सेक्टर -9 व 10 नहीं खुलेंगे तब तक कच्चा माल उपलब्ध नहीं होगा
गौतमबुद्ध नगर में तीन हजार उत्पाद इकाइयों को संचालित करने की भले ही अनुमति सरकार ने दी है, लेकिन हकीकत में 1500 इकाइयों में उत्पादन नहीं हो पा रहा है। इकाइयों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत सप्लाई चेन को मंजूरी नहीं देना है, क्योंकि जिन इकाइयों को अनुमति प्रदान की गई है। इन यूनिट्स की पार्ट सप्लाई चेन को संचालन की अनुमति नहीं मिली। ऐसे बड़ी इकाइयों में उत्पाद कैसे होगा।
फेडरेशन ऑफ़ नोएडा इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष तरुण भारद्वाज ने बताया कि कई बड़ी इकाइयों को अनुमति दे दी गयी है, लेकिन उन्हें तैयार माल सप्लाई करने वाली चेन को अनुमति नहीं। इन बड़ी इकाइयों में सुब्रोस, सूमी मदरसन, डेंसो, हौंडा आदि शामिल है। इसके अलावा कुछ गारमेंट्स की कम्पनियो को भी अनुमति दी गयी है, लेकिन सभी के सामने सप्लाई करने वाली चेन की समस्या आ रही है।
फेडरेशन ऑफ़ नोएडा इंडस्ट्रीज के महासचिव तरुण अनेजा और सचिव आर० के ० जिंदल ने कहा कि केवल चुनिंदा इकाइयों को अनुमति देने से उद्योग नहीं चलेंगे, जिला प्रशासन व नोएडा प्राधिकरण के अधिकारिओ को प्रशासनिक अनुभव हो सकता है लेकिन वो इंडस्ट्रियलिस्ट नहीं है और न ही उन्हें कारोबार का कोई अनुभव। उन्हें पता ही नहीं है कि इंडस्ट्री चलाने से पहले सप्लाई करने वाली चेन को दुरुस्त करना होगा तभी उत्पादन संभव हो पायेगा।
FNI के सचिव आर ० के ० सिंह, इनकी सेक्टर 63 में गारमेंट्स की इकाइ है और ये CA भी है, ने कहा कि जब तक कच्चा माल, प्रयाप्त लेबर और सप्लाई चैन नहीं बनेगी तब तक वे अपनी इकाई शुरू नहीं करंगे और न ही कर सकते है। उनके अनुसार, कंपनियां प्रतिदिन ऑर्डर जारी करती, व कुछ समय में माल तैयार होकर उनके पास पहुंच जाता है। पूरा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर मांग आपूर्ति पर टिका है, जो की अभी लेबर और प्रशासन के रवैये के कारण नहीं खुल पा रही है।
MSME एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने बताया कि बिना किसी योजना के इकाइयों को खोलने की अनुमति प्रदान की जा रही है, जिसमें संबंधित अधिकारियों को यह पता ही नहीं है कि कौन से इकाई किसकी सहयोगी इकाई के रूप में संचालित होती है। जब इकाइयों को रॉ मैटेरियल ही नहीं मिलेगा, तो यह इकाइयां स्वत: ही संचालन बंद कर देंगी। उद्यमी बोले, बड़ी-बड़ी इकाइयों की सप्लाई चेन को अनुमति नहीं देने से पैदा हुआ उत्पादन का संकट कभी भी इकाई को बंद कर देगा। सुरेंद्र नाहटा के अनुसार जब तक सेक्टर -५, ८, ९ व १० में स्थित MSME इकाई नहीं खुलेंगी तब तक इंडस्ट्री चल ही नहीं सकती। इन सेक्टरों की सबसे बड़ी समस्या यहाँ पर स्थित झुग्गियां है और इनमे रोज दो चार कोरोना के केस मिल रहे है और चारो सेक्टर कन्टेनमेंट जोन बना दिए गए है जिसके कारण इन सेक्टरों में स्थित 5 हज़ार इकाइयां को खोलने की अनुमति नहीं मिल पा रही है।
इस सम्बन्ध में फेडरेशन के अध्यक्ष तरुण भरद्वाज ने प्रशासन को पत्र लिखकर कहा है कि इन झुग्गिओ में जहां पर भी कोरोना के केस मिल रहे है, केवल उस गली या 50 मी ० के दायरे को कन्टेनमेंट घोषित कर बंद कर दिया जाये तथा बाकी सेक्टर में औद्योगिक कार्यो को अनुमति दी जाये जैसा कि कई ग्रामीण इलाकों में किया गया है।
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