टाटा संस के चेयरमैन (एमरिटस) रतन टाटा ने साेमवार काे देश की हाउसिंग पाॅलिसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि हम बड़ी इमारत बनाने के लिए गंदी बस्तियाें काे दूसरी जगह बसा देते हैं। इसके बजाय हमें गरीबाें काे गुणवत्तापूर्ण जीवन देने के लिए अपनी पुनर्बसाहट नीतियाें पर दोबारा विचार करना चाहिए।
टाटा ने कहा- मेरा सुझाव है कि गंदी बस्तियाें में रहने वाले लाेगाें के रहन-सहन पर शर्मिंदा हाेने के बजाय हमें उन्हें नए भारत का हिस्सा मानकर स्वीकार करना चाहिए। काेराेना हमारे लिए चेतावनी है, जिसने हमें नई चिंताएं बताई हैं। सरकार स्लम-रिडेवलपमेंट पाॅलिसी बनाते समय गंदी बस्तियों में रहने वाले लाेगों की जरूरतें समझे। वह जीवन की गुणवत्ता के स्वीकार्य मानकाें का एक बार फिर परीक्षण करे, क्याेंकि जहां झुग्गियां स्थापित की जाती हैं, वहां ये मानक थम जाते हैं।
मैं जाेर देकर कहना चाहूंगा कि हमें गंदी बस्तियां हटाते समय अफाेर्डेबल हाउसिंग पर जाना चाहिए। आर्किटेक्ट और डेवलपर काे यह जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अब समय आ गया है कि एक जैसे दिमाग वाले लाेग बैठकर उन निर्णयाें की आलाेचना करें, जाे पिछले सालाें में हमने नजरअंदाज कर दिए हैं।
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