मंगलवार, 1 अक्टूबर 2019

मकर संक्रांति पर्व को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है

मकर संक्रांति पर्व को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्य उत्तर की अ¨र बढ़ने लगता है जो ठंड के घटने का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं जो मकर राषि के शासक थे। पिता अ©र पुत्र आम तौर पर अच्छी तरह नहीं मिल पाते इसलिए भगवान सूर्य महीने के इस दिन को अपने पुत्र से मिलने का एक मौका बनाते हैं। जाड़े के मौसम के समापन अ©र फसलों की कटाई की शुरुआत का प्रतीक समझे जाने वाले मकर संक्रांति पर्व को देष भर में धूमधाम से मनाया जाता है और इस अवसर पर लाखों लोग देष भर में पवित्र नदियों में स्नान कर पूजा अर्चना करते हैं। देष के विभिन्न भागों में तो लोग इस दिन कड़ाके की ठंड के बावजूद रात के अंधेरे में ही नदियों में स्नानश्षुरू कर देते हैं। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु इलाहाबाद के त्रिवेणी संगम, वाराणसी में गंगाघाट, हरिय्ााणा में कुरुक्षेत्र, राजस्थान में पुष्कर और महाराष्ट्र के नासिक में ग¨दावरी नदी में स्नान करते हैं।
मकर संक्रांति पर्व देष के विभिन्न भागों में अलग अलग नामों से भी मनाया जाता है। जहां उत्तर और मध्य भारत में इसे मकर संक्रांति कहते हैं वहीं आंध्र प्रदेष, कर्नाटक और केरल में इस पर्व को सिर्फ संक्रांति कहते हैं तो तमिलनाडु में इस पर्व को पोंगल कहा जाता है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना पुण्यकारी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खिचड़ी का दान देना विषेष रूप से फलदायी होता है। देष के विभिन्न मंदिरों को इस दिन विषेष रूप से सजाया जाता है और इसी दिन से शुभ कार्यों पर लगा प्रतिबंध भी खत्म हो जाता है। 
इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनकर मंदिरों में जाते हैं और पूजा अर्चना करते हैं। इस पर्व पर इलाहाबाद में लगने वाला माघ मेला और कोलकाता में गंगासागर के तट पर लगने वाला मेला काफी प्रसिद्ध है। अयोध्या में भी इस पर्व की खूब धूम रहती है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र सरयू में डुबकी लगाकर रामलला, हनुमानगढ़ी में हनुमानलला तथा कनक भवन में मां जानकी की पूजा अर्चना करते हैं। हरिद्वार में भी इस दौरान मेला लगता है जिसमें श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रय्ााग एवं गंगासागर में स्नान क¨ महास्नान की संज्ञा दी गई है। 
इस पर्व की छटा देष के विभिन्न हिस्सों में अलग अलग रूप में देखने को मिलती है। जहां समूचे उत्तर प्रदेष में इस पर्व क¨ खिचड़ी के नाम से जाना जाता है तथा इस दिन खिचड़ी सेवन एवं खिचड़ी दान का अत्य्ाधिक महत्व ह¨ता है वहीं महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिलाएं अपनी पहली संक्रांति पर कपास, तेल, नमक आदि वस्तुएं अन्य्ा सुहागिन महिलाअ¨ं क¨ दान करती हैं। तमिलनाडु में इस त्य्ा¨हार क¨ प¨ंगल के रूप में चार दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन कूड़ा करकट जलाय्ाा जाता है, दूसरे दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है अ©र तीसरे दिन पषु धन की पूजा की जाती है। प¨ंगल मनाने के लिए स्नान करके खुले आंगन में मिट्टी के बर्तन में खीर बनाई जाती है, जिसे प¨ंगल कहते हैं। इसके बाद सूयर््ा देव क¨ नैवैद्य चढ़ाकर खीर क¨ प्रसाद के रूप में सभी ग्रहण करते हैं। असम में मकर संक्रांति क¨ माघ-बिहू अथवा भ¨गाली-बिहू के नाम से मनाया जाता है तो राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएं अपनी सास क¨ वाय्ाना देकर आषीर्वाद प्राप्त करती हैं। मान्यता है कि महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्य्ाागने के लिए मकर संक्रांति का ही चय्ान किय्ाा था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से ह¨कर सागर में जा मिली थीं।


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