मंगलवार, 27 अगस्त 2019

हरियाणा में बदल सकते है सियासी समीकरण

आगामी विधानसभा चुनाव के लिए हरियाणा कांग्रेस की कमान हुड्डा के हाथों में न सौंपे जाने से खफा पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा नई पार्टी बनाने के ऐलान के बाद से ही कांग्रेस के खेमे में बेचैनी है। पहले से ही कमजोर कांग्रेस हुड्डा द्वारा नई पार्टी बनाने के ऐलान से सकते में है, अगर ऐसा हुआ तो प्रदेश में कांग्रेस का कोई नाम लेने वाला भी नहीं बचेगा। संसदीय चुनावो में करारी हार के बाद कांग्रेसी नेतृत्व परेशान है कि अगर प्रदेश की कमान हुडा के हाथो में चली गई अन्य जाट कांग्रेसी नेताओ की राजनीती ख़तम हो जाएगी और अगर नहीं दी तो प्रदेश हाथ से निकल जायेगा। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए हरियाणा कांग्रेस की कमान हुड्डा के हाथों में न सौंपे जाने से खफा पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा नई पार्टी बनाने के ऐलान के बाद से ही कांग्रेस के खेमे में बेचैनी है।


भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कांग्रेस में बने रहने पर भाजपा की मुख्य लड़ाई कांग्रेस के साथ ही रहेगी। जबकि, हुड्डा के अलग पार्टी बनाने पर विपक्ष कमजोर हो जाएगा, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा। वैसे भी पहले से हरियाणा के अन्य दलों में फूट पड़ी हुई है। ऐसे में हुड्डा की वापसी राज्य की सियासत का समीकरण बदल देगी।  


 


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