चांद बूढ़ा हो गया है, अब नहीं लुभाता। किसी को चांद से देर तक बातें करना गुजरे समय की बात हो गई है। इमारते आसमान से बातें करती हैं। हाल-चाल पूछ लेती हैं। चांद का वह जो चांद के कसीदे पढ़ते थे, उनकी रातें फानूस को घूरते कटती हैं। नई नस्ल का लगाव नहीं, अब चांद से उनके सपने भी हाईटेक हो गए हैं। घर के बुजुर्गों जैसा हो गया है चांद। जैसे झुर्रियां बनकर उसके चेहरे पर उदासी आंखों से ताकता है जमीन पर शायद कभी कोई बच्चा चंदामामा कहकर आवाज लगा दे
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें