कृषि कानूनों का मसला इतना लंबा खिंच गया कि इतने समय में तो किसानों की एक फसल कटकर मंडियों में आ जाती। जून में कृषि सुधार के लिए अध्यादेश लाए गए थे। कानून बनने से लेकर अब तक इस पर विवाद की ऐसी फसल खड़ी हो गई है कि बात अब ‘बॉर्डर’ पर प्रतिष्ठा की लड़ाई के तौर पर देखी जाने लगी है। दोनों ओर से नरमी तो पूरी दिख रही है, लेकिन दोनों पक्ष पास होकर भी दूर-दूर हैं। बात सिरे तभी चढ़ेगी, जब दिल मिलेंगे।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें