं जो अपनी संतान के लिए उŸाम पुस्तकों का एक संग्रह छोड़ जाते हैं क्योंकि धन, संपŸिा, साधन सामग्री तो एक दिन नष्ट होकर मनुष्य को अपने भार से डुबो भी सकती हैं, किंतु उŸाम पुस्तकों के सहारे मनुष्य भवसागर की भंयकर लहरों में भी सरलता से तैरकर उसे पार कर सकता है। जीवन में अन्य सामग्री की तरह हमें उŸाम पुस्तकों का संग्रह करना चाहिए। जीवन में विभिन्न्ा अंगों पर प्रकाश डालने वाले, विविध विषयों के उŸाम ग्रंथ खरीदने के लिए खर्च के बजट में सुविधानुसार आवश्यक राशि रखनी चाहिए। कपड़े, भोजन, मकान की तरह ही हमें पुस्तकों के लिए भी आवश्यक खर्चे की तरफ ध्यान रखना चाहिए। स्मरण रखा जाना चाहिए कि उŸाम पुस्तकों के लिए खर्च किया जाने वाला पैसा उसी प्रकार व्यर्थ नहीं जाता, जिस तरह अंधेरे बियावान जंगल में प्रकाश के लिए खर्च किया जाने वाला धन। धन कमाना कोई बड़ी बात नहीं है। पढ़े लिखे और विचारवान व्यक्तियों के लिए तो वह सबसे छोटी समस्या है। ज्ञान का उद्देेश्य व्यक्तिगत जीवन में शांति और समाजिक जीवन में सभ्यता और व्यवस्ािा लाना है, वह भी शिक्षा और ज्ञान के अभाव में पूरा नहीं हो सकता। इसलिए पढ़ना सब दृष्टि से आवश्यक है। पुस्तकालय समाज की अनिवार्य आवश्यकता है। मनुष्य को भोजन, कपड़े और आवास की व्यवस्था हो जाती है तो वह जिंदा रह जाता है, शेष उन्न्ाति तो वह उसके बाद सोचता है। समाज यदि विचारशील है तो वह शांति और सुव्यवस्था ही अन्य आवश्यकताएं बाद में भी पूरी कर सकता है, इसलिए पुस्तकालय समाज की पहली आवश्यकता है, क्योंकि उससे ज्ञान और विचारशीलता ही सर्वोपरि आवश्यकता की पूर्ति होती है, किंतु इतना ही काफी नहीं है कि एक स्थान पर पुस्तकें जमा कर दी जाएं, उनके विषय चाहे जो कुछ हों। गंदे और दूषित विचार देने वाली पुसतकों से तो अनपढ़ अच्छा जो बुराई करता है पर बढाता नही। जितनी बुराइयां बन चुकी हैं, उन्हीं तक सीमित रह जाता है। यथार्थ की आवश्यकता की पूर्ति उन पुस्तकों से होती हैं, जो प्रगतिशील विचार दे सकती हैं, जो समस्याएं हल कर सकती हैं, जो नैतिक और सांस्कृतिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक समाजिक और विश्वबंधुत्व की प्रेरणाएं और शिक्षाएं भी दे सकती हैं।
जीवन में समझौते का महत्व
हमारे जीवन में समझौतों का बहुत महत्व है, बल्कि हम कह सकते हैं कि हमारा समूचा जीवन ही समझौतों का एक कभी न टूटने वाला सिलसिला हैै। कोई शख्स कितना भी शक्शिाली, घमंडी और अमीर क्यों न हो उसे भी जीवित रहने के लिए कई बार कई जगह समझौते करने ही पड़ते है। इसे हम यूं भी कह सकते हैं कि उसे भी दूसरों के विचारों को महत्व देना पड़ता है, उनका आदर करना पड़ता है। हम दूर न जाकर अपने परिवार को ही लें। आजकल के छोटे परिवारों में मां-बाप, बच्चे और कभी-कभी सास ससुर साथ रहते है।
बुजुर्गों के साथ तो कई बातों में मतभेद होने पर समझौते करने ही पड़ते हैं कुछ वे झुकते हैं कुछ बेटे-बहू तभी घर मे सुख- शांति रह सकती है। नहीं तो आए दिन छोटी-छोटी बातों को लेकर मतभेद और उससे उत्पन्न तकरारों का सामना करना पड़ता है, जिससे घर की शांति तो भंग होती ही है पास-पड़ोस में बदनामी भी होती है और लोगों का मुक्त में मनोरंजन होता रहता है। यही हाल बच्चों के साथ है, बढ़ते हुए बच्चे अपनी अस्मिता के प्रति जागरूक रहते हैं। अपने अहं की संतुष्टि के लिए वे कई बार आपके ठीक विपरीत जाएंगे। खासकर किशोरावस्था में जब बच्चे न उच्चे ही रह जाते है न बड़ों में ही उनकी गिनती आती हैं, तब वे अघिक संवेदशील और विद्रोही हो जाते हैं। उनके साथ व्यवहार में तब आपको काफी सूझबूझ और धैर्य से काम लेना होता है। ऐसे समय में भी समझौतों की आवश्यकता पड़ती है। समझौते का मतलब यह हर्गिज नहीं कि आप उनकी वाजिब और गैरवाजिब हर बात पर झुकते हैं और उन्हें मनमानी करने दें, ऐसा न करके कोई बीच का रास्ता अपनाया जा सकता है, जिससे बच्चों को यह भी न लगे कि बनकी बात नहीं मानी जा रही है, उनका विरोध किया जा रहा है, और आपकी बात भी रह जाए, जो कि अक्सर उन्हीं की भलाई के लिए होती है। जिसे वे अपनी अपरिपक्वता तथा नादानी के कारण उस समय समझ नहीं पाते हैं।
उदाहरण के लिए आपकी बेटी अपने मित्र के साथ पिक्चर जाने की जिद कर रही है तो आप उसे छूटते ही कड़े शब्दों में इंकार न करें, हो सके तो बसके हम उम्र भाई या बहत अगर हैं तो उसे भी साथ भेज दें या किसी और सहेली को साथ ले जाने को कहें या फिर यह कह सकती हैं कि 'बेटी क्यों न यह पिक्टर तुम हमारे साथ ही देखो। आखिर आप भी तो पिक्चर बेटी की पसंद की ही देख लें तो उसमें हर्ज ही क्या है, उसका मन भी रह जाएगा, वह आपसे नाराज होकर मुंह न फुलाएगी, या हो सकता है वह विद्रोह मर ही उतर आये। हर बात के लिए अगर आप बच्चों को टोकते रहने या न करते रहने की आदत डाल लेंगे तो वे भी आपकी मर्जी के खिलाफ जाने की आदत डाल लेंगे। आपके घर में नई बहू आती है। अलग वातावरण में पत्नी होने के कारण उसकी आदतें आपके घर के अनुरूप एकदम तो नहीं हो सकतीं। आप धैर्य और समझ से काम लेंगे, उसे थोड़ा वक्त देंगे, तभी वह अपने आपको घर के रंग मे ढाल पाएगी ।
घर मे हंसी-खुशी का हल्का-फुलका माहैाल बनाए रखने के लिए स्वभाव का लचीलापन निहायत जरूरी है। कठोर अनुशासन में हर घड़ी रहना कोई पसंद नहीं करता चाहे फिर वो आपके बेटे-बेटी हों, बहू हो या पोते-पोती। जी, हां छोटे बच्चे भी विद्रोह करना बखूबी जानते हैं। नन्हें-नन्हें हाथ-पैर पटककर चीख-चिल्लाकर वे भी अपनी नाराजगी प्रकट करना जानते हैं। समझौते की आदत अगर बड़ों में होगी तो बच्चे स्वतः ही इसे अपना लेंगे। सभी मां-बाप अपने बच्चों को स्नेह करते हैं, उसी तरह बच्चे भी मां-बाप को प्यार करते हैं। समझौता उसी प्यार और स्नेह का प्रदर्शन है। स्नेह, प्यार करने वालों के लिए समझौतों से आपसी यद्भाव बढ़ता है। एक -दूसरे को समझना आसान हो जाता है। समझौतों से जीवनपथ सुगम हो जाता है, जिस पर वक्त के पहिए आसानी से फिसलतें चले जाते हैं। आपसी रिश्ते आईने की तरह नाजुक होते है जो चटख गए तो फिर कभी नहीं जुड़ पाते। दैनिक जीवन मे हम छोटी-छोटी तुच्छ बातों में दूसरों की भवना की परवाह किए बगैर अपनी ही मर्जी चलाना चाहते हैं, हमारा अहं, इतना प्रबल होता है कि दूसरे की मर्जी को मान लेना हम अपनी हार समझते हैं।
इस तरह अहंवादी बनकर हम हर जब हर एक के पास सोचने के लिए अपना दिमाग, अपनी बुद्धि है, तो फिर उसे अपने ढंग से सोचने और व्यवहार करने की आजादी क्यों न मिले? जैसे आपको अपने ऊपर किसी की पर्जी लादा जाना अच्छा नहीं लगता तो दूसरे को भी यह अच्छा नहीं लगेगा, फिर इसका हल क्या है? इसका हल है समझौता। एक बहुत छोटा सा उदाहरण है, आपको अरहर की दाल पसंद है और आपके पति को उड़द की दाल। आप रोज ही अरहर की दाल बनाएंगी तो लाजिमी है कि पतिदेव के बुरा लगेगा, वे खुद यह कभी न कहेंगे कि तुम अरहर की दाल कभी न बनाओ और चूंकि मुझे उड़द की दाल मसंद है रोज़ उड़द की दाल ही बनाओ। इसलिए आप कभी बनकी पसंद की उड़द की दाल बनाएगी और कभी अपनी पसंद की अरहर की तो पतिदेव भी खुश रहेंगे और आप भी खुश। छोटी-छोटी रोजमर्रा की बातों से ही पति, घर परिवार तथा जीवन में मधुरता या कड़वाहट पैदा होती है। जिनका कारण समझौते करना या न करना ही होता है।
पति-पत्नी जब एक-दूसरे का दृष्टिकोण समझने से इंकार कर एक-दूसरे के सामने चुनौती बन खड़ हो जाते हैं, अपने-अपने अहं के विष्धरों को दूध पिलाते, वातावरण विषमय कर लेते हैं, जिसकी फिजा में फिर उन्हें सांस लेना दूभर हो जाता है। नतीजा होता है अलगाव, तलाक परिवार का तितर-बितर हो जाना। प्यार का नीड़ जो उन्होंने कभी यत्न से बनाया था, तितर-बितर हो जाता है। ऐसे में बच्चों को ज्यादा फजीहद होती है क्योंकि उन्हें माता-पिता दोनों के होते हुए भी एक के प्यार से वंचित रह जाना पड़ता है जो उनके व्यक्तित्व के संमूर्ण विकास में बाधक होता है। जीवन में संघर्ष की हर क्षेत्र में संभावना बनी ही रहती है, जिसके मूल में कारण यही है कि कोई भी दो व्यक्ति एक से नही मिलेंगे। उनकी सोच, शिक्षा-दीक्षा कंपनी, मित्र मंडली जिनमें उठते-बैठते हैं उनके वंशानुगत गुण-अवगुण भिन्न-भिन्न होते हैं। अतः साथ रहने के लिए काफी समझौते करने पड़ते हैं। घर की तरह ही बाहर नौकरी, वयापार इत्यादि में भी समझौता किए बगैर काम नहीं चलता। मिस्टर खन्ना पहले दर्जे के अहंवादी हैं अपने आगे वे किसी को कुछ नहीं समझते, उनकी मानसिकता है 'अहं ब्रह्यस्मि'। विधवा बूढ़ी मां और अनमढ़ बीबी पर तो अपना हुकुम चला लेते हैं लेकिन यही तेवर जब वे अपने सहकर्मियों में दिखाते हैं, तो वे भला उनका रौब क्यों सहने लगे। इस कारण वे सबसे आये दिन उलझते रहते हैं। परिणामस्वरूप बनके बाॅस से उनकी शिकायतें होने लगीं। शुरू में बनके बाॅस मिस्टर सेठी ने ध्यान नहीं दिया वे अभी नए-नए ट्रान्सफर होकर आए थेै लेकिन जब वे खुद खन्ना के संपर्क में आने लगे और यही तेवर उसने बाॅस का बाॅस बनकर दिखाने चहो, तो पहले उन्होंने चेतावनी देकर छोड़ दिया, लेकिन इस पर भी जब खन्ना का रवैया न बदला दूर-दराज के छोटे से गांव में कर दिया गया। अब खन्ना के होश ठिकाने आए, जाकर बाॅस से माफी मांगी, बीबी-बच्चों की दुहाई दी अब वह अपरी सही स्थिति पर आ गया था, तब बाॅस ने आखिरी चेतावनी देकर माफ कर दिया।
गुणों से भरपूर-काली मिर्च
काली मिर्च को प्राचीन काल से ही घरेलू मसालों का राजा माना जाता है। काली मिर्च बहुत उपयोगी मानी जाती है, क्योंकि शरीर की हर व्याधि का इसमें समाधान छिपा है। यदि भूख कम लगती है या ज्यादा। दोनों रोगों को काली मिर्च ठीक करती है। यदि भूख कम लगती है या ज्यादा। दोनों रोगों को काली मिर्च ठीक करती है। भोजन के स्वाद में वृद्धि होती है। शहद के साथ काली मिर्च खाने से - गले की खराश, दर्द, कफ ठीक हो जाता है। आचार चटनी में काली मिर्च डालने से वे स्वादिष्ट हो जाते हैं। विशेषज्ञों का मत है कि काली मिर्च पाउडर का सेवन करने से बवासीर में आराम पहुंचता है। पापड़, बड़ी और मठरी बनाते समय उसमें कालीमिर्च का प्रयोग करते हैं। इससे मठरी कड़क एवं स्वादिष्ट बनती है। शिकंजी, लैमन वाॅटर एवं शर्बत में काली मिर्च डालकर पिएं तो चिŸा शांत एवं प्रसन्न हो उठता है। महंगी होने के कारण इसमें पपीते के बीजों का मिश्रण किया जाता है, क्योंकि आकृति और आकार में पपीते के बीज कालीमिर्च जैसे ही नजर आते हैं।
इसको अंग्रेजी में 'ब्लैक पीपर' कहते है। वनस्पति विज्ञान में इसका वैज्ञानिक नाम 'पाईपर नाईग्रम' है। यह पाईपरेसी जाति का पौधा होता है। यह पाचन क्रिया को तेज करती है। रक्त शोधक होती है ंतथा मरोड़ और पेचिश ठीक करने में सहायक होती है। यह सुगंधित मसाला माना जाता है। यदि काली मिर्च का चूर्ण लगातार भोजन से पहले फांका जाए तो यह संजीवनी की भांति कार्य करता है और शरीर का काया कल्प करता है।
मंत्र साधना इष्ट से संपर्क का माध्यम
मन्त्र साधक और इष्ट में संपर्क का माध्यम है। मानव ने अपने कल्याण के साथ्ज्ञ.साथ दैविक जीवन की सम्पूर्ण समस्याओं के समाधान हेतु यथा समय मंत्रों का प्रयोग किया है। विविध प्रयोजन के लिए मंत्रों का उपयोग और परिणाम कहनें सुननें से ज्यादा अनुभव का विषय है। मंत्र चिकित्सा के द्वारा व्यक्ति रोग निवारण के मंत्रों रूपी रामबाण औषधी का प्रयोग कर सकता है। जीवन में उत्रति पाने के लिए मंत्र एक समर्थ उपाय है। मंत्रों में प्रयुक्त स्वरए व्यंजनए नाद व बिंदू देवताओं या षक्ति के विभित्र रूप एवं गुणों को प्रदर्शित करते है। मन्त्राक्षरों वाद एवं बिन्दूओं में दैवी शक्ति छिपी रहती है। मंत्र उच्चारण से ध्वनि उत्पत्र होती है। उत्पत्र ध्वनि का मंत्र के साथ विशेष प्रभाव होता है। इसके प्रयोग से बड़े से बड़े दूर्लभ कार्यों को किया जा सकता है। लिंगानुसार मंत्रों के तीन भेद तीन प्रकार है1. जिन मंत्रों के अंत में है या फ्टट् लगा होता है। ऐसे मंत्र, शांति कर्म या वशीकरण में सिद्ध किये जाते है।
2. स्त्री मंत्र . जिन मंत्र के अंत में स्वाहा का प्रयोग होता है। ऐसे मंत्रों का उपयोग षुद्ध क्रियाओं के लिए किया जाता है।
3. नपुंसक लिंग . मंत्रों के अंत में नमः प्रस्तुत होता है, इसका उपयोग समयानुसार किया जाता है।
मंत्र साधना एवं कार्य सफलता हेतु मंत्र जाप के लिए उत्तम त्रतुए तिथिए दिन व समय का चयन करना बहुत आवश्यक है। मंत्र साधक को सर्वप्रामि योग्य गुरू मंत्र दीक्षा लेनी चाहिए। इसके मंत्रजाप के समय मंत्र का स्वर आसन पर योग्य दिशा में बैठना आदि अनेक नियमों का परिपालन करना आवश्यक होता है। मंत्र का प्रभाव आलौकिक होता है किंतु जब तक अनुभव या श्रद्धा न हो जाए तब तक साधना की इच्छा जागृत नहीं हो सकती। मंत्रो द्वारा रोग चिकित्सा का हमारे वेदों पुराणों व मंत्र शास्त्रों में शास्त्रों में बखूब वर्णन मिलता है। एक ध्वनियों के समूह से बनी एक आलौकिक उर्जा का स्त्रोत होता है। ध्वनि विज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा शरीर पर उसकी अचुक प्रतिक्रिया होती है। मंत्रों पर ध्वनि का सटीक व निच्क्ष्ति कम होता है। जिससे हमारे सूक्ष्म शरीर में एक कपन उत्पत्र होकर हमारे सिूल शरीर और उसके चारों ओर के वातावरण को आवेशित कर देता है। मंत्रों की सार्थकता के बारे में कहा गया है दैवाधीन जगत्सर्व मंत्राधीनश्र देवता। अर्थात देवताओं के अधीन संपूर्ण संसार है और यह देवता मंत्रों के देवता मंत्रों के अधीन हैं कि विधि और श्रद्धा से अनुष्ठान किया जाए तो उस मंत्र से संबंधित शक्ति साधक के भीतर जागृत होती है। कि दस छात्र गहीर नींद में सो रहे हों तो राम लाल का नाम पुकारने पर उसी की नींद टुटती है।। उसी तरह जिस देवशक्ति को पुकारा जाता है, वही शक्ति जागृत होती है। कई बार आत्म शक्ति के बल पर नए मंत्र भी प्रकट हो जाते है।
चुटकले
टीचर: पप्पू, तुम्हारी डैडी की कम करदे ने?
