गुरुवार, 22 अगस्त 2019

शस्त्र लाइसेंस खोलें जिलाधिकारी

नोएडा, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कार्य कर रही संस्था नोवरा द्वारा एक पत्र जिलाधिकारी श्री बी एन सिंह के नाम लिखा गया है जिसमें उनसे यह अनुरोध किया है के वह जल्द से जल्द हथियारों के लाइसेंस पर लगी रोक हटा दें। गौरतलब है के जिलाधिकारी ने लोक सभा चुनाव की घोषणा से पहले ही आदेश जारी कर लाइसेंस पर रोक लगाई हुई है। जनता को उम्मीद थी के चुनाव समाप्त होने के बाद यह रोक हटा ली जायेगी। किन्तु ऐसा हुआ नहीं, यह किसी से छुपा नहीं है के शहर में आपराधिक वारदातें रुकी नहीं हैं, ऐसे में समाजसेवियों, आरटीआई कार्यकर्ताओं, अपराध पीड़ितों, व्यापारियों में इस बाबत रोष है, जनता जानना चाहती है के डीएम की ऐसी क्या मजबूरी है के प्रदेश भर के जिलों में ऐसी कोई रोक न होने के बावजूद भी गौतम बुध नगर में यह रोक लगाई गई है। 
समाजसेवी एवं नोवरा अध्यक्ष श्री रंजन तोमर ने संवाददाताओं को जानकारी देते हुए डीएम श्री बी एन  सिंह से यह अपील की है के वह अपना आदेश वापस ले लें, इससे कहीं न कहीं आम जनता को परेशानी हो रही है, साथ ही यह भारतीय संविधान की धारा 14 (बराबरी का अधिकार) का भी हनन लगता है ,चूँकि प्रदेश के बाकी जिलों में जो अधिकार जनता को प्राप्त है वह गौतमबुद्धनगर में ही क्यों नहीं? भंगेल में पिछले दिनों एक व्यापारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, उससे पहले भी सलारपुर इलाके में एक व्यापारी ने लूट का प्रयास कर रहे एक घोषित बदमाश को पकड़वाया था, अब वह जमानत पर रिहा हो चूका है और व्यापारी को जान से मारने की धमकी दे चुका है, यदि ऐसी कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी क्या प्रशाशन उठाने को तैयार होगा ?
कानूनी रूप से भी यह सर्वविदित है के ग्रामीण क्षेत्रों में अपराध ज्यादा होते हैं, अथवा विवाद आसानी से हो जाते हैं, ऐसे में सुरक्षा के लिए भी हथियार चाहिए, यदि लाइसेंसी हथियार रखने से अपराध बढ़ते तो देश भी अपनी खेप नहीं बढ़ाता ,दुनिया का हर मजबूत देश हथियारों का बड़ा जखीरा रखता है, दुनिया की स्थिरता भी इसी आयाम पर आश्रित है एवं उन मजबूत देशों की अर्थव्यवस्था भी आगे इसी कारण बढ़ रही है क्यूंकि वह सुरक्षित हैं। इसके साथ ही आर टी आई कार्यकर्ता एवं समाजसेवी जो देश के प्रति कार्यशील हैं एवं भ्रस्टाचारियों के खिलाफ जान जोखिम में डालके लड़ रहे हैं  वह भी सरकार से मदद न मिलने के कारण  अपनी लड़ाई में कमजोर पड़  गए हैं। 


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