'18 जनवरी 2011 मे अचानक मेरी पत्नी की तबीयत बिगड़ गई थी। उस समय मेरा ऑटो रिक्शा पंचर था। फिर मैं एक किलोमीटर तक पैदल भागता हुआ गया और किराए का रिक्शा लेकर पत्नी को अस्पताल पहुंचाया। आज मेरी पत्नी का हार्ट सिर्फ 35 प्रतिशत ही काम कर रहा है और उसे कई बीमारियां भी हैं। अगर, उस दिन समय पर इलाज हुआ होता तो आज यह हालत न होती। मैंने अपनी पत्नी की हालत देख मुफ्त ऑटो रिक्शा एम्बुलेंस की शुरुआत की।' ये कहना है ऑटो ड्राइवर अतुल भाई ठक्कर का।
ये कहानी भी उन्हीं की है। वडोदरा के अक्षर चौक इलाके में रहने वाले अतुल भाई पिछले 10 साल से 'मुफ्त ऑटो रिक्शा एम्बुलेंस' चला रहे हैं। वो रात 11 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक मरीजों को अस्पताल ले जाते हैं। अब तक 500 से ज्यादा मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचा चुके हैं। वडोदरा के रहने वाले कंचनभाई पारेख बताते हैं कि एक दिन जब मेरी तबियत बहुत ज्यादा बिगड़ गई तो मेरी पत्नी ने अतुल भाई को फोन किया। वो तुरंत ही मेरे घर आए और मुझे ऑटो में बिठाकर अस्पताल ले गए। मेरा समय पर इलाज हुआ था। तब मेरा हार्निया का ऑपरेशन हुआ था।

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