पप्पू: ओही जो मम्मी कहंदी है।
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स्टूडंेट टीचर से: झोपड़ी को इंग्लिश में क्या कहते हैं?
टीचर: हट
स्टूडेंट: सर आप डांट क्यों रहे हैं, अगर आप को नहीं आता तो कोई बात नहीं।
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भीड़ से भरी हुई बस में संता ने आंख बंद की हुई थी
बंता संता से: तुमने आंखें क्यांे बंद की है? क्या तुम बीमार हो?
संता: बूढ़े लोग बस में खड़े रहें ये मुझे अच्छा नहीं लगता इसलिए आंख बंद कर ली है।
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'क्या बात है बड़े कमजोर लग रहे हो?'
'दो महीने से बीमार हूं। कई डाॅक्टरों को दिखा चुका हूं, किसी की समझ में नहीं आ रहा कि क्या बीमारी है।'
'ऐसा करो तुम मेरे डाॅक्टर से मिल लो।'
'क्या वह अच्छा डाॅक्टर है?'
'हां पिछले 20 साल से प्रैक्टिस कर रहा है।'
'फिर तो ना बाबा! जो 20 साल से प्रैक्टिस कर रहा है, वह क्या इलाज करेगा?'
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एक आदमी घबराया हुआ थाने पहंुचा और बोला- थानेदार जी, मैं तो लुट गया। आज सुबह जब सो कर उठा तो मेरे घर का सारा कीमती सामान गायब था। मेरे तो हाथों के तोेते उड़ गए।
- भई, कितने तोते थे? थानेदार ने पूछा।
सोनू का सपना
कहानी
सोनू-मोनू के साथ आसमान में उड़ा जा रहा था। बादलों के बीच से गुजरते हुये वे निरंतर ऊपर चले जा रहे थे। ठंडी हवा सरसराकर उनके बगल से निकल जाती। उड़ते-उड़ते सोनू को मधुर संगीत की धीमी धुन सुनाई देने लगी। वे दोनों एक ऐसे स्थान पर उतर गये, जहां चमकीला नीला प्रकाश फैला हुआ था। वह स्थान बहुत सुदंर था। जगह-जगह इंद्रधनुषी रंग बिखरा हुआ था। श्यामल वर्ण के बादल के टुकड़े नृत्य करते से जान पड़ते थे। सोनू मोनू के साथ खड़ा एक अत्यंत सुन्दर पक्षी की ओर देख रहा था। उसने आज तक ऐसा सुंदर दृश्य नहीं देखा था। वह पक्षी अपने नीले पंखों को फैलाये हुये लाल रंग की चोंच खोले बहुत संुदर दिख रहा था। उसके मुंह से निकलती बांसुरी की सी मधुर ध्वनि सुनकर लगता था मानो वह किसी खास उद्देश्य से वृक्ष पर बैठे अपने साथियों को बुला रहा है। सामने खड़े वृक्ष के पत्ते नीलम के समान चमक रहे थे, उसमें खिले फूल सोने के समान दिखाई दे रहे थे और पेंड़ के ऊपर चार सुंदर पक्षी बैठे थे, जो मधुर ध्वनि निकाल रहे थे। आसपास ढेर सारे रंग बिरंगे फूल खिले थे, जिनके ऊपर तितलियां मंडरा रही थीं।
तभी मोनू कहती है 'सोनू, अब यही मेरी दुनिया है। ये ही मेरे साथी हेैं। मैं तुम्हें यहां इसलिए लाई हूं कि तुम देख सको कि तुम्हारी बहन कितनी खुश है। क्या तुम मुझे सदा खुश देखना पसंद नहीं करोगे? बोलो मेरे भैया, क्या तुम मुझे सदा खुश देखना पसंद करोगे?'
'सोनू, उठो ना, देखो तो दिन कितना निकल आया।' सोनू की मां उसको उठाते हुये बोली। सोनू हड़बड़ाकर बिस्तर से उठ बैठा चारों ओर आंखें फाड़-फाड़कर देखने लगा। फिर जोरों से चीख पड़ा- 'मोनू, तुम कहां हो? मुझे छोड़कर तू कहां चली गई मेरी बहना।'
सोनू की हरकत देखकर उसकी मां घबरा उठी। उसने अपने लाड़ले को बांहों में भर लिया। फिर आंखों में आंसू भरकर बोली-'तुम्हें क्या हो गया मेरे लाल? जब देखो, मोनू-मोनू पुकारते रहते हो। न ठीक से खाना खाते हो, न ठीक से सोते हो। जाने वाले कभी लौटकर नहीं आते बेटा।' यह कहते-कहते सोनू की मां भी रो पड़ी।
सोनू अब तक सामान्य हो चुका था। उसने मां को दुःखी देखा तो कहा- 'सुबह-सुबह एक सपना आ गया था मां।
नित्यकर्म से निवृत्त होकर सोनू आंगन में पड़ी कुर्सी पर गुमसुम बैठ गया। आज भी उसके दिल में खाने की इच्छा नहीं थी, परंतु मां के जोर डालने पर वह इंकार न कर सका ओर बेमन से खाने लगा।
बैठे-बैठे सोनू अतीत की यादों में खो गया। उसमें और मोनू में कितना प्यार था। उसका असली नाम सोहन था और उसकी प्यारी बहन का नाम मीना था। माता-पिता प्यार से दोनों को सोनू-मोनू कहकर पुकारते थे। मीना उससे दो वर्ष छोटी थी, जिसके कारण वे एक पल के लिए भी अलग रहना पसंद नहीं करते थे। मीना को बचपन से ही फूलों से बहुत प्यार था। अपने छोटे से आंगन में मीना ने ढेर सारे फूलों के पौधे लगा रखे थे। दोनो ंभाई-बहन पौंधों में पानी डाला करते थे। जब तितलियां उन फूलों के ऊपर मंडराया करतीं तो दोनांें बड़े प्यार से उन्हें देखा करते थे। अचानक एक दिन मीना बीमार पड़ गयी। पिताजी ने डाक्टर को दिखाया तो उसने टाइफाइड बताया और दवा दी। मीना के स्वास्थ्य में सुधार न होने पर पिताजी ने बड़े-बड़े डाक्टरों से मीना का इलाज कराया और बहुत पैसा खर्च किया, लेकिन मीना ठीक नहीं हुई और एक दिन पूरे परिवार को रोते-बिलखते छोड़कर सदा के लिये सो गई।
सोनू का रो-रोकर बुरा हाल था। कई दिन तक उससे कुछ खाया-पिया नहीं गया। जाने से पहले मीना ने अपने भाई से कहा था- 'मेरे प्यारे सोनू भैया, मैं जा रही हंू। तुम हमारे फूलों की देखभाल करना। हर फूल की मुस्कराहट में तुम मुझे हमेशा दिखोगे।
सोचते-सोचते सोनू की आंखों में आंसू आ गये। आज मीना ने सपने में फिर वही बातें दोहराईं थी। उसने देखा कि उसके लगाये पौधे पानी के अभाव में मुरझा गये हैं। मीना की मौत के बाद किसी ने इनकी ओर ध्यान नहीं दिया था। अब न वहां तितलियों थीं और न सुंदर पक्षी। पोैधों में फूल भी नहीं खिले थे। ऐसा लगाता था, मानो मीना की मौत में ये नन्हें-नन्हें पौधे शरीर छोड़कर आंसू बहा रहे हैं। सोनू से यह सब देखा न गया। वह अपनी जगह से उठा और मन ही मन कहने लगा- 'नहीं, मैं अपनी प्यारी बहन मोनू को लौटा के ही रहूंगा। मैंने जो सपना देखा हेै उसे साकार करके रहूंगा।'
पौधों के आस-पास पड़ी सूखी पत्तियों को सोनू ने उठाकर फेंक दिया। फिर पौधों में पानी डाला। पानी पाकर पौधों में जीवन का संचार हुआ। अपने पिताजी से उसने ढेर सारे नये पौधे मंगा लिये और सबको अपने आंगन में लगा दिये।
नित्य देखभाल के कारण पौधे फिर अपनी पहली अवस्था में आ गये। फूल खिलने लगे। तितलियां आकर मंडराने लगीं। दो चार छोटे पक्षी भी आसपास चहकने लगे। सोनू के लगाये गये पौधे भी मंद-मंद मुस्कराने लगे। यह दृश्य देखकर सोनू को सपना याद आ गया। उसे लगा कि नन्हें-नन्हंे फूलों के भीतर से उसकी प्यारी बहन मीना झांक रही है और उससे कह रही है- 'आज मैं बहुत खुश हूं, मेरे भैया।' यह दृश्य देखकर सोनू की आंखों में खुशी के आंसू आ गये। उसका सपना साकार हो चुका था।
भ्रश्टाचार आज की सबसे बड़ी समस्या
भारत की संस्कृति अध्यात्म प्रधान संस्कृति है। भोगने और देखने की जीवनशैली ही ऋषियों-मुनियों की सम्पूर्ण जिन्दगी का व्याख्या सूत्र है। यही व्याख्या सूत्र जन-जन की जीवनशेैली बने, तभी व्यक्ति समस्याओं से मुक्ति पाकर सुखी और शांतिपूर्ण जीवन का आनन्द पा सकता हैै।
विलासिता व्यक्ति की न तो आवश्यकता है, न अनिवार्यता, न सुविधा हेै और न ही मनोरंजन। वह केवल भोगवृद्धि का उच्छंृखल रूप हैै। समझदार मनुष्य उसमें किसी भी सार्थक तल को नहीं देख पाता। वहां केवल अर्थ की लोलुपता और उसकी पूर्ति के साधन के सिवाय और कुछ नहीं बचता। विलासिता केवल भोग का पोषण है। इसमें काम और अहम दोनों वृत्तियां काम करती हैं।
आज का मनुष्य भ्रम में जी रहा है। जो सुख शाश्वत नहीं है, उसके पीछे मृग मरीचिका की तरह भाग रहा है। धन-दौलत, जर-जमीन कब किसके रहे हैं इस संसार में शाश्वत? परन्तु मनुष्य मान बैठा है कि सब कुछ उसके साथ ही जाने वाला है। पूरी दुनिया पर विजय की आकांक्षा पालने वाला सिकन्दर भी मौत के बाद अपने साथ कुछ लेकर नहीं गया, खाली हाथ ही गया था।
आकांक्षाएं-कामनाएं वह दीमक हैं, जो सुखी और शांतिवूर्ण जीवन को खोखला कर देती है। कामना-वासना के भंवरजाल में फंस मन, लहलहाती इन्द्रिय विषयों की फसल पर झपट पड़ता है। आकर्षक-लुभावने विज्ञापनांे के प्रलोभनों में फंसा तथा उच्च जीवन स्तर के नाम की आड़ में व्यक्ति ढेर सारी आवश्यक वस्तुओं को चाहने लगता है, जिनका न कहीं ओर है न छोर।
मनुष्य हम दो में सिमटता, सिकुड़ता जा रहा है। फलतः मानवीय संबंध बुरी तरह से प्रभावित होकर बिखर रहे हैं, परिवार टूट रहे हैं, स्नेहिल संबंधों में दरारें पड़ रही हैं। ये सब बातें भारतीय संस्कृति के मूलभूत सिद्धान्त, सदाचार, सद्भाव, शांति, समता, समरसता को खत्म करने पर तुले हुए हैं। मनुष्य स्वभावतः कामना बहुल होता है। एक लालसा-कामना अनेक लालसाओं की जननी बनती है। मनुष्य हम दो में सिमटता, सिकुड़ता जा रहा है। फलतः मानवीय संबंध बुरी तरह से प्रभावित होकर बिखर रहे हैं, परिवार टूट रहे हैं, स्नेहिल संबंधों में दरारें पड़ रही हैं। ये सब बातें भारतीय संस्कृति के मूलभूत सिद्धान्त, सदाचार, सद्भाव, शांति, समता, समरसता को खत्म करने पर तुले हुए हैं। मनुष्य स्वभावतः कामना बहुल होता है। एक लालसा-कामना अनेक लालसाओं की जननी बनती है।
समस्याएं जीवन का अभिन्न अंग है, जिनका अंत कभी नहीं हो सकता है। एक समस्या जाती है तो दूसरी आ जाती है। यह जीवन की प्राकृतिक चक्रीय प्ऱिक्रया है। वर्तमान युग में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है, जिसे किसी प्रकार की समस्या न हो। व्यक्ति घर का स्वामी है,समाज एवं संस्था का संचालक है या किसी जनसमूह का प्रबंधक एवं व्यवस्थापक है तो उसके सामने समस्याएं आना अनिवार्य है। व्यक्ति चाहे अकेला हो या पारिवारिक, समस्याएं सभी के साथ आती हैं। सारी समस्याओं का समाधान है। अटल धैर्य के बल पर व्यक्ति को समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। व्यक्ति को इस तथ्य एवं सच्चाई को मानना होगा कि जीवन में सदैव उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। जीवन में ऐसी घटनाएं घट जाती हैं, जिनकी वह कभी कल्पना भी नहीं कर सकते, लेकिन उसको किसी अनुकूल प्रतिकूल परिस्थितियों में अपना धैर्य एवं संतुलन नहीं खोना चाहिए।
नारी होने पर लज्जा
कहानी
बंदरिया ने मृत बच्चे को अपनी छाती से लगा रखा था। जब वह हमारी छत से दूसरी छत पर कूदी तो भी उसने इसे एक हाथ से बड़ी सावधानीपूर्वक संभाले रखा। मैनें इसे देख आवाज लगाई- उषा, जरा जल्दी बाहर आओ। देखो। यह है मां की सच्ची ममता।
उषा ने आते ही कहा- 'ओह बलजीत!' मैंने सोचा कुछ नया बताने लगे हैं। मैं पिछले तीन दिनों से इस अद्भुत दृश्य को देख रही हंू।... मेरे देखते-देखते ही वह बच्चा बिजली के करंट से सामने वाली गली में गिरा था। बांदरी रोती-चीखती गली में कूद पड़ी। अपने बच्चे को बार-बार हिलाती-डुलाती रही किन्तु वह मर चुका था।
'तब?' बलजीत ने चकित होकर पूछा।
'तब से अब तक यह मां अपने बच्चे को छाती से लगाए हुए है। कभी-कभी उतारकर रखती तो है किन्तु लाश के पास बड़ी सावधान होकर बैठी, इसे देखती रहती है। और कहते-कहते उषा चुप हो गई।'
'हां, हां, कहो। चुप क्यों हो गई।'
'इसी गली के उस तंग छोर में कल प्रातः एक नवजात शिशु के लावारिस पड़े होने की खबर मुझे कौशल्या दीदी ने बताई। इंसान का बच्चा गली में लावारिस... कोई भी कुत्ता, बिल्ली उसे खा सकते थे, जबकि पशुु का बच्चा मां की छाती के साथ वात्सल्य पा रहा है... मुझे अपने नारी होने पर इतनी लज्जा तथा ग्लानि हुई कि मैं ये दोनों बातें आपको बताने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाई थी।... अब आपने ही इसे देख लिया तो...।' कहते-कहते उषा रसोई घर मेें घुस गई।
घरेलू हिंसा से अब भी मुक्ति नहीं महिलाओं को
बाहर जाकर कुछ हजार रुपए कमाने वाली महिलाएं, गृहणियों से ऊपर क्यों मानी जाती हैं? ऐसा नहीं हैं कि ये महिलाएं बाहर नौकरी करके आत्मनिर्भर हैं और गष्हणियां घर में रहकर बेकार हैं। क्या मां की ममता, पत्नी का कर्तव्य, बहू के रूप में महिला का त्याग इन सब के कोई मायने नहीं? अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं को समर्पित एक दिन है। यह हर महिला के लिए गौरव का दिन है। आज भी कई घर ऐसे हैं जहां महिलाएं दिन रात काम करती हैं फिर भी घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। सड़क पर चलते हुए छेड़छाड़ और बलात्कार की भी शिकार हो जाती हैं। यही नहीं घर में भी यौन उत्पीड़न का निशाना बनती हैं।
सीमा की जब शादी तय हुई, तो किसी ने उसे नौकरी छोड़ने के लिए बाध्य नहीं किया पर शादी के बाद परिवार और उसके पति को उसका नौकरी करना अच्छा नहीं लगा। उस वक्त कोई भी रास्ता सीमा की समझ में नहीं आया आखिरकार उसे अपनी शादी तोड़नी पड़ी।
