जयपुर। राजस्थान कांग्रेस ने एक बार फिर अंतरिक्ष सियासत तेज हो गई है। करीब 2 सप्ताह बाद प्रदेश की कांग्रेस सरकार 2 साल का कार्यकाल पूरा कर रही है। इसी बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंत्रिमंडल विस्तार व राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अपने दोस्तों के साथ कसरत कर शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक गहलोत अपने समर्थकों को अधिक से अधिक संख्या में पार्टी संगठन में भी पद लेना चाहते हैं। इसे देखते हुए पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कांग्रेस आलाकमान को अपना पुराना वादा याद दिलाया है। जिन्होंने उन्हें और गहलोत समर्थकों को बराबर का हिस्सा देने की बात कही गई थी। आश्वासन दिया गया था कि मंत्रिमंडल व राजनीतिक नियुक्तियों में दोनों के बीच समान रूप से बटवारा होगा। पायलट ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल व पार्टी प्रभारी अजय माकन तक इस बारे में अपनी बात पहुंचायी तो गहलोत सक्रिय हो गए। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि गहलोत नहीं चाहते है कि पायलट का प्रदेश की राजनीतिक में दखल हो। वह न तो पायलट को फिर से उप मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं और न ही उनके समर्थकों को सत्ता व संगठन में पद देना चाहते हैं। इस नेता का कहना है कि 1 दिन पहले राज्य सरकार ने भाजपा के प्रयासों को लेकर दिया गया बयान भी गहलोत की रणनीति का हिस्सा होता है। गहलोत ने कांग्रेस आलाकमान तक परोक्ष रूप से यह संदेश पहुंचाया कि बागी विधायकों व भाजपा नेताओं के बीच अब भी कहीं ना कहीं संपर्क है। सूत्रों के अनुसार गहलोत आलाकमान तक संदेश पहुंचाने में जुटे हैं कि उनकी पसंद के अनुसार फैसले होने पर ही सरकार सुरक्षित रह सकती है। मुख्यमंत्री के समर्थक जयपुर से दिल्ली तक सक्रिय हो गए हैं। जो केंद्रीय नेताओं तक गहलोत को प्रदेश का सर्वमान्य नेता बताने में जुटे हैं। उधर कांग्रेस से इस बात को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं कि 5 माह पूर्व पायलट और उनके समर्थकों की बगावत थमने के बाद हुए समझौते को दरकिनार करते हुए गहलोत ने आधा दर्जन नियुक्ति कर दी।
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