महामारी बन चुका कोविड 19 हर रोज़ सैकड़ों की संख्या में लोगों की जान ले रहा है. एक ओर जहां हर रोज़ संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं वहीं कोविड 19 से मरने वालों का अंतिम संस्कार एक चुनौती बनता जा रहा है. कई मामले तो ऐसे भी सामने आए हैं जिसमें अस्पताल में ही संक्रमित शख़्स की मौत हो गई और ना तो उसके रिश्तेदार उसे आख़िरी बार देख पाए और ना मरीज़ ही अंतिम समय में अपनों को देख सका. ऐसे में ये उन रिश्तेदारों के लिए किसी सदमे से कम नहीं होता है कि वो अपने पारिवारिक सदस्य के अंतिम संस्कार में शामिल भी नहीं हो सके.
कोरोना वायरस के संक्रमण से मौत के बाद शव को दफनाया जाए या जलाया जाए पर विवाद है. अब तक मौत के बाद शव को जलाने या दफनाने की प्रक्रिया धर्म के आधार पर होती थी. श्रीलंका में कोरोना वायरस से मौत के बाद एक मुस्लिम व्यक्ति के शव की अंत्येष्टि पर विवाद हुआ है. श्रीलंका के मुस्लिम कांग्रेस नेता रउफ़ हक़ीम ने इस संबंध में फ़ेसबुक पर एक पोस्ट भी लिखी. उन्होंने लिखा कि यह बेहद खेद का विषय है कि उस व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए उसकी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप दफनाने की अनुमति नहीं मिली.
कुछ लोगों का ये भी कहना है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को सिर्फ़ मुस्लिमों के अंतिम संस्कार के तरीक़े को बदलकर फैलने से नहीं रोका जा सकता है. इसके लिए ज़रूरी है कि सभी तरह के धार्मिक आयोजनों, प्रसाद बाँटने की प्रक्रिया और जल छिड़कने और तमाम अनुष्ठानों को बंद कर देना चाहिए.
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