रश्मि और अमित एक साथ नौकरी करते थे। शादी के बाद रष्मि ने अपना पासबुक, चेक और दूसरे कागजात अपने ससुराल वालों के हवाले कर दिया। नतीजा यह कि उसके पति के साथ-साथ ससुराल वालों ने भी उस पर हक जता लिया। रश्मि को अपने टूटे सैंडल बदलने के लिए भी ससुराल वालों की आज्ञा लेनी पड़ती थी। इससे रश्मि को मानसिक आघात लगा और उसे मायके जाना पड़ा।
यह सब घरेलू हिंसा के कुछ उदाहरण हैं। ऐसा नहीं कि महिलाओं को सिर्फ अपने पतियों से ही परेशानी है। अकेली औरत को भी उसके माता-पिता नहीं पूछते। कारण मात्र एक ही होता है कि वह असहाय नारी है। यह सब इसलिए होता हैं क्योंकि महिलाएं सजग नहीं होतीं। लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है।
दरअसल, भारत के महानगरों और कस्बों में पढ़ी-लिखी महिलाएं भी घरेलू हिंसा से निपटने के लिए बने कानून 'डीवीए' (डोमेस्टिक वायलंस एक्ट) के बारे में नहीं जानतीं। अक्टूबर, 2006 में बने अधिनियम की जानकारी अब कई शहरी महिलाओं को ही नहीं, तो छोटे शहरों-कस्बों और गांव की कम पढ़ी और निरक्षर महिलाओं को क्या होगी? हालांकि महिलाओं की सुरक्षा के लिए जब यह कानून बना था तब उम्मीद जगी थी कि घरेलू हिंसा से महिलाओं को मुक्ति मिलेगी। क्योंकि यह अधिनियम उन महिलाओं के लिए खास-तौर से बना था जो पति या ससुराल वालों से मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित होती हैं।
पहले जहां पुरुषों से प्रताड़ित महिलाएं भारतीय दंड सहिता की धारा 498 'ए' पर केस कर अपने लिए तलाक और इंसाफ मांगती थी। वहीं आज डीवीए एक्ट के आने के बाद महिलाएं किसी भी तरह की घरेलू हिंसा के खिलाफ केस कर सकती हैं। न सिर्फ शादी-शुदा बल्कि कोई भी महिला। घरेलू हिंसा को पारिभाषित करता यह एक ऐसा कानून है जिसमें किसी भी तरह की प्रताड़ना जैसे धमकी देना, गाली देना, शारीरिक व मानसिक चोट पहुंचना, आर्थिक सहायता न देना या जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाना तक सभी शामिल हैं। सरकार ने अधिकारी भी तैनात किए हैं जो इस हिंसा की छानबीन करते हैं। वे घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं और बच्चों की मदद करते हैं।
घरेलू हिंसा जैसे अपराध चाहे वह पति करे या कोई और, महिलाओं को जबरदस्त मानसिक आघात देता है जिससे वह जीवन भर एक डर या खौफ में जीती हैं। ऐसे हालात से उबर पाना काफी मुश्किल होता है। कई मामलों में तो महिलाओं का नर्वस ब्रेकडाउन हो जाता है या उन्हें हार्ट-अटैक भी हो जाता है। आम महिला पूरी तरह अपने पति पर निर्भर होती है जबकि कई मामलों में पति उसे अपनी जायदाद समझने लगता है। वह उसके लिए मनोरंजन का साधन होती है और चुपचाप हिंसा को सहती जाती है।
इस देश में हर व्यक्ति को चाहे वह महिला हो या पुरुष, उसे पूरी गरिमा और स्वाभिमान से जीने का अधिकार है। दुर्भाग्यवश लंबे समय से महिलाओं को पुरुषों जैसे अधिकार नहीं मिले। कई एनजीओ महिलाओं को उनका अपना हक दिलाने की कोशिश में लगे हैं। वे महिलाओं की अंदर की शक्ति को उजागर करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि वे अपने अधिकार जान पाएं। हर तीन में से एक महिला बंद दरवाजे के पीछे घरेलू हिंसा का शिकार होती है। अपने अंदर की नारी शक्ति को पहचानिए और इस महिला दिवस पर घरेलू हिंसा के खिलाफ बोलने की ठान लीजिए।
चुटकले
-एक बच्चा आम के पेड़ पर चढ़कर आम तोड़ रहा था। माली ने देख लिया और कहा, 'अभी तेरे बाप से षिकायत करता हूं।' बच्चा बोला, 'वह घर पर नहीं मिलेंगे। बाजू के पेड़ पर आम तोड़ रहे हैं।'
-कपड़े का व्यापारी सो रहा था। उसने सपने में देखा कि एक ग्राहक कपड़ा मांग रहा है और वह नाप रहा है। अनायास नींद में उसका हाथ चादर पर पड़ गया। वह उसे फाड़ने लगा। यह देखकर उसकी पत्नी चिल्लाईः यह क्या कर रहे हो? व्यापारी नींद में ही चिल्लायाः कमबख्त, दुकान में भी मेरा पीछा नहीं छोड़ती।
-पत्नी घबराकर ड्राइवर पति से कहा- मोड़ पर तुम जब भी कार घुमाते हो, मुझे बहुत डर लगता है। पति ने कहा- डरती क्यों हो? जब कार मुड़े तो तुम भी मेरी तरह आंखे बंद कर लिया करो।
-पिता ने पुत्र से कहा- परीक्षा निकट हैं तुम्हंे पूरी रात पढ़ना चाहिए। बेटा करवटें बदलता हुए कहता है- लेकिन आप तो कहते हैं कि रात को उल्लू जागा करते हैं।
-एक आदमी का आॅपरेषन करके उसे बंदर का दिल लगा दिया गया। कुछ सप्ताह बाद डाॅक्टर ने फोन करके उसकी बीवी से मरीज के बारे में पूछा- कोई परेषानी तो नहीं है? बीवी ने खुष होकर बोली- जी नहीं, वह दिन भर छत पर बैठे पीठ खुजलाते रहते हैं।
राजनैतिक हथियार बन गया है आरक्षण
देश तथा जनता के काम आने वाली नीति 'राजनीति' कहलाती हैै। जब उसका उपयोग व्यक्ति, जाति अथवा दल विशेष के लिए होने लगता है तो वह अनीति बन जाती है। आरक्षण समस्या ऐसी ही जातिगत-दलगत रानीति का दुष्परिणाम है।
संविधान में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों के लिए लोकसभा व राज्य विधानसभाओं के लिए कुछ स्थान आरक्षित रखने की व्यवस्था की गई थी। साथ ही सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से कुछ पिछड़े नागरिकों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। यह व्यवस्था दस वर्षों के लिए की गई थी। संविधान में केन्द्र तथा राज्य की सरकारों का प्रति पांच वर्ष बाद नवीनीकरण (आम चुनाव) का भी प्रावधान रखा गया था। इस पंचवर्षीय सत्ता-नवीनीकरण के आधार पर ही देश के प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने पंचवर्षीय योजना की शुरुआत की थी। देश की स्वतंत्रता में राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का महत्वपूर्ण योगदान रहा था। वही एकमात्र सबसे बड़ा राजनैतिक दल था। एक-दो अंतरालों को छोड़कर तभी से देश में इसी दल का शासन रहा है, जोकि वर्तमान में भी है।
कांग्रेस ने आरक्षण व्यवस्था का उपयोग अपने ही दल की सत्ता कायम रखने के लिए करना प्रारंभ किया, उसे अनुसूचित जातियों ें तथा अनुसूचित जनजातियों के एकमुश्त वोट प्राप्त करने के लिए हथियार की तरह काम में लिया। कांग्रेस ने इन जातियों के कुछ प्रभावशाली मुखियाओं को अपने दल में शामिल कर उन्हें सत्ता में भागीदार बनाकर उन्हें अपनी जाति का घोषित क्षत्रप (नेता) बना दिया। आरक्षण व्यवस्था का लाभ इन्हीं क्षत्रपों की संतानों, करीबी रिश्तेदारों तथा उनके कृपा पात्रों को ही दिया जाने लगा। निरन्तर सत्तासीन होते रहने के लिए आरक्षण की समय-सीमा को भी उत्तरोत्तर आगामी दस वर्षों के लिए बढ़ाया जाता रहा है। इसकी सहायता से कांग्रेस लगातार सत्ता-सुख भोगती रही।
पण्डित जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद जब उनकी पुत्री इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं तो कांग्रेस पार्टी के भीतर असंतोष मुखर होने लगा। वंशवाद की राजनीति के विरोध में कई प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं ने कांग्रेस छोड़ दी तथा अपने गृह राज्यों में क्षेत्रीय दलों का गठन कर कांग्रेस से राज्यों की सत्ता छीननी प्रारंभ कर दी। इन क्षेत्रीय नेताओं ने भी आरक्षण व्यवथा का उपयोग अपने दल की सत्ता स्थापित करने में शुरू कर दिया। अपने-अपने राज्य की बहुसंख्यक जनता को आरक्षण व्यवस्था का लाभ दिया जाने लगा। सत्ता बंदरबांट मंे हर प्रदेश में नये-नये क्षत्रपों का उदय हुआ, जिसे जब भी अवसर मिला उसने अपने समर्थकों को आरक्षण व्यवस्था के दायरे में शामिल कर लिया, जिससे आरक्षण व्यवस्था में भी कई वर्ग तथा उपवर्ग बन गये।
राजस्थान मंे गुर्जर जाति द्वारा अपने वर्ग को अनुसूचित जनजाति वर्ग में शामिल करने की मांग को लेकर किया गया आन्दोलन राजस्थान की भाजपा सरकार की ऐसी ही अनीति का परिणाम था। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसंुधरा राजे ने गुर्जर जाति के एकमुश्त वोट पाने के लिए उनके कतिपय नेताओं से गुर्जर जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल करवाने का मौखिक वादा किया था। फलस्वरूप राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई। सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने गुर्जरों के साथ किये गये अपने वादे को भुला दिया। राजस्थान में पहली बार का गुर्जन आंदोलन सरकार की इसी अदूरदर्शिता का परिणाम था। इस आंदोलन ने पैंसठ से भी अधिक लोगों की जान ले ली, जिनमें ऐसे लोग भी शामिल थे, जिनका आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं था। कई पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी निभाते हुए मारे गए। अरबों रूपयों की सार्वजनिक संपत्ति आग के हवाले कर दी गई। सर्वाधिक नुकसान आम आदमी को उठाना पड़ा । रेल, सड़क मार्ग बन्द होने से सारा जनजीवन 20 से 25 दिनों तक थम गया। परीक्षा देने, इंटरव्यू देने, नौकरी ज्वाइन करने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य चैपट हो गया। अनेक लोगों को खाने की वस्तुएं तथा पीने के लिए पानी उपलब्ध नहीं हुआ। कइयों की जेबें खाली हो गईं। रास्ते में अटके मरीज चिकित्सा सुविधाओं के अभाव मंे तड़पते रहे। आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बन्द हो जाने से शहरी परिवारों का बजट भार बढ़ गया।
इन सबका जिम्मेदार कौन है? राज्य सरकार या गुर्जर समुदाय। इस सारे घटनाक्रम में गलती दोनों तरफ से ही हुई है। गुर्जर नेता चार साल तक चुप क्यांें बैठे रहे? यदि सरकार अपने स्तर पर वादा पूरा करने की स्थिति में नहीं थी तो उसे गुर्जर नेतओं को बुलाकर सरकार की कानूनी विवशताएं बतानी चाहिए थीं तथा उसका विकल्प ढंूढना चाहिए था। गुर्जर जाति के विकास के लिए जिस विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा सरकार ने की, उसे बहुत पहले ही विकल्प के रूम में किया जा सकता था। बहुत संभव था गुर्जर समाज उसे मान लेता। आम चुनावों से एक साल पूर्व किये इस आन्दोलन ने निष्क्रिय पड़े अन्य राजनैतिक दलों को भी एकाएक सक्रिय कर दिया। जिन्होंने बजाय इस समस्या को सुलझाने के उल्टे आग में घी डालना शुरू कर दिया।
इस पूरे विवाद में सर्वाधिक चूक उन गुर्जर नेताओं की रही है, जो मंत्री स्तर की सुविधा भोगते रहे हैं। ये नेता अपने समाज तथा नवयुवकों को यह समझाने में विफल रहे कि विकास की हर राह स्कूल से होकर गुजरती है। केवल आरक्षण वर्ग में शामिल होने मात्र से कोई जाति उन्नति नहीं कर सकती। वर्तमान शिक्षा सेटअप में विकास का प्रवेश द्वार 12 वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ही खुलता है तथा आरक्षण का जिन्न तभी मदद के लिए प्रकट होता है। आरक्षण वर्ग में शामिल अन्य जातियों ने इस पर अमल करके ही उन्नति की है, भले ही उनका वर्ग कैसा भी रहा हो। हजारों सवर्ण नवयुवक इस तथ्य की अनदेखी करने के कारण ही आरक्षित जातियों से पिछड़ें हुए हैं। ”मां सरस्वती की कृपा के बिना लक्ष्मी की प्राप्ति संभव नहीं है।“ यह सभी जातियों को समझना पड़ेगा।
बाद में वसुंधरा सरकार का पतन हो गया। कांग्रेस सत्ता में आई, पर न्यायालय के कारण वह भी गुर्जरों की मांग की पूर्ति नहीं कर पाई। नतीजे में गुर्जर फिर आंदोलन पर उतारू हो गए। उन्होंने रेल और सड़क मार्ग अवरूद्ध कर दिया। तोड़फोड़ तो हुई पर कोई जनहानि नहीं हुई। फिलहाल यह आंदोलन थम गया है। आग पूरी तरह बुझी नहीं है। केवल भभकना शांत हुआ है। जो लावा अन्दर ही अन्दर इकट्ठा हो रहा है, वह कब, किस रूप में फूट पडे़ तथा इसकी चपेट में अन्य राज्य भी आ जायें, इसकी कोई गारंटी नहीं।
आरक्षण देशव्यापी समस्या है। इसका स्थायी समाधान केन्द्र तथा राज्य सरकारों को मिलकर ढूंढना होगा। इसके लिए केन्द्र सरकार को सब दलों, जातियों तथा धर्म आचार्योंं, समाज शास्त्रियों, शि़क्षकों का वृहत सम्मेलन बुलाकर इस समस्या पर गंभीर विचार-विमर्श करना होगा। आरक्षण समस्या शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी है। इसका हल भी शिक्षा जगत से ही ढंूढना होगा। इसके लिए केन्द्रीय सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय को देश के सारे विश्वविद्यालय तथा उनसे जुड़े कालेजों (महाविद्यालयों) तथा अन्य सभी निजी काॅलेजों के विद्याािर्थयों से एक विस्तृत प्रश्नावली के रूप में उनकी राय मांगनी चाहिए।
