*
जय सत्य सनातन
*
*
युगाब्द-५१२४*
युगाब्द-५१२४**
विक्रम संवत-२०७९*
विक्रम संवत-२०७९**
तिथि - अष्टमी सुबह 08:31 तक तत्पश्चात नवमी*
तिथि - अष्टमी सुबह 08:31 तक तत्पश्चात नवमी**
दिन - बुधवार*
दिन - बुधवार**
शक संवत - 1944*
शक संवत - 1944**
अयन - उत्तरायण*
अयन - उत्तरायण**
ऋतु - ग्रीष्म*
ऋतु - ग्रीष्म**
मास - ज्येष्ठ*
मास - ज्येष्ठ**
पक्ष - शुक्ल*
पक्ष - शुक्ल**
नक्षत्र - उत्तराफाल्गुनी रात्रि ( 09 जून प्रातः 04:31 ) तक तत्पश्चात हस्त*
नक्षत्र - उत्तराफाल्गुनी रात्रि ( 09 जून प्रातः 04:31 ) तक तत्पश्चात हस्त**
योग - सिद्धि ( 09 जून प्रातः 03:27) तक तत्पश्चात व्यतिपात*
योग - सिद्धि ( 09 जून प्रातः 03:27) तक तत्पश्चात व्यतिपात**
राहुकाल - दोपहर 12:29 से 02:20 तक*
राहुकाल - दोपहर 12:29 से 02:20 तक**
सूर्योदय - 05:53*
सूर्योदय - 05:53**
सूर्यास्त - 07:24*
सूर्यास्त - 07:24**
दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
दिशाशूल - उत्तर दिशा में**
ब्रह्म मुहूर्त- प्रातः 04:29 से 05:11 तक*
ब्रह्म मुहूर्त- प्रातः 04:29 से 05:11 तक**
निशिता मुहूर्त - रात्रि 12.18 से 01:00 तक*
निशिता मुहूर्त - रात्रि 12.18 से 01:00 तक**
व्रत पर्व विवरण-बुधवारी अष्टमी*
व्रत पर्व विवरण-बुधवारी अष्टमी**
विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)**
बुधवारी अष्टमी : 08 जून 2022
*
बुधवारी अष्टमी : 08 जून 2022
**
पूण्य काल : सूर्योदय से सुबह 08:31 तक*
पूण्य काल : सूर्योदय से सुबह 08:31 तक**
बुधवारी अष्टमी को किये गए जप, तप, मौन, दान व ध्यान का फल अक्षय होता है ।*
बुधवारी अष्टमी को किये गए जप, तप, मौन, दान व ध्यान का फल अक्षय होता है ।**
मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं । इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है ।*
मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं । इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है ।**(शिव पुराण, विद्यश्वर संहिताः अध्याय 10)*
*
व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप, पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की, और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है । जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है ।*
व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप, पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की, और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है । जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है ।**
अपाचन हो तो
*
अपाचन हो तो
**
अपाचन बढ़ा तो अजवाइन, सौंठ और काली मिर्च का मिश्रण करके वो पाउडर एक चुटकी ले तो पाचन ठीक होगा...सुबह ले लें और २/३ घंटे बाद भोजन करें...*
अपाचन बढ़ा तो अजवाइन, सौंठ और काली मिर्च का मिश्रण करके वो पाउडर एक चुटकी ले तो पाचन ठीक होगा...सुबह ले लें और २/३ घंटे बाद भोजन करें...*
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें