नई दिल्ली। केवल विवाह के लिए धर्म परिवर्तन मान्य न होने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार को दायर की गई। याचिका में हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि कोर्ट को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी के मर्जी से धर्मांतरण करने की इजाजत न दें। यह किसी स्त्री या पुरुष के धार्मिक परंपरा के चयन के संविधान प्रदत्त मूलभूत अधिकार का हनन है। उस दंपति अविलंब सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की गई है, जिनकी याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज किया है। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका अलदनिश रिन ने दायर की है। मामले में मुस्लिम महिला ने हिंदू धर्म अपनाकर हिंदू पुरुष से विवाह किया है। हाई कोर्ट ने दंपती की पुलिस सुरक्षा दिलाने की मांग भी अस्वीकार कर दी है। हाई कोर्ट ने दंपती की उस मांग को भी अस्वीकार कर दिया, जिसमें उनके विवाह में महिला के पिता व पुलिस को हस्तक्षेप से रोकने का आदेश देने की प्रार्थना की गई थी। हाई कोर्ट ने यह आदेश 23 सितंबर को दिया था। आदेश में कहा गया है कि सिर्फ विवाह के लिए धर्म परिवर्तन करना जायज नहीं है।
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