उपर्युक्त सभी तरीकों से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर इस समस्या का सदा के लिए समाधान संभव है, तभी देश को ऐसे आन्दोलनों से मुक्ति मिल पायेगी।
कैंसर की रोक, मशरूम भोजन
अब मशरूम का उपयोग कैंसर जैसी असाध्य बीमारी की रोकथाम में भी किया जा सकेगा। आईसीएआर के वैज्ञानिकों ने मशरूम की ऐसी किस्म की खोज की है जो सामान्य मशरूम के मुकाबले ज्यादा औषधीय गुणों से युक्त है और इसके सेवन से कैंसर जैसी घातक बीमारियांे पर आसानी से लगाम लगाई जा सकेगी। औषधीय महत्व की इस मशरूम प्रजाति को मंकी हेड का नाम दिया गया है।
आईसीएआर के खुम्ब अनुसंधान निदेशालय, सोलन के निर्देशक डाॅ. मनजीत ंिसंह ने बताया कि औषधीय गुणों से भरपूर मंकी हेड मशरूम की प्रजाति लगभग लुप्त हो चुकी थी। वैज्ञानिकों ने अथक प्रयासों से न सिर्फ इस प्रजाति को खोज निकाला बल्कि इसे विकसित करने में भी सफलता प्राप्त कर ली है। हिमाचल प्रदेश मंे सर्वेक्षण के दौरान मशरूम फुट बाॅडी से टिश्यू कल्चर के जरिए इस नई प्रजाति का विकास किया गया है। शोध और अनुसंधान से यह तथ्य सामने आया है कि इस मशरूम के सेवन से अनेक प्रकार के कैंसर की रोकथाम संभव है। फिलहाल इस प्रजाति को बड़े स्तर पर विकसित किया जा रहा है ताकि इसका व्यवसायीकरण किया जा सके। अभी भारत सहित दुनियाभर में लकड़ी के बुरादे, गन्नें की खोई, कपास बीज के छिलके या धान के तने आदि की खाद का इस्तेमाल कर मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने गुलाबी रंग के सीप ओएस्टर नाम की एक अन्य प्रजाति की मशरूम का भी विकास किया है। इसे टनल पास्चरीकृत तकनीक से तैयार किया गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक मशरूम का ज्यादातर इस्तेमाल सब्जी के रूप में किया जा रहा है। इसमें विटामिन बी.12, फोलिक एसिड और विटामिन डी जैसे पोषक तत्वों के अलावा रेशेदार तत्व और पोटेशियम भी मौजूद हैं। कम कैलोरी वाली यह सब्जी चिकनाई युक्त है।
खतरनाक छिपकली है कोमडो ड्रैगन
छिपकली का नाम सुनते ही हम किसी दीवार पर लाइट के आसपास उसके होने की उम्मीद करते हैं पर, यहां हम ऐसी छिपकली के बारे में बताने जा रहे हैं जो न सिर्फ जमीन पर दौड़ते हुए हिरण अथवा सूअर जितने बड़े जानवर को आसानी से अपना शिकार बनाने माहिर है बल्कि पेड़ोें पर चढ़कर पक्षियों को भी चट कर जाती है। जी हां, इंडोनेशिया के पूर्वी द्वीपों कोमोडो, रिंका और पडार में पाई जाने वाली कोमोडो डैªगन एक ऐसी ही छिपकली हैै। इसका वजन 70 से 95 किलोग्राम तक होता है। प्रतिघंटा 15 किलोमीटर तक दौड़ने के अलावा यह पानी में तैरना भी जानती है। मादा कोमोडो डैªगन एक बार में तीस तक अंडे देती है जिनसे बच्चे निकलने में आठ महीने का समय लगता है, पैदा होते समय इसके बच्चों की लंबाई 50 सेमी. तक होती है, जबकि वयस्क होने तक इसकी लंबाई 2 से 3 मीटर तक हो जाती है, यह छिपकली की सबसे विशाल प्रजाति है।
कोमोडो डैªगन स्वयं तो निराली है ही साथ ही इसके शिकार का अंदाज भी अनोखा है, सामान्यतः जानवर अपने पैरों से अथवा मुंह से शिकार को पकड़ते हैं पर कोमोडो डैªगन अपना शिकार पूंछ से करती है। यह अकेले ही अपने भोजन पर हाथ साफ करना पसंद करती है। इसके भोजन की मात्रा भी गजब की है, अपने वजन के बराबर भोजन को यह आसानी से पचा सकती है यानि लगभग 100 किलो तक भोजन इसकी डाईट में शामिल है। यह भैंस अथवा इंसान तक को खा सकती हैै। भोजन में यह सड़ा हुआ मांस, पक्षी, पक्षियों के अंडे या किसी निरीह कमजोर जानवर को खाने का मौका नहीं चूकती, ये इसके पसंदीदा भोजन हैं। भोजन को सूंघने की क्षमता भी इतनी कि आठ किलोमीटर दूरी पर यदि सड़ा मांस पड़ा हो तो इसे पता चल जाता है। इसके तीखे दांत और मजबूत जबड़े भोजन को आसानी से चबाने की क्षमता रखते हैं। इसका मुंह इतने विशैले बैक्टेरियाओं से भरा होता है कि यदि कोई जानवर इसके हमला करने के बाद छूट कर भाग भी निकले तो 24 घंटे के अंदर ब्लड इन्फेक्शन से उसकी मौत हो सकती है। यह 300 मीटर की दूरी तक देख सकने की क्षमता रखती है।
सामने आने पर इंसान की रूह को कंपाने की क्षमता रखती है कोमोडो डैªगन। इसका साईंटिफिक नाम वारनस कोमोडोएनसिस है, इसे ओरा के नाम से भी जाना जाता है। यह एक तरह की गोह है। वर्तमान में इनकी संख्या बहुत ही कम लगभग 4000 तक ही रह गई है।
मकर संक्रांति पर्व को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है
मकर संक्रांति पर्व को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्य उत्तर की अ¨र बढ़ने लगता है जो ठंड के घटने का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं जो मकर राषि के शासक थे। पिता अ©र पुत्र आम तौर पर अच्छी तरह नहीं मिल पाते इसलिए भगवान सूर्य महीने के इस दिन को अपने पुत्र से मिलने का एक मौका बनाते हैं। जाड़े के मौसम के समापन अ©र फसलों की कटाई की शुरुआत का प्रतीक समझे जाने वाले मकर संक्रांति पर्व को देष भर में धूमधाम से मनाया जाता है और इस अवसर पर लाखों लोग देष भर में पवित्र नदियों में स्नान कर पूजा अर्चना करते हैं। देष के विभिन्न भागों में तो लोग इस दिन कड़ाके की ठंड के बावजूद रात के अंधेरे में ही नदियों में स्नानश्षुरू कर देते हैं। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु इलाहाबाद के त्रिवेणी संगम, वाराणसी में गंगाघाट, हरिय्ााणा में कुरुक्षेत्र, राजस्थान में पुष्कर और महाराष्ट्र के नासिक में ग¨दावरी नदी में स्नान करते हैं।
मकर संक्रांति पर्व देष के विभिन्न भागों में अलग अलग नामों से भी मनाया जाता है। जहां उत्तर और मध्य भारत में इसे मकर संक्रांति कहते हैं वहीं आंध्र प्रदेष, कर्नाटक और केरल में इस पर्व को सिर्फ संक्रांति कहते हैं तो तमिलनाडु में इस पर्व को पोंगल कहा जाता है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना पुण्यकारी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खिचड़ी का दान देना विषेष रूप से फलदायी होता है। देष के विभिन्न मंदिरों को इस दिन विषेष रूप से सजाया जाता है और इसी दिन से शुभ कार्यों पर लगा प्रतिबंध भी खत्म हो जाता है।
इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनकर मंदिरों में जाते हैं और पूजा अर्चना करते हैं। इस पर्व पर इलाहाबाद में लगने वाला माघ मेला और कोलकाता में गंगासागर के तट पर लगने वाला मेला काफी प्रसिद्ध है। अयोध्या में भी इस पर्व की खूब धूम रहती है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र सरयू में डुबकी लगाकर रामलला, हनुमानगढ़ी में हनुमानलला तथा कनक भवन में मां जानकी की पूजा अर्चना करते हैं। हरिद्वार में भी इस दौरान मेला लगता है जिसमें श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रय्ााग एवं गंगासागर में स्नान क¨ महास्नान की संज्ञा दी गई है।
इस पर्व की छटा देष के विभिन्न हिस्सों में अलग अलग रूप में देखने को मिलती है। जहां समूचे उत्तर प्रदेष में इस पर्व क¨ खिचड़ी के नाम से जाना जाता है तथा इस दिन खिचड़ी सेवन एवं खिचड़ी दान का अत्य्ाधिक महत्व ह¨ता है वहीं महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिलाएं अपनी पहली संक्रांति पर कपास, तेल, नमक आदि वस्तुएं अन्य्ा सुहागिन महिलाअ¨ं क¨ दान करती हैं। तमिलनाडु में इस त्य्ा¨हार क¨ प¨ंगल के रूप में चार दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन कूड़ा करकट जलाय्ाा जाता है, दूसरे दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है अ©र तीसरे दिन पषु धन की पूजा की जाती है। प¨ंगल मनाने के लिए स्नान करके खुले आंगन में मिट्टी के बर्तन में खीर बनाई जाती है, जिसे प¨ंगल कहते हैं। इसके बाद सूयर््ा देव क¨ नैवैद्य चढ़ाकर खीर क¨ प्रसाद के रूप में सभी ग्रहण करते हैं। असम में मकर संक्रांति क¨ माघ-बिहू अथवा भ¨गाली-बिहू के नाम से मनाया जाता है तो राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएं अपनी सास क¨ वाय्ाना देकर आषीर्वाद प्राप्त करती हैं। मान्यता है कि महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्य्ाागने के लिए मकर संक्रांति का ही चय्ान किय्ाा था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से ह¨कर सागर में जा मिली थीं।
गुरुवार, 26 सितंबर 2019
चार हज़ार दो, बिना टेस्ट के बनवाओ लाइसेंस
लर्निंग डीएल के लिए नोएडा परिवहन कार्यालय के दलाल ४ हजार रुपये यह कहकर मांगते है कि पैसा दो और लाइसेंस लो, न कोई टेस्ट देना होगा, और जिस दिन का चाहो उस दिन लाइसेंस लो। किसी लाइन में नहीं लगना पड़ेगा, वरना कई दिन लग जाएंगे डीएल बनवाने में। खुद नोएडा दर्पण के पत्रकार ने इसका अनुभव लिया।
दरअसल सेक्टर-33ए एआरटीओ, परिवहन कार्यालय दलालों का अड्डा बना हुआ है। यहां बिना दलाली के कोई काम करवाने में कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। विभाग में आम आदमी को घंटों लाइन में लगना पड़ता है। दलाल के माध्यम से आए आवेदक का काम तुरंत हो जाता है। दलालों ने कार्यालय को पूरी तरह से अपने चंगुल में फंसा रखा है। डीएल बनवाने के लिए दस्तावेज कम हों या लाइन में नहीं लगना हो। 3500 से लेकर 7 हजार रुपये तक में सब हो जाएगा। इस अवैध वसूली का पैसा वहां के दलाल एआरटीओ कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों को भी देने की बात करते हैं।
मॉल में कई दुकानों पर जुर्माना
जीआईपी मॉल के सागर रत्ना रेस्टोरेंट, बरिस्ता व नजीर फूड पर 25-25 हजार, वॉव मोमोज पर 10 हजार व चाय चाट एक्सप्रेस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं जीआईपी मॉल के जो विक्रेता प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहे थे उन पर 1.20 लाख का जुर्माना लगाया गया है। डीएलएफ मॉल में डोमिनॉज पिज्जा पर 25 हजार, बर्गर किंग पर 25 हजार, टिक्का टाउन पर 25 हजार, नजीर फूड पर 25 हजार, तंदूरी विलेज पर 5 हजार का जुर्माना लगा है। यहां के कुछ अन्य दुकानदारों पर 1.5 लाख का जुर्माना लगा है। दोनों जगह प्रतिबंधित प्लास्टिक के सामान भी जब्त किए गए। इसके अलावा सेक्टर-62 में 500 रुपये से लेकर 75 हजार रुपये तक कई दुकानदारों पर जुर्माना लगा है।
पांच फर्जी जमानती गिरफ्तार
गौतमबुद्धनगर जिला अदालत में फर्जी दस्तावेज के आधार पर जमानत दिलाने पहुंचे मोदीनगर निवासी पांच आरोपियों को सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों को परिसर में घुसने से पहले ही अदालत के मुख्य द्वार से दबोच लिया गया। आरोपियों के पास से पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड, बेल बांड व अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। कथित अधिवक्ता ने आरोपियों को दो-दो हजार रुपये में बुलाया था और उसने ही फर्जी आधार कार्ड आदि की व्यवस्था की थी। ऐसे में कथित अधिवक्ता को भी पुलिस ने नामजद किया है।
एसपी देहात कुमार रणविजय सिंह के अनुसार, सूरजपुर कोतवाली पुलिस मंगलवार को अदालत परिसर के मुख्य गेट पर सुबह साढ़े नौ बजे चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस ने पांच संदिग्धों को पकड़कर उनकी तलाशी ली। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी आधार कार्ड आदि दस्तावेज बरामद किए और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान मोदीनगर के फजलगढ़ निवासी मनोज, दयापुरी गली नंबर-3 निवासी अशोक व मीनू, कृष्णा कुंज निवाड़ी रोड निवासी अश्वनी गुप्ता और फफराना रोड निवासी कुलदीप के रूप में हुई।
अब कहीं से भी बन सकेगा डीएल
लोगों का अपने मूल जिले से डीएल बना होता है। वाहन भी वहीं से रजिस्टर्ड रहते हैं। लेकिन किसी और जिले में बेचने या खरीदने में लोगों को परेशानी आती है। परिवहन विभाग के कार्यालय जाना पड़ता है। मगर अब मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव के बाद कोई भी व्यक्ति मूल जिले के दस्तावेज के आधार पर किसी भी जिले में डीएल बनवा सकता है। साथ ही वाहन की खरीद-फरोख्त कर सकता है।
नई व्यवस्था के तहत डीएल का नवीनीकरण या नया बनवाने के लिए अपने जिले के ही दस्तावेज के साथ आवेदन कर सकते हैं। डीएल बनने के बाद नए पते पर आ जाएगा लेकिन उस पर परमानेंट पता उनके जिले का ही रहेगा। इस व्यवस्था से लोगों की दिक्कत दूर हो जाएगी। क्योंकि बहुत से लोग इन कार्यों के लिए ही पता बदलवाते हैं।
