नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार नाराजगी जताने के बावजूद सरकारी अधिकारियों द्वारा अपील दायर करने में विलंब के 38 जिले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह विडंबना ही है कि फाइल दबा कर बैठने वाले अधिकारियों के खिलाफ कभी कोई कार्यवाही नहीं होती। जस्टिस संजय किशन कौल, दिनेश महेश्वरी और ऋषिकेश राय की पीठ ने बांबे हाईकोर्ट के पिछले साल फरवरी के आदेश के खिलाफ उप वन संरक्षक की अपील खारिज करते हुए विलंब से अपील दायर करने के रवैए की निंदा की। पीठ ने न्यायिक समय बर्बाद करने के लिए याचिकाकर्ता पर 15,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में तो अपील 462 दिन की देरी से दायर की गई और इस बार भी इसकी वजह अधिवक्ता बदला जाना बताई गई है। हमने सिर्फ औपचारिकता के लिए इस कोर्ट में आने के लिए बार-बार राज्य सरकारों की इस तरह के प्रयासों की निंदा की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकारी पद अधिकारी इस न्यायालय में विलंब से अपील इस तरह दाखिल करते हैं जैसे कानूनों में निर्धारित समय सीमाओं के लिए नहीं है।
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