नई दिल्ली। अदालत ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स को पीडीएस राशि जमा करने में देरी के मामले में दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि मात्र मंदी को टीडीएस राशि का भुगतान न करने के बहाने के रूप में नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी कंपनी को अपनी कार्यशील पूंजी घाटे को चैनेलाइज करने और पूरा करने के लिए टीडीएस राशि का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। वहीं अदालत ने कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंधक निदेशक प्रदीप कुमार जैन को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। सर्वेक्षण में पाया गया कि कंपनी ने 10,59,08,557 रुपए का टीडीएस काट लिया है और जमात नहीं किया।
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