मोटर वाहन अधिनियम में बदलाव के बाद डीएल और आरसी से संबंधित कार्य यूपी के किसी भी जिले में कहीं से भी कराए जा सकेंगे। बस पता पुराना रहेगा और जिस जिले में रह रहे हैं पत्राचार के माध्यम से वहीं पर पहुंच जाएंगे। अक्तूबर से शुरू करने की तैयारी थी लेकिन अब दिसंबर तक ऐसा हो पाएगा।
शाहबेरी में प्राधिकरण ने अवैध इमारत तोड़ने का नोटिस दिया
उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास अधिनियम की धारा दस के तहत भेजे गए नोटिस में बिल्डरों को एक सप्ताह में अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। अगर बिल्डरों ने अवैध निर्माण को ध्वस्त नहीं किया तो प्राधिकरण खुद यह कार्रवाई करेगा और इसका खर्च बिल्डर से वसूल करेगा। नोटिस में प्राधिकरण ने कहा है कि शाहबेरी औद्योगिक अधिनियम के तहत अधिसूचित क्षेत्र है। प्राधिकरण की बगैर अनुमति किसी तरह का निर्माण अवैध है। क्षेत्र में अवैध निर्माण किया जा रहा है। जिससे इस क्षेत्र का समुचित नियोजन व जनता के हितों पर प्रतिकूल असर होगा।
नोटिस के सात दिन में अवैध निर्माण को ध्वस्त कर जमीन को मूल स्वरूप में लाने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि समय सीमा में अवैध निर्माण ध्वस्त न करने पर प्राधिकरण खुद से हटा देगा और इस पर अपने वाले खर्च निर्माण करने वाले व्यक्ति से वसूल किया जाएगा। प्राधिकरण का नोटिस मिलने के बाद से बिल्डरों में खलबली है। उन्होंने नोटिस के बारे में अभी तक फ्लैट खरीदारों को जानकारी नहीं दी है। हालांकि फ्लैट खरीदारों को नोटिस की भनक लग चुकी है। इससे उनकी रातों की नींद उड़ गई हैं।
दिल्ली के नए कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर सोनिया से मिले संदीप दीक्षित
नई दिल्ली। नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा को लेकर पूर्व सांसद संदीप दीक्षित एवं पूर्व सांसद व प्रदेश अध्यक्ष जेपी अग्रवाल के बेटे मुदित अग्रवाल ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। हाल ही के दिनों में संदीप की यह सोनिया से दूसरी मुलाकात थी। इसमें दोनों ने ही दिल्ली इकाई के लिए सुझाव दिए। दोनों ही नेताओं ने सोनिया गांधी से अलग-अलग मुलाकात की। सूत्र बताते हैं कि संदीप और मुदित ने सोनिया के साथ प्रदेश के नए अध्यक्ष को लेकर भी चर्चा की। इनका यही कहना था कि जिस भी किसी नेता को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी जाए, वह ऐसा हो जिसके साथ सभी चल सकें।
गुरुवार, 5 सितंबर 2019
LoC पर पाक सैनिकों का जमघट
नई दिल्ली। पाकिस्तान ने लाइन ऑफ कंट्रोल पर एक और ब्रिगेड की तैनाती की है। इसके साथ ही भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया है। गुलाम कश्मीर के पुंछ इलाके के समीप कोटली सेक्टर में पाकिस्तानी फौज की एक और टुकड़ी की तैनाती से सीमा पर हलचल उत्पन्न हो गई है। इस ब्रिगेड में करीब दो हजार से अधिक सैनिक हैं। उधर, पाकिस्तानी सेना की इस हलचल से भारतीय सेना अलर्ट हो गई है। वह एलओसी पर हो रही हलचल पर पूरी नजर बनाए हुए है। बता दें कि हाल के दिनों में लश्कर और जैश के आतंकी पाकिस्तान की फॉरवर्ड पोस्ट की ओर से आकर भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश में लगे हैं। भारतीय सेना की मुस्तैदी से पाकिस्तान अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सका है।
विवेक जौहरी बी एस एफ के महानिदेशक बने
नई दिल्ली, १९८४ बैच के मध्य प्रदेश काडर के इंडियन पुलिस सर्विस के अधिकारी श्री विवेक जौहरी को सीमा सुरक्षा बल का महा निदेशक नियुक्त किया है।
बुधवार, 4 सितंबर 2019
सैलजा को हरियाणा कांग्रेस की कमान, हुड्डा बने चुनाव कमेटी के प्रधान
सभी को संतुष्ट करने की कोशिश
नई दिल्ली। हरियाणा कांग्रेस में हूडा के बाग़ी तेवरों को देखते हुए बड़े बदलाव के किए गए हैा। हरियाणा राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक तंवर की जगह कुमारी सैलजा को हरियाणा कांग्रेस की कमान दी गई है। इसके साथ ही पार्टी आलाकमान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को हरियाणा विधानसभा चुनाव में चुनाव अभियान कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है।
इसकी घोषणा कांग्रेस प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने की। आजाद के अनुसार कुमारी सैलजा हरियाणा कांग्रेस की नई अध्यक्ष होंगी और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा चुनाव कमेटी के प्रधान और कांग्रेस विधायक दल के नेता होेंगे। इसके साथ ही हुडडा हरियाणा विधानसभा में नेता विपक्ष भी होंगे। कांग्रेस पार्टी के इस कदम से प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर को तगड़ा झटका लगा है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा इसके लिए आलाकमान पर काफी समय से दबाव बना रहे थे। उन्होंने इसके लिए बागी तेवर भी दिखाए थे। इसके साथ ही यह भी उम्मीद की जा रहा है कि पार्टी में कुछ कार्यकारी अध्यक्ष भी हो सकते हैं। पार्टी के हारे हुए वरिष्ठ नेता कुलदीप बिश्नोई, अजय सिंह यादव, रणदीप सुरजेवाला को भी अहम जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है।
बता दें कि कुमारी सैलजा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व की करीबी मानी जाती हैं। पार्टी ने राजस्थान में विधानसभा चुनाव के दौरान उनको वहां की अहम जिम्मेदारी दी थी। हरियाणा कांग्रेस में अशोक तंवर और हुड्डा खेमे में अरसे से घमासान मचा हुआ है। इसे समाप्त कराने के लिए पार्टी नेतृत्व द्वारा किए गए सभी प्रयास विफल रहे। हुड्डा चाहते थे कि तंवर को हटाकर उनको हरियाणा कांग्रेस की कमान दे दी जाए। कांग्रेस आलाकमान ने हूडा की मांग नहीं मानी तो उन्होंने बागी तेवर भी दिखाए और 18 अगस्त को राेहतक में महा परिवर्तन रैली की कांग्रेस से अलग राह अपनाने के भी संकेत दिए थे फिर भी उन्हें अध्यक्ष नहीं बनाया।
हुड्डा का जेल जाना तय: मनोहर लाल
रोहतक। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को उनके ही गढ़ में आकर चुनौती दी। सीएम ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि हुड्डा ने इतने पाप किए हैं कि अब उनको जेल जाना ही पड़ेगा। साथ ही, और कहा कि इनेलो पूर्व सीएम पहले से जेल में बंद हैं।
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि सत्ता में रहते हुए कांग्रेस और इनेलो ने जमकर लूट मचाई है। इस लूट-खसोट का सबसे ज्यादा असर प्रदेश के गरीब परिवारों पर पड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने हर आदमी व समाज के हर वर्ग के लोगों की चिंता की है। महिलाओं को दी गई सुविधा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हर घर में गैस कनेक्शन दिया गया है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला थाने बनाए गए हैं। हर 20 किलोमीटर के दायरे में महिला कालेज खोले गए हैं। भाजपा की सरकार ने किसानों को सर्वाधिक मुआवजा दिया है और फसल का एक-एक दाना खरीदा गया है। जन आशीर्वाद यात्रा में मुख्यमंत्री के साथ सहकारिता मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर के अलावा करनाल के सांसद संजय भाटिया, कुरुक्षेत्र के सांसद नायब सिंह सैनी, हिसार के सांसद बृजेंद्र सिंह, राज्य सभा सदस्य डीपी वत्स, जिला परिषद चेयरमैन बलराज कुंडू, शमशेर खरकड़ा व सौरभ फरमाना भी मौजूद थे।
मंगलवार, 3 सितंबर 2019
वायु सेना में शामिल हुए 8 अपाचे
भारत सरकार ने अपनी वायु सेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए इसमें नए विमान शामिल कर लिए हैं. भारत ने अमेरिका से खरीदा हुआ विमान अपाचे एएच-64ई मंगलवार को वायुसेना में शामिल कर लिया है. इसके साथ ही वायुसेना में 8 अपाचे हेलीकाप्टर के शामिल होने से इसकी शक्ति और भी बढ़ जाएगी
सोमवार, 2 सितंबर 2019
समाज के उत्थान के लिए बड़े और सख्त निर्णय लेने होंगे: रामसकल गुर्जर
ग्रेटर नोएडा, सम्राट मिहिर भोज की जयंती पर सम्राट मिहिर भोज पार्क में रविवार को आयोजित अंतरराष्ट्रीय गुर्जर दिवस पर दिल्ली एनसीआर समेत विभिन्न राज्यों से गुर्जर समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में कलाकारों ने लोकगीत के माध्यम से गुर्जरों के बलिदान की गाथा व इतिहास का बखान किया। इसे सुनकर समाज के लोग गदगद हो उठे।
लोगों को संबोधित करते हुए प्रदेश के पूर्व मंत्री रामसकल गुर्जर ने कहा कि समाज के उत्थान के लिए बड़े और सख्त निर्णय लेने होंगे। समाज में फैली कुरीतियों को दूर करना होगा। समाज के विकास पर बल देते हुए कहा कि सभी को संगठित होकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने सम्राट मिहिर भोज की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कि वे केवल गुर्जर समुदाय के ही नहीं बल्कि सभी वर्गों के आराध्य थे। वक्ताओं ने कहा कि समाज को शान शौकत के नाम पर दिखावे से बचने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने की जरूरत है।। गुर्जरों को दहेज लेने देने की सोच में बदलाव लाना होगा।
कार्यक्रम को पूर्व विधायक समीर भाटी, अतुल प्रधान, वीरेंद्र डाढ़ा, राजकुमार भाटी, फकीर चंद नागर आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सतीश नंबरदार व संचालन जिलाध्यक्ष श्यामसिंह भाटी ने किया। विभिन्न क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया। जज बनी रुचि भाटी, यूपी पुलिस कबड्डी टीम की कप्तान सोनीका नागर, ऑस्कर अवार्ड विजेता सुमन गुर्जर व स्नेह लता गुर्जर, अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही सागर कसाना, पायलट पंकज चंदेला, अंतरराष्ट्रीय शूटर पूजा व सिंह राज गुर्जर आदि को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में रागनी गायकों ने क्षेत्रीय लोकगीत गाकर सम्राट मिहिर भोज की जीवनी पर प्रकाश डाला। ग्रेटर नोएडा स्थित गुर्जर सम्राट मिहिर भोज पार्क में मूर्ति स्थापित कराने की मांग की गई। कार्यक्रम में ओमपाल सिंह, अजीत दौला, पूर्व बार अध्यक्ष रामशरण नागर, नेपाल सिंह, दिनेश गुर्जर, सतपाल नागर, रविद्र भाटी, मटरू नागर, महेश कसाना, तेजा गुर्जर, सतेंद्र गुर्जर, डा. अजय भाटी, विकस, इंदर नागर, कर्मवीर गुर्जर, वनीश प्रधान, महेश भाटी, जतन भाटी, सुंदर टाइगर आदि लोग मौजूद रहे।
उत्तर प्रदेश मे एक बार फिर खुलासा करने वाले पत्रकार पर मुकदमा दर्ज
पुलिस ने ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राजकुमार पाल, पवन जायसवाल और एक अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। थानाध्यक्ष राजेश चौबे ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी की तहरीर पर दो नामजद और एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इस बाबत सीडीओ और प्रभारी बीएसए प्रियंका निरंजन ने बताया कि यह कार्रवाई फोन के विवरणों व अन्य अभिलेखों की पड़ताल के बाद की गई है। प्रधान प्रतिनिधि ने जानबूझ कर सब्जी नहीं मंगवाई और मीडिया को बुलाकर वीडियो बनवा लिया। शासन के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
मंगलवार, 27 अगस्त 2019
टेम्पो पलटा, 17 की मौत
लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे पर बड़ा हादसा हो गया। अनियंत्रित हुए ट्रक ने टेंपो को पीछे से टक्कर मार दी। उसके बाद पास से गुजर रही पिकअप पर पलट गया। हादसे में 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच घायल हो गये। इसमें एक महिला की उपचार के दौरान मौत हो गई। मरने वालों में तीन बच्चे व एक महिला भी शामिल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर शोक व्यक्त किया है। साथ ही डीएम को मृतकों के परिजनों को तत्काल राहत धनराशि और घायलों को समुचित इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
हरियाणा में बदल सकते है सियासी समीकरण
