नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आकड़ों के मुताबिक, देश में ड्रग्स की वजह से हर 24 घंटे में 2 लोगों की मौत होती है। यानी महीने भर में 60 मौतें ड्रग्स की वजह से हो रही हैं। इसमें भी 5% बच्चे हैं। साल दर साल ड्रग्स की वजह से हो रही मौतों में बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। 3 साल से हर 10 दिन में एक बच्चे की जान ड्रग्स की वजह से जा रही है। 2019 में ड्रग्स से 704 मौतें हुईं। पिछले पांच साल में ड्रग्स की वजह से 31 हजार सुसाइड हुए। सबसे ज्यादा 7 हजार 860 सुसाइड 2019 में हुए। पिछले साल हर दिन 21 सुसाइड सिर्फ ड्रग्स की वजह से हुए। 2018 से 2019 में ड्रग्स के चलते होने वाले सुसाइड के मामले लगभग 10% बढ़ गए हैं। भोपाल में साइकाइट्रिस्ट सत्यकांत त्रिवेदी के मुताबिक, ड्रग्स की खपत बढ़ने की कई वजहें हैं, लेकिन इसे ट्रेंड के तौर पर देखा जाना इसका सबसे बड़ा कारण है। पेरेंट्स और समाज भी इसे बहुत सहजता से स्वीकार कर रहा है। इसके रोकथाम में अभी हमारी परफॉर्मेंस बहुत अच्छी इसलिए नहीं है, क्योंकि हम इसे एक सामाजिक बुराई या आदत के तौर पर ट्रीट कर रहे हैं। जबकि, इसे एक मानसिक बीमारी के तौर पर ट्रीट किया जाना चाहिए।
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