मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

कोरोनावायरस: भारत में दवाओं की कीमत बढ़ी

नई दिल्ली. कोरोनावायरस का संक्रमण बढ़ने का असर चीन के साथ अब भारत पर भी दिखने लगा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से सप्लाई बाधित होने की वजह से भारत में पैरासिटामॉल सहित कई अन्य दवाओं की कीमत 40% बढ़ गई है।


एक्टिव फार्मास्यूटिकल्स इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) के आयात के लिए भारत की चीन पर निर्भरता बहुत ज्यादा है। किसी भी दवा को बनाने के लिए एपीआई सबसे अहम कंपोनेंट हैं। डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ कमर्शियल इंटेलीजेंस एंड स्टैस्टिक्स के मुताबिक 2016-17 में भारत ने इस एपीआई सेगमेंट में 19,653.25 करोड़ रुपए का आयात किया, इसमें चीन की हिस्सेदारी 66.69% रही। 2017-18 के दौरान भारत का आयात 21,481 करोड़ रुपए रहा और चीन की हिस्सेदारी बढ़कर 68.36% हो गई। 2018-19 में एपीआई और बल्क ड्रग आयात 25,552 करोड़ रुपए हो गया।


लागत के हिसाब से चीन से आने वाले एपीआई और बल्क ड्रग्स भारतीय फार्मा मैन्युफैक्चरर्स के लिए फायदेमंद हैं। फार्मा इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि चीन में एपीआई प्रोडक्शन की लागत भारत से 20-30% कम है। भारत में एपीआई प्रोडक्शन यूनिट अपनी क्षमता के मुकाबले 30% तक काम कर रही हैं जबकि चीन में एपीआई प्रोडक्शन यूनिट अपनी क्षमता के मुकाबले 70% तक काम कर रही हैं। भारत में एपीआई मैन्युफैक्चरिंग पर प्रॉफिट मार्जिन बहुत कम होने की वजह से भारतीय फार्मा इंडस्ट्री चीन से एपीआई का आयात करती है और यहां दवाएं बनाकर दूसरे देशों को निर्यात करती है। 


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