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए हरियाणा कांग्रेस की कमान हुड्डा के हाथों में न सौंपे जाने से खफा पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा नई पार्टी बनाने के ऐलान के बाद से ही कांग्रेस के खेमे में बेचैनी है। पहले से ही कमजोर कांग्रेस हुड्डा द्वारा नई पार्टी बनाने के ऐलान से सकते में है, अगर ऐसा हुआ तो प्रदेश में कांग्रेस का कोई नाम लेने वाला भी नहीं बचेगा। संसदीय चुनावो में करारी हार के बाद कांग्रेसी नेतृत्व परेशान है कि अगर प्रदेश की कमान हुडा के हाथो में चली गई अन्य जाट कांग्रेसी नेताओ की राजनीती ख़तम हो जाएगी और अगर नहीं दी तो प्रदेश हाथ से निकल जायेगा। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए हरियाणा कांग्रेस की कमान हुड्डा के हाथों में न सौंपे जाने से खफा पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा नई पार्टी बनाने के ऐलान के बाद से ही कांग्रेस के खेमे में बेचैनी है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कांग्रेस में बने रहने पर भाजपा की मुख्य लड़ाई कांग्रेस के साथ ही रहेगी। जबकि, हुड्डा के अलग पार्टी बनाने पर विपक्ष कमजोर हो जाएगा, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा। वैसे भी पहले से हरियाणा के अन्य दलों में फूट पड़ी हुई है। ऐसे में हुड्डा की वापसी राज्य की सियासत का समीकरण बदल देगी।
अगर कमेटी कहेगी तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे: हुड्डा
हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक उठापठक शुरू हो गई है। एक ओर जहां मौजूदा सत्ताधारी दल ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को चुनाव के लिए अपना लीडर घोषित कर दिया है, वहीं जेजेपी और बसपा ने गठजोड़ कर सियासी खेमों को चिंता में डाल दिया है। वही भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कांग्रेस से बगावत के मूड में आने से हरियाणा की राजनीति में हलचल मच गई है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने खास नेताओं की एक 25 सदस्यीय कमेटी गठित करने का संकेत दिया है। यही कमेटी तय करेगी कि हुड्डा का राजनीतिक भविष्य क्या होगा। हुड्डा ने कहा है कि अगर कमेटी कहेगी तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे। ऐसे में जानकार इस कमेटी को हरियाणा की राजनीति का बड़ा खिलाड़ी मानकर चल रहे हैं। हुड्डा के इस बयान के बाद से जानकार इस कमेटी को हरियाणा की राजनीति का मुख्य खिलाड़ी मान रहे हैं। हालांकि, कमेटी में कौन से नेता शामिल होंगे, इस बारे में हुड्डा ने किसी तरह का खुलासा नहीं किया है। माना जा रहा है कि हुड्डा के समर्थन में उनकी रैली में पहुंचे विधायकों और पूर्व दिग्गुज नेताओं को कमेटी में शामिल किया जाएगा।
आरबीआई देगा सरकार को पौने दो लाख करोड़ रुपये
नई दिल्ली, आरबीआइ ने सोमवार शाम को एक बयान जारी कर कहा कि रिजर्व बैंक के बोर्ड ने सरकार को 1,76,051 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का निर्णय किया है। इसमें 1,23,414 करोड़ रुपये वित्त वर्ष 2018-19 के लिए सरप्लस के रूप में हैं जबकि 52,637 करोड़ रुपये संशोधित कैपिटल फ्रेमवर्क के तहत अतिरिक्त प्रावधान के हैं। बहरहाल, चालू वित्त वर्ष में आरबीआइ सरकार को कुल 1,23,414 करोड़ रुपये सरप्लस देगी जिसमें से 28,000 करोड़ रुपये पहले ही दिये जा चुके हैं। सरकार ने आरबीआइ के सरप्लस से कुछ राशि लेने के नजरिए से जालान समिति का गठन किया था। यही वजह है कि मोदी सरकार जब दुबारा सत्ता में आई तो पांच जुलाई को पेश किये गये वित्त वर्ष 2019-20 के पूर्ण आम बजट में उसने रिजर्व बैंक और सरकारी बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों से 1,06,041 करोड़ रुपये चालू वित्त वर्ष में मिलने की उम्मीद जतायी। हालांकि एक फरवरी को पेश किये गये वित्त वर्ष 2019-20 के अंतरिम बजट में उसने इस मद से 82,911 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद जतायी थी।
शुक्रवार, 23 अगस्त 2019
वीर सावरकर को नहीं मानने वालो को सार्वजनिक रूप से पीटा जाए: उद्धव ठाकरे
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपने बयानों को लेकर काफी चर्चित रहते हैं। इस बार उन्होंने वीर सावरकर को लेकर ऐसा बयान दिया है जिससे हंगामा खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि जो लोग वीर सावरकर को नहीं मानते उन्हें सार्वजनिक रूप से पीटना चाहिए क्योंकि उन्हें भारत की स्वतंत्रता में वीर सरवरकर के संघर्ष और महत्व के बारे में नहीं पता है। यहां तक कि राहुल गांधी ने भी अतीत में वीर सावरकर का अपमान किया है।
श्रीलंका से समुद्री रास्ते से लश्कर-ए-तैयबा के छह आतंकवाद घुसे
हाई अलर्ट पर तमिलनाडु
श्रीलंका से समुद्री रास्ते के जरिए राज्य में लश्कर-ए-तैयबा के छह आतंकवादी आए और कोयंबटूर समेत अन्य शहरों में गए। पुलिस ने बताया कि राज्य में हवाईअड्डों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड और पूजा स्थलों समेत कई जगहों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। कोयंबटूर के पुलिस आयुक्त ने कहा कि आतंकवादियों के वहां आने की सूचना मिलने के बाद शहर में हाई अलर्ट है। उन्होंने बताया कि किसी भी संभावित घुसपैठ को रोकने के लिए खासतौर पर तटीय जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि 10 त्वरित प्रतिक्रिया टीमों की तैनाती रणनीतिक स्थलों पर की गई है ताकि जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जा सके।
अलका लांबा को सदन से बाहर किया
नई दिल्ली, सत्ता पक्ष की बागी विधायक अलका लांबा ने सदन में जी बी पंत अस्पताल में मरीजों को दवाएं न मिलने का मुद्दा उठाया। सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार विज्ञापनों की सरकार है, अलका लांबा के आरोपों के बाद प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने इस मामले की जांच के आदेश दिए। लेकिन इसके बावजूद अलका लांबा शांत नहीं हुईं तो उन्हें मार्शल के जरिए सदन की कार्यवाही से बाहर कर दिया गया। उधर, जी बी पंत अस्पताल की चैयरपर्सन आप विधायक सरिता सिंह ने अलका लांबा को खरी खोटी सुनाई। सरिता ने कहा कि अलका लांबा सिर्फ राजनीति कर रही हैं।
Chandrayaan-2 ने भेजी चांद की यह पहली तस्वीर
Chandrayaan-2 से ली गई चांद की पहली तस्वीर इसरो (ISRO) ने जारी की है। चांद की सतह से करीब 2650 किलोमीटर दूरी से ये तस्वीर ली गई है। इससे पहले 21 अगस्त को Chandrayaan-2 ने चांद की दूसरी कक्षा में प्रवेश किया था।
भारत का चंद्रयान-2 कदम-दर-कदम मंजिल की ओर बढ़ रहा है। बुधवार को इसने एक और अहम पड़ाव पार किया। यान चांद की दूसरी कक्षा में पहुंच गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)ने कक्षा में बदलाव के बाद बताया कि चंद्रयान-2 के सभी उपकरण सही ढंग से काम कर रहे हैं।
डॉ. मनमोहन सिंह ने ली राज्यसभा सदस्यता की शपथ
नई दिल्ली । पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉक्टर मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को राज्यसभा के सदस्य के तौर पर शपथ ली। इस बार वे राजस्थान से निर्वाचित होकर आए हैं। डॉ. मनमोहन सिंह राजस्थान से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए हैं। इस शपथग्रहण के दौरान अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सहित कई कांग्रेस दिग्गज मौजूद थे। वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद भी शपथग्रहण कार्यक्रम में मौजूद रहे। मनमोहन सिंह को छठवीं बार राज्यसभा पहुंचे हैं। इस खास मौके पर उन्हें कई मंत्रियों ने शुभकामनाएं दी हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर उन्हें राजस्थान से संसद सदस्य चुने जाने और शपथ लेने पर शुभकामनाएं दी हैं।
सिंधिया बनेगे महाराष्ट्र स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष
नई दिल्ली। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रभारी व् महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधियां के नेतृत्व में कांग्रेस ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के मद्देनजर छह सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता पार्टी के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधियां करेंगे। गौर तलब है कि ज्योतिरादित्य सिंधियां नेतृत्व में कांग्रेस एक भी संसदीय सीट नहीं जीत पाई थी और खुद के सिंधियां अपना चुनाव भी बुरी तरह से हार गए थे, ऐसे में उनके नेतृत्व में स्क्रीनिंग कमेटी का गठन मज़ाक लगता है।
ज्योतिरादित्य सिंधियां पर प्रदेश में पैसे लेकर टिकट बाटने के भी आरोप लगाए गए थे। उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहने के दौरान उनका भारी विरोध भी हुआ था, और चुनावो में पार्टी एक भी सीट जीतने में पूरी तरह से नाकामयाब रही, ऐसे में उन्हें छह सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्षता सौंपना कांग्रेस की भारी भूल साबित हो सकता है। हालांकि पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी बयान के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस कमेटी के गठन को स्वीकृति प्रदान भी कर दी है। गौरतलब है कि कुछ महीने बाद महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होना है। पार्टी के ही कुछ कार्यकर्ताओ के अनुसार ज्योतिरादित्य सिंधियां अक्सर कार्यकर्ताओ से अनुचित व्यवहार करते है जैसे वे उनके निजी नौकर हो।
इस कमेटी में पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं महाराष्ट्र प्रभारी मल्लिकार्जुन खड़गे, राजस्थान सरकार के मंत्री हरीश चौधरी, महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बालासाहेब थोराट, विधायक दल के नेता केसी पडवी और सांसद मणिकम टैगोर भी शामिल हैं।
पाकिस्तान को एफएटीएफ ने किया ब्लैक लिस्ट
नई दिल्ली, एजेंसी। टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टाक्स फोर्स (FATF) ने उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया है। पाकिस्तान को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। एफएटीएफ की क्षेत्रीय इकाई एशिया पेसिफिक ग्रुप ने शुक्रवार को टेरर फंडिंग पर लगाम लगा पाने में नाकाम रहने पर पाकिस्तान को काली सूची में डाल दिया है। यहां बता देना जरूरी है कि इससे पहले पाकिस्तान एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल था। वह ठोस कार्रवाई करने के बजाए दिखावे के लिए आतंकवादियों और आतंकी समूहों के खिलाफ फर्जी और कमजोर एफआइआर दर्ज कर रहा था। इसे लेकर अमेरिका ने पाकिस्तान को प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की नसीहत दी थी। अमेरिका ने सख्त लहजे में था कि आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए ठोस और संतोषजनक कदम उठाने के बाद ही दुनिया के ज्यादातर देश फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी सूची से बाहर निकलने में पाकिस्तान का समर्थन कर सकते हैं।
मोदी को खलनायक की तरह पेश करना गलत: अभिषेक सिंघवी
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की जा रही है। दरअसल पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक समारोह में प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की थी और आज वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने भी उनके ही सुर में ट्वीट कर प्रधानमंत्री की तारीफ की है। गौर करने वाली बात यह है कि अभिषेक सिंघवी चिदंबरम का केस लड़ रहे हैं। अभिषेक सिंघवी ने कहा कि काम का मूल्यांकन व्यक्ति के तौर पर नहीं बल्कि मुद्दों को लेकर होना चाहिए। काम हमेशा अच्छा बुरा और मामूली होता है। एकतरफा विरोध से मोदी को ताकत मिलती है। अभिषेक सिंघवी ने ट्वीट कर कहा, 'मैंने हमेशा कहा है कि मोदी को खलनायक की तरह पेश करना गलत है।
ग्रेटर नोएडा में जापानी नागरिक को बेहोश कर लूटा
ग्रेटर नोएडा। नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात बदमाशों ने जापानी नागरिक योइची आइचीगो को लूट लिया। वह जापान से ग्रेटर नोएडा व्यापार के सिलसिले में आए थे। वे दिल्ली एयरपोर्ट से ग्रेटर नोएडा जा रहे थे। कोतवाली पुलिस ने शिकायत पर लूटपाट में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
5000 करोड़ की धोखाधड़ी, कंपनी का मालिक पवन मल्हन गिरफ्तार
नोएडा: हैदराबाद पुलिस ने सेक्टर-63 स्थित कंपनी ई-बिज के प्रबंध निदेशक पवन मल्हन और उसके बेटे रितिक मल्हन को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कंपनी को सीज करते हुए आरोपितों के खाते को फ्रीज कर दिया है। कंपनी पर देश भर के करीब 17 लाख छात्रों व बेरोजगार युवाओं से 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है।
