- प्रशासन की लापरवाही, क्वारंटाइन सेंटरों पर व्याप्त अव्यवस्था से लोग भयभीत
- सेंटरों पर सफाई व सैनिटाइजेशन की स्थिति बहुत खराब, होटलों में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटरों में जा रहे है
- गिनती के शौचालय, 50 से अधिक लोग करते है इस्तेमाल
कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में रहने वाले लोगों में भी संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। इसे देखते हुए संक्रमित व्यक्ति से जानकारी के बाद कुछ दिनों के दौरान उसके संपर्क में आए लोगों को भी क्वारंटाइन के लिए भर्ती किया जाता है। ऐसे लोगों को भर्ती करने के लिए क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए हैं। सेंटर प्रमुख रूप से निजी कॉलेज व विवि के हॉस्टल में बनाए गए हैं। भर्ती होने वाले लोगों को जिला प्रशासन की ओर से खाना व नाश्ता उपलब्ध कराया जाता है।
क्वारंटाइन सेंटरों पर व्याप्त अव्यवस्था ने प्रशासन की लापरवाही की पोल खोल दी है। सेंटरों पर सफाई व सैनिटाइजेशन की स्थिति बहुत खराब है। सेंटरों पर पहुंचने वाले लोग अव्यवस्था के कारण भयभीत रहते हैं। यही कारण है कि पैसे के मामले में जिन लोगों की आर्थिक स्थिति थोड़ी अच्छी है, वह सरकारी की बजाय होटलों में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटरों में जेब ढीली कर भर्ती हो रहे हैं। न तो नियमित सफाई होती है न ही सैनिटाइज। खाना लेने के लिए भी लोगों को लाइन लगानी पड़ती है। नियम के तहत भर्ती होने वाले सभी लोगों के लिए अलग-अलग शौचालय होने चाहिए, लेकिन गिनती के शौचालय का प्रयोग 50 से अधिक लोगों को करना होता है। कुछ दिन पहले डिस्चार्ज हुए चैनपाल ने बताया पीने के लिए दिन में दो बार ही पानी की बोतल मिलती है। उसके बाद पानी नहीं मिलता। कहा जाता है बाथरूम में लगी टोटी से पानी पीएं। सेंटर पर विभिन्न परेशानियों के संबंध में कोई सुनने वाला ही नहीं है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें