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जय सत्य सनातन
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युगाब्द-५१२५*
विक्रम संवत-२०८०*
तिथि - तृतीया दोपहर 12:39 तक तत्पश्चात चतुर्थी*
दिनांक - 18 सितम्बर 2023*
दिन - सोमवार*
शक संवत् - 1945*
अयन - दक्षिणायन*
ऋतु - शरद*
मास - भाद्रपद*
पक्ष - शुक्ल*
नक्षत्र - चित्रा दोपहर 12:08 तक तत्पश्चात स्वाती*
योग - इन्द्र 19 सितम्बर प्रातः 04:24 तक तत्पश्चात वैधृति*
राहु काल - शाम 05:10 से 06:42 तक*
सूर्योदय - 06:27*
सूर्यास्त - 06:41*
दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:53 से 05:40 तक*
निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:10 से 12:57 तक*
व्रत पर्व विवरण - हरितालिका तीज, चतुर्थी (चन्द्र-दर्शन निषिद्ध - रात्रि 08:40), संत चरणदास जी जयन्ती (ति.अ. )*
विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है । चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
हरितालिका तीज 18 सितंबर 2023
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भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरितालिका तीज का व्रत किया जाता है । विधि-विधान से हरितालिका तीज का व्रत करने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है, वहीं विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य मिलता है ।*
गणेश चतुर्थी : 19 सितम्बर 2023
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गणेश चतुर्थी का व्रत एवं पूजन 19 सितम्बर 2023 को है । ‘इस दिन स्नान, दान, जप और उपवास करने से 100 गुना फल होता है ।’ (भविष्यपुराण)*
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (कलंकी चौथ) को चन्द्रदर्शन करने से मिथ्या दोष लगता है । इस वर्ष दिनांक 18 सितम्बर और 19 सितम्बर - दो दिन चन्द्रदर्शन न करें ।*
18 सितम्बर - चन्द्रदर्शन निषिद्ध (चन्द्रोस्त - रात्रि 08:40)*
19 सितम्बर - चन्द्रदर्शन निषिद्ध (चन्द्रोस्त - रात्रि 09:18)*
*भूलवश चन्द्रदर्शन हो जाये तो उसका प्रभाव कम करने के लिये -*
इस मंत्र का 21, 51 या 108 बार जप करके पवित्र किया हुआ जल पीयें ।*
*‘श्रीमद् भागवत’ के 10वें स्कंध के 56-57वें अध्याय में दी गयी ‘स्यमंतक मणि की चोरी’ की कथा का आदरपूर्वक पठन-श्रवण करना चाहिए ।*
*भाद्रपद शुक्ल तृतीया या पंचमी के चन्द्रमा का दर्शन करना चाहिए ।*
शिवा चतुर्थी - 19 सितम्बर 2023
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भविष्य पुराण के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का नाम ‘शिवा’ है । इस दिन किये गये स्नान, दान, उपवास, जप आदि सत्कर्म 100 गुना हो जाते हैं ।*
इस दिन जो स्त्री अपने सास-ससुर को गुड़ के तथा नमकीन पुए खिलाती है वह सौभाग्यवती होती है । पति की कामना करनेवाली कन्या को विशेषरूप से यह व्रत करना चाहिए ।*
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