नोएडा सेक्टर-63 में स्थित ई-बिज कंपनी को पवन मल्हन, उसके बेटे रितिक मल्हन समेत परिवार के कई सदस्य जुड़े हैं। हैदराबाद की साइबराबाद पुलिस ने मंगलवार को सेक्टर-63 स्थित ई-बिज कंपनी में छापेमारी कर पवन मल्हन और रितिक को गिरफ्तार किया। पुलिस को देखकर दोनों भागने का प्रयास किए, लेकिन सफल नहीं हो सके व् पकडे गए। पुलिस ने महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर कंपनी को सीज कर दिया है। कंपनी व पदाधिकारियों के बैंक खाते को भी फ्रीज कर दिया गया है। खाते में करीब 389 करोड़ रुपये मिले हैं।
पवन मल्हन कंपनी का एमडी है और उसकी पत्नी निदेशक है। कंपनी के खिलाफ हैदराबाद के वारंगल व अदिलाबाद में दो मामले दर्ज हैं। इसके अलावा कई अन्य शहरों में भी रिपोर्ट दर्ज है। आरोप है कि कंपनी मल्टी लेवल मार्केटिग स्कीम के जरिए युवाओं को दोगुना पैसा देने का लालच देकर फंसाती थी। उन्हें अन्य लोगों को सदस्य बनवाने पर 4 फीसद कमीशन दिया जाता था। कंपनी का कारोबार कई हैदराबाद, बेंगलूरू, चेन्नई, यूपी व दिल्ली समेत कई राज्यों में फैला हुआ है। कोतवाली फेस तीन के प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र सिंह ने बताया कि हैदराबाद पुलिस कंपनी पर छापेमारी करने आई थी।
गुरुवार, 22 अगस्त 2019
सोने की कीमतों ने तोड़ा रिकॉर्ड
नई दिल्ली। सोने की कीमतें एक नए स्तर पर पहुंचकर 39,000 के करीब आ गयी हैं। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में गुरुवार को सोने में 150 रुपये की तेजी आई है, जिससे सोने की कीमत 38,970 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। एसोसिएशन के अनुसार, कमजोर इक्विटी मार्केट के चलते सोना इन दिनों निवेशकों के लिए सबसे मुफीद बना हुआ है। वहीं, चांदी में भी आज 60 रुपये की तेजी आई है, जिससे चांदी की कीमत 45,100 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। एसोसिएशन के अनुसार, औद्योगिक इकाइयों और सिक्का कारोबारियों की लिवाली के चलते चांदी की कीमत में यह तेजी आई है। वैश्विक स्तर की बात करें, तो आज न्यूयॉर्क में सोना गिरावट के साथ 1,498.80 डॉलर प्रति औंस पर और चांदी 17.09 डॉ़लर प्रति औंस पर रही।
यमुना एक्सप्रेस वे: वाहनों की रफ्तार पर रहेगी निगाह
तेज रफ्तार पर अंकुश लगाने के लिए प्राधिकरण जीरो प्वाइंट व आगरा में टाइम बूथ स्थापित करने जा रहा है। दोनों स्थानों पर रंबल स्ट्रिप लगाने का काम शुरू हो गया है। इसके साथ ही दुर्घटना संभावित क्षेत्र की चेतावनी के बोर्ड भी लगाए जाएंगे। दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए यमुना प्राधिकरण के सीईओ डा. अरुणवीर सिंह ने निर्देश दिए थे। इसका काम भी शुरू हो गया। रंबल स्ट्रिप के ऊपर से वाहनों के गुजरते समय हल्के झटके महसूस होंगे। अगर चालक नींद में होगा तो वह जाग जाएगा। रंबल स्ट्रिप पर गुजरते समय झटकों का असर कम करने के लिए चालक वाहन की रफ्तार को कम करेगा। इसके साथ ही एक्सप्रेस वे के दोनों प्वाइंट पर दुर्घटना संभावित क्षेत्र के चेतावनी देते बोर्ड लगाए जाएंगे। ताकि वाहन चालक जागरूक हों।
मुस्लिम युवक पर दुष्कर्म का आरोप
लव जिहाद
संवाददाता, ग्रेटर नोएडा : बीटा दो कोतवाली क्षेत्र में मुस्लिम युवक पर युवती ने लव जिहाद का आरोप लगाया है। आरोप है कि आरोपित मुस्लिम युवक पहले से ही शादीशुदा था। उसने खुद को हिदू व फर्जी नाम बताकर पहले युवती से दोस्ती की। इसके बाद कई महीनों तक उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता की तहरीर पर बीटा दो कोतवाली में दुष्कर्म की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस आरोपित की तलाश कर रही है। आरोप है कि आरोपित युवक के तीन बच्चे है।
ग्रेटर नोएडा में एक सोसायटी में रहने वाले युवती ब्यूटी पार्लर में नौकरी करती थी। एक साल पहले उसकी मुलाकात एक युवक से हुई। आरोपित का अंसल गोल्फ लिक सोसायटी में स्टूडियो है। आरोपित ने अपना नाम नकुल शर्मा बताया था व् शार्ट फिल्म में अभिनय का झांसा देकर पीड़िता को अपने जाल में फंसाया। आरोपित के झांसे में आकर वह ब्यूटी पार्लर की नौकरी छोड़कर उसके ऑफिस में जाने लगी। कुछ दिन बाद आरोपित व पीड़िता के बीच करीबी बढ़ गई। आरोपित ने युवती से शादी करने के लिए कहा और बताया कि वह भी अविवाहित है। शादी का झांसा देकर आरोपित युवक ने युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाने शुरू कर दिए। दो महीने तक शारीरिक संबंध बनाने के बाद पीड़िता ने जब युवक पर शादी का दबाव बनाया तो वह टालमटोल करने लगा। इसी बीच पीड़िता को स्टूडियो में नौकरी करने वाले एक युवक ने बताया कि उसका पुरूष मित्र पहले से शादी शुदा है और उसके तीन बच्चे है। वह नकुल नहीं बल्कि वसीम है। सचाई जानने के लिए जेवर पहुंच गई। वहां उसको आरोपित युवक वसीम के तीन बच्चे व पत्नी मिली। आरोप है कि आरोपित युवक के परिजन ने भी युवती पर शादी करने का दबाव बनाया। किसी तरह पीड़िता वहां से वापस ग्रेटर नोएडा पहुंची और पुलिस से शिकायत की। पीड़िता की तहरीर के आधार पर धोखे में रखकर दुष्कर्म करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
विधुत बिल समय पर नहीं मिलते: तरुण भारद्वाज
नोएडा, फेडरेशन ऑफ़ नोएडा इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष तरुण भरद्वाज ने जिलाधिकारी व् मुख्य अभियंता, विधुत विभाग को पत्र लिखकर शिकायत की है कि नोएडा के तमाम ओद्योगिक सेक्टरों में विधुत बिल समय पर नहीं मिलने से खासी परेशानी हो रही है तथा यह परेशानी सबसे ज्यादा खंड -5 में है। उन्होंने बताया कि इस सम्बन्ध में पहले भी कई बार शिकायत की जा चुकी है लेकिन विभाग के अधिकारी कोई कार्यवाही नहीं करते।
कई मामलों आरोपी है चिदंबरम और उनका परिवार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी० चिदंबरम को दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईएनएक्स मीडिया मामले में गिरफ्तारी से राहत देने से इनकार कर दिया। वहीं उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम के खिलाफ एयरसेल मैक्सिस भ्रष्टाचार मामले और धन शोधन मामले में मुकदमा चल रहा है।
गौरतलब है आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई ने 2017 को प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 2007 में जब चिदंबरम वित्त मंत्री थे, तब 305 करोड़ रुपये की विदेशी धनराशि प्राप्त करने के लिए मीडिया समूह को दी गई विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड मंजूरी में अनियमितताएं बरती गई। प्रवर्तन निदेशालय ने इस संबंध में 2018 में धनशोधन का एक मामला दर्ज किया। दोनों को निचली अदालत ने गिरफ्तारी से 23 अगस्त तक अंतरिम राहत प्रदान की है।
एयरसेल मैक्सिस मामलों में पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम को पहली बार पिछले साल जुलाई में अंतरिम राहत मिली थी। इसके बाद समय-समय पर उनकी अंतरिम राहत की अवधि बढ़ाई जाती रही है। सीबीआई जांच कर रही है कि 2006 में वित्त मंत्री के पद पर रहते हुए चिदंबरम ने एक विदेशी कंपनी को एफआईपीबी मंजूरी कैसे दे दी, क्योंकि ऐसा करने का अधिकार केवल आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के पास ही होता है। धनशोधन के एक अलग मामले में एजेंसी चिदंबरम से पूछताछ कर चुकी है और उनकी अग्रिम जमानत याचिका लंबित है।
सारदा घोटाला:
चिदंबरम की पत्नी नलिनी के खिलाफ सीबीआई सारदा चिटफंड घोटाले में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। उन पर 1.4 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत लेने का आरोप है। इस साल फरवरी में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उन्हें मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी।
एयर इंडिया खरीद मामला:
ईडी ने चिदंबरम से एयर इंडिया से जुड़े एक खरीद मामले की जांच में सहयोग करने को कहा था।
जलनिगम भर्ती घोटाला: एसआईटी करेगी जांच
सपा सांसद आजम खां की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं। जल निगम में हुई भर्ती प्रक्रिया में धांधली की जांच में एसआईटी तेजी लाने जा रही है। मालूम हो कि सपा के शासनकाल में 2016 के अंत में हुई जल निगम में 1300 पदों पर वैकेंसी निकली थी। इसमें 122 सहायक अभियंता, 853 अवर अभियंता, 335 नैतिक लिपिक और 32 आशुलिपिक की भर्ती हुई थी। जल निगम विभाग के ही कुछ अधिकारियों ने इस संबंध में धांधली की शिकायत की थी जिसके बाद जांच शुरू हुई। सरकार इस मामले में 122 सहायक अभियंताओं को पहले ही बर्खास्त कर चुकी है।
इस मामले में पूर्व नगर विकास मंत्री के अलावा नगर विकास सचिव रहे एसपी सिंह से एसआईटी लंबी पूछताछ कर चुकी है। सूत्रों का कहना है कि एसआईटी ने इस मामले में अधिकतर सुबूत इकट्ठा कर रखे हैं। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।
एसआईटी ने इस मामले में आजम खां समेत डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की थी जिसमें पूर्व नगर विकास सचिव एसपी सिंह भी शामिल थे।
बेटी की हत्या आरोपी को बनाया गवाह: सुरजेवाला
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कांफ्रेंस में पी चिदंबरम की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। रणदीप सुरजेवाला ने कहा, सार्वजनिक जीवन वाले एक व्यक्ति को जेल में बंद महिला के बयान पर गिरफ्तार किया गया है, जिस पर अपनी ही बेटी की हत्या का आरोप है और जेल से स्वीकृति का बयान दिया गया है।'
सुरजेवाला ने कहा, चिदंबरम की प्रतिष्ठा को कलंकित करने के भाजपा सरकार के निम्नस्तरीय इरादे के अलावा सीबीआई और ईडी के पास धावा बोलकर उन्हें आधी रात को गिरफ्तार करने का कोई कारण नहीं था। उन्होंने मीडिया पर भी निशाना साधते हुए कहा, 'कुछेक कठपुतली समाचार चैनलों के साथ सांठ-गांठ करके भाजपा प्रचार मशीन पूरी तरह से बेबुनियाद, नकली समाचार और एकमुश्त झूठ के लिए काम करती है। तथ्य उनके दावे का समर्थन नहीं करते हैं।
उन्होंने कहा कि 'पिछले दो दिनों में देश दिनदहाड़े लोकतंत्र के साथ न्याय की हत्या का गवाह रहा है। सत्ता में बैठे लोगों द्वारा सीबीआई/ईडी का इस्तेमाल राजनैतिक रंजिश के तौर पर किया जा रहा है।' उन्होंने कहा, 'पूर्व गृह और वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के साथ दुर्व्यवहार, दुर्भावनापूर्ण और सुनियोजित तरीके मुकदमा चलाया जा रहा है, जो मोदी सरकार द्वारा निजी और राजनीतिक प्रतिशोध से कम नहीं है।'
शस्त्र लाइसेंस खोलें जिलाधिकारी
नोएडा, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कार्य कर रही संस्था नोवरा द्वारा एक पत्र जिलाधिकारी श्री बी एन सिंह के नाम लिखा गया है जिसमें उनसे यह अनुरोध किया है के वह जल्द से जल्द हथियारों के लाइसेंस पर लगी रोक हटा दें। गौरतलब है के जिलाधिकारी ने लोक सभा चुनाव की घोषणा से पहले ही आदेश जारी कर लाइसेंस पर रोक लगाई हुई है। जनता को उम्मीद थी के चुनाव समाप्त होने के बाद यह रोक हटा ली जायेगी। किन्तु ऐसा हुआ नहीं, यह किसी से छुपा नहीं है के शहर में आपराधिक वारदातें रुकी नहीं हैं, ऐसे में समाजसेवियों, आरटीआई कार्यकर्ताओं, अपराध पीड़ितों, व्यापारियों में इस बाबत रोष है, जनता जानना चाहती है के डीएम की ऐसी क्या मजबूरी है के प्रदेश भर के जिलों में ऐसी कोई रोक न होने के बावजूद भी गौतम बुध नगर में यह रोक लगाई गई है।
समाजसेवी एवं नोवरा अध्यक्ष श्री रंजन तोमर ने संवाददाताओं को जानकारी देते हुए डीएम श्री बी एन सिंह से यह अपील की है के वह अपना आदेश वापस ले लें, इससे कहीं न कहीं आम जनता को परेशानी हो रही है, साथ ही यह भारतीय संविधान की धारा 14 (बराबरी का अधिकार) का भी हनन लगता है ,चूँकि प्रदेश के बाकी जिलों में जो अधिकार जनता को प्राप्त है वह गौतमबुद्धनगर में ही क्यों नहीं? भंगेल में पिछले दिनों एक व्यापारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, उससे पहले भी सलारपुर इलाके में एक व्यापारी ने लूट का प्रयास कर रहे एक घोषित बदमाश को पकड़वाया था, अब वह जमानत पर रिहा हो चूका है और व्यापारी को जान से मारने की धमकी दे चुका है, यदि ऐसी कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी क्या प्रशाशन उठाने को तैयार होगा ?
