तुझ से मिलना,
मिल के बिछुड़ना,
तेरे मेरे,
बीच की दूरी,
मज़बूरी या मंजूरी,
हाथ थामना,
साथ निभाना,
फिर यूं अचानक,
अकेला करना,
अपनापन पाने की,
तेरी मेरी,
ख्वाहिश अधूरी,
मज़बूरी या मंजूरी,
विचारो के जब मतभेद पनपते,
एकदूसरे को है हम खटकते,
फिर भी आँखों में,
एक आस भरी,
मज़बूरी या मंजूरी,
तू वह चाहे जो मैं ना चाहूं,
तू ना चाहे जो मैं चाहूं,
जीवन के इस कठिन सफर में,
कैसे होगी चाहत पूरी,
क्या कहूं इसे,
निज स्वार्थ हेतु,
स्वंयनिर्मित संस्कारों की,
मज़बूरी या मंजूरी...?
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