शनिवार, 21 नवंबर 2020

स्मृतियों ने साथ न छोड़ा

स्मृतियों ने साथ न छोड़ा
मनबसियों ने साथ न छोड़ा 

धुंधले हुए चित्र बचपन के
कौन सुनाएं परीकथाएं
ऐसी नींद नहीं आती अब
जिनमें फिर वह सपने आए

पर सपनों में जो आती थी
उन परियों ने साथ न छोड़ा

जीवन की आपाधापी में
जाने कितने साथी छूटे
जग में मनभावन उपवन के 
छूटे कितने ही गुलबूटे 

जिन की गंध बसी थी मन में 
उन कलियों ने साथ न छोड़ा

यायावर हम निपट अकेले 
रह पाए किस घर के हो के 
चौखट ऐसी कोई नहीं थी
कर मनुहार हमें जो रोके 

पर हम साथ जहां चलते थे 
उन गलियों न साथ न छोड़ा 

कोई टिप्पणी नहीं:

NOIDA DARPAN INDEPENDENCE DAY WISHES