कानूनी रूप से भी यह सर्वविदित है के ग्रामीण क्षेत्रों में अपराध ज्यादा होते हैं, अथवा विवाद आसानी से हो जाते हैं, ऐसे में सुरक्षा के लिए भी हथियार चाहिए, यदि लाइसेंसी हथियार रखने से अपराध बढ़ते तो देश भी अपनी खेप नहीं बढ़ाता ,दुनिया का हर मजबूत देश हथियारों का बड़ा जखीरा रखता है, दुनिया की स्थिरता भी इसी आयाम पर आश्रित है एवं उन मजबूत देशों की अर्थव्यवस्था भी आगे इसी कारण बढ़ रही है क्यूंकि वह सुरक्षित हैं। इसके साथ ही आर टी आई कार्यकर्ता एवं समाजसेवी जो देश के प्रति कार्यशील हैं एवं भ्रस्टाचारियों के खिलाफ जान जोखिम में डालके लड़ रहे हैं वह भी सरकार से मदद न मिलने के कारण अपनी लड़ाई में कमजोर पड़ गए हैं।
किसान एकता संघ के जितेन्द्र प्रधान जिला अध्यक्ष युवा अलीगढ़ बने
जट्टारी दिनांक 21/08/2019 को किसान एकता संघ की बैठक खैर तहसील अलीगढ़ के पलसेडा गांव में राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान की अध्यक्षता में सम्मपन हुई जिसका संचालन सुमित चपरगढ ने किया राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रमेश कसाना ने बताया की सर्व सम्मति से संगठन का विस्तार करते हुए जितेन्द्र प्रधान को जिला अध्यक्ष युवा अलीगढ़,
महीपाल सिंह गांव पलसेडा को तहसील प्रभारी खैर, जयप्रकाश को तहसील अध्यक्ष खैर, निशांत चौधरी को तहसील अध्यक्ष युवा खैर तथा जितेन्द्र सिंह को ग्राम अध्यक्ष पलसेडा सहित आदि दर्जनो लोगों ने किसान एकता संघ में सदस्यता ग्रहण की सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को पूरी ईमानदारी व निष्ठा से किसान हित में कार्य करने की शपथ दिलाई गई इस मौके पर सोरन प्रधान,प्रताप सिंह नागर,रमेश कसाना, सुमित चपरगढ, मोहनपाल नागर, सतीश कनारसी, दुर्गेश शर्मा,ॠषिपाल,रंजीत सिंह,ओमबीर सिंह,यशवीर मलिक,रघुराज सिंह, कलुआ सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे/
बुधवार, 10 जुलाई 2019
शुक्रवार, 12 अप्रैल 2019
बुधवार, 10 अप्रैल 2019
सोमवार, 25 मार्च 2019
आत्मविश्वास कैसे बढाएं
आत्मविश्वास से आशय “स्वंय पर विश्वास एंव नियंत्रण” (Believe in Yourself) से है | हमारे जीवन में आत्मविश्वास (Self Confidence) का होना उतना ही आवश्यक है जितना किसी फूल (Flower) में खुशबू (सुगंध) का होना| आत्मविश्वास (Self Confidence) के बगैर हमारी जिंदगी (Life) एक जिन्दा लाश के समान हो जाती है| कोई भी व्यक्ति कितना भी प्रतिभाशाली (Intelligent) क्यों न हो वह आत्मविश्वास के बिना कुछ नहीं कर सकता| आत्मविश्वास ही सफलता (Success) की नींव है, आत्मविश्वास की कमी के कारण व्यक्ति अपने द्वारा किये गए कार्य पर संदेह करता है और नकारात्मक विचारों (Negative Thoughts) के जाल में फंस जाता है| आत्मविश्वास (Self Confidence) उसी व्यक्ति के पास होता है जो स्वंय से संतुष्ट होता है एंव जिसके पास दृड़ निश्चय, मेहनत (Hard work), लगन (Focused), साहस (Fearless ) , वचनबद्धता (Commitment) आदि संस्कारों (Sanskar) की सम्पति होती है|
1. स्वंय पर विश्वास रखें (Believe in Yourself), लक्ष्य बनायें (Make SMART goals) एंव उन्हें पूरा करने के लिए वचनबद्ध रहें| जब आप अपने द्वारा बनाये गए लक्ष्य (Goals) को पूरा करते है तो यह आपके आत्मविश्वास (Self Confidence) को कई गुना बढ़ा देता है|
2. ऐसे लक्ष्य (S.M.A.R.T. Goal) बनाएँ जिसे आप प्राप्त कर सकें (Achievable and Realistic Goals)| क्योंकि जब आप ऐसे लक्ष्य (TARGET) बनाते है जिसे आप पूरा नहीं कर सकते तो यह आपके self confidence (Aatmvishwash) को गिरा देते है और आपका स्वंय पर विश्वास कम हो जाता है | लक्ष्य S.M.A.R.T. होना चाहिए
3. खुश रहें (Be Happy), खुद को प्रेरित करें (Motivate Yourself), असफलता (Failure) से दुखी न होकर उससे सीख लें क्योंकि “experience हमेशा bad experience से ही आता है”
4. हमेशा आसान काम पहले करें और मुश्किल काम बाद में| क्योंकि जब आप पहले आसान कार्य अच्छे से कर लेते है तो दबाव कम हो जाता है और confidence बढ़ता है जिससे मुश्किल कार्य भी आसान बन जाता है|
5. सकारात्मक सोचें (Think Positive) , विनम्र रहें एंव दिन की शुरुआत किसी अच्छे कार्य से करें (starting the day with a positive attitude)|
6. इस दुनिया में नामुनकिन कुछ भी नहीं है – Nothing is Impossible in this world| आत्मविश्वास का सबसे बड़ा दुशमन किसी भी कार्य को करने में असफलता होने का “डर” (Fear of Failure) है एंव डर को हटाना है तो वह कार्य अवश्य करें जिसमें आपको डर लगता है| – Darr ke aage jeet hai
7. आप यह मत सोचिये कि लोग आपके बारे में क्या सोचेंगे :- “सबसे बड़ा यही रोग क्या कहेंगे लोग (Sabse bada rog kya kahenge log)| ज्यादातर लोग कोई भी कार्य करने से पहले कई बार यह सोचते है की वह कार्य करने से लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे या क्या कहेंगे और इसलिए वे कोई निर्णय ले ही नहीं पाते एंव सोचते ही रह जाते है एंव समय उनके हाथ से पानी की तरह निकल जाता है| ऐसे लोग हमेशा डर-डर के जीते है और बाद में पछताते हैं| इसलिए दोस्तों ज्यादा मत सोचिये जो आपको सही लगे वह कीजिये क्योंकि शायद ही कोई ऐसा कार्य होगा जो सभी लोगों को एक साथ पसंद आये|
8. सच बोलें, ईमानदार रहें, धूम्रपान न करें, प्रकृति से जुड़े, अच्छे (Good) कार्य करें , जरुरतमंद की मदद करें (Be Helpful)| क्योंकि ऐसे कार्य आपको सकारात्मक शक्ति (positive power) देते हैं वही दूसरी ओर गलत कार्य एंव बुरी आदतें (Bad Habits) हमारे आत्मविश्वास को गिरा देते हैं|
9. वह कार्य करें जिसमें आपकी रुचि हो एंव कोशिश करें कि अपने करियर (Career) को उसी दिशा में आगे ले जिसमें आपकी रुचि हो|
बुधवार, 20 मार्च 2019
10 बातें, जो इंसान असफलता से सीखता है
हर इंसान अपने जीवन में बहुत सी गलतियां करता और असफल होता है। अगर आप निरंतर प्रयास कर रहे है तो आपके लिए असफल होना बुरी बात नहीं बल्कि अच्छी बात है क्योंकि हर सफल व्यक्ति ने यह माना है कि –
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम इन गलतियों से सबक लें। प्रत्येक दिन, आपके साथ जुड़ा प्रत्येक इंसान, आपसे मिलने वाला हर नया इंसान, हर परिस्थिति, आपको कुछ न कुछ नया सबक सिखाती है। हमें जरुरत है, उनको समझने की।
आज हम यहाँ आपको ऐसे ही कुछ बातें बता रहे हैं, जिसे इंसान अपनी असफलताओं से सीख सकता है|
अपनी नाकामयाबी को स्वीकार करें
जो बीत गया, वो आपका अतीत था – उससे सीखो और उससे आगे बढ़ो। आपने अपने अतीत में जो गलतियां की हो, उसे पकड़ कर रोते न रहें। यदि आप ऐसा करेंगे तो, आप आज कुछ नहीं कर पाएंगे और आपका कल भी बिगड़ जायेगा। जो हो गया उस पर अब आपका कोई नियंत्रण नहीं हैं, इसलिए उसे लेकर परेशान क्यू होना। बेहतर है कि इन नाकामयाबी को स्वीकार करें और इनसे सीख लेते हुए आगे बढे।
आपको अपने अंदर बदलाव की जरुरत है, न की संसार को बदले की
जब भी हमारे साथ कुछ भी गलत होता है या हम असफल होते है तो हम में से ज्यादातर लोग परिस्थितियों या दूसरों व्यक्तियों को जिम्मेदार ठहराते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि हमारी गलतियों और असफलताओं के लिए हम स्वंय ही जिम्मेदार होते है। असफलताओं के बाद हमें अपनी शक्तियों और कमियों का पता चलता है ताकि हम अपनी कमियों को शक्तियों में बदल सकें|
असफलता के बाद अधिक साहसी बनें
ज्यादातर लोग असफलता से डरते है| लेकिन एक बार जब इंसान असफल हो जाता है, तो असफलता का डर समाप्त हो जाता है और इंसान अधिक साहसी बनता है| असफलता का अनुभव लें और अपनी असफलताओं की मदद से डर को मिटा दें
अपने सपने का पीछा करें
असफलता के कारण हार मानना इंसान की सबसे बड़ी बेवकूफी है| असफलता यह दर्शाती है कि इन्सान सफलता की ओर आगे बढ़ रहा है, इसलिए असफलता से सीख लें |
कोई भी इंसान पूर्णतया कुशल नहीं होता
इस संसार में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो पूर्णतया कुशल हो। जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, दिन-प्रतिदिन कुछ न कुछ नया सीखते है। हर इंसान में कुछ-कुछ कमियां होती है और यदि आप इन बातों को लेकर परेशान रहते है कि मुझे ये नहीं आता, वो नहीं आता तो आप व्यर्थ में परेशान हैं। अगर आपको खुश रहना है तो अपनी कमियों को स्वीकार करें और उनको सुधारने की कोशिश करें।
समय सबसे मूल्यवान है
असफलताएँ यह बताती है कि हमने समय का सही उपयोग नहीं किया है| अगर हमें अपने जीवन में कुछ बेहतर करना चाहते हैं तो हमको सबसे ज्यादा अपने कीमती समय पर ध्यान देना होगा। आज दुनिया बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है, अगर आप इसके साथ नहीं चलेंगे तो निश्चित ही पीछे हो जायेंगे। सही समय पर सही काम करने से ही सफलता मिलती है।
अपना दायरा बढ़ाये
असफलताएँ यह इशारा करती है कि हमें अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलने की जरूरत है| हम सभी, कुछ भी नया करने से डरते हैं| लेकिन हमें यह भी ध्यान देना चाहिए जब तक हम कुछ नया करने की कोशिश नहीं करेंगे तब तक हम आगे नहीं बढ़ सकते। इसलिए अपने कम्फर्ट जोन (comfort level) से बाहर निकलें और बिना डरे प्रयास करें |
मंगलवार, 10 अप्रैल 2018
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