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जय सत्य सनातन
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युगाब्द-५१२५*
युगाब्द-५१२५**
विक्रमसंवत-२०८०*
विक्रमसंवत-२०८०**
तिथि - नवमी शाम 05:49 तक तत्पश्चात दशमी*
तिथि - नवमी शाम 05:49 तक तत्पश्चात दशमी**
दिनांक - 04 फरवरी 2024*
दिनांक - 04 फरवरी 2024**
दिन - रविवार*
दिन - रविवार**
अयन - उत्तरायण*
अयन - उत्तरायण**
ऋतु - शिशिर*
ऋतु - शिशिर**
मास - माघ*
मास - माघ**
पक्ष - कृष्ण*
पक्ष - कृष्ण**
नक्षत्र - विशाखा सुबह 07:21 तत्पश्चात अनुराधा*
नक्षत्र - विशाखा सुबह 07:21 तत्पश्चात अनुराधा**
योग - गण्ड वृद्धि दोपहर 12:13 तक तत्पश्चात ध्रुव*
योग - गण्ड वृद्धि दोपहर 12:13 तक तत्पश्चात ध्रुव**
राहु काल - शाम 05:05 से 06:29 तक*
राहु काल - शाम 05:05 से 06:29 तक**
सूर्योदय - 07:18*
सूर्योदय - 07:18**
सूर्यास्त - 06:29*
सूर्यास्त - 06:29**
दिशा शूल - पश्चिम*
दिशा शूल - पश्चिम**
ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:36 से 06:27 तक*
ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:36 से 06:27 तक**
निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:28 से 01:19 तक*
निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:28 से 01:19 तक**
व्रत पर्व विवरण -*
व्रत पर्व विवरण -**
विशेष - नवमी को लौकी खाना त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
विशेष - नवमी को लौकी खाना त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)**
षट्तिला एकादशी : 06 फरवरी 24
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षट्तिला एकादशी : 06 फरवरी 24
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एकादशी 05 फरवरी शाम 05:24 से 06 फरवरी शाम 04:07 तक*
एकादशी 05 फरवरी शाम 05:24 से 06 फरवरी शाम 04:07 तक**
एकादशी व्रत के लाभ
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एकादशी व्रत के लाभ
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एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।*
एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।**
जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।**
जो पुण्य गौ-दान, सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
जो पुण्य गौ-दान, सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।**
एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं । इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं । इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।**
धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।*
धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।**
कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।*
कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।**
परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है । पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ । भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।*
परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है । पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ । भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।**
रविवार विशेष
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रविवार विशेष
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रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)**
रविवार के दिन आँवला, मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)*
रविवार के दिन आँवला, मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)**
रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)*
रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)**
रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है ।*
रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है ।**
स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं ।*
स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं ।**
रविवार के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना एवं पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है ।*
रविवार के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना एवं पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है ।*
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