गुरुवार, 14 मई 2020

प्रवासी मजदूर: मुंबई में लोग मदद नहीं करते...

अब चाहे अपने गांव में भूख से मर जाएं लेकिन लौटकर महाराष्ट्र नहीं जाएंगे।


मुंबई में लोग मदद भी नहीं करते। हिंदी में बात करने पर मदद करने वाले भी पीछे हट जाते हैं, यह कहना है रोजाना हजारों की संख्या में मजदूर सड़क पर नजर आ रहे प्रवासी मजदूरो का। न इनके पैरों में चप्पल है और न ही इनके बदन को ढंकने के लिए पूरे कपड़े हैं। चिलचिलाती धूप में पैदल चल रहे मजदूरों के पैर में फफोले दिख रहे हैं। पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ है। हाथों में सामान और सिर पर गठरी रखकर ये लोग चले जा रहे हैं।



देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और वहां के निवासिओं के लिये इससे बुरे शब्द नहीं हो सकते।  बुरी हालत में महाराष्ट्र छोड़कर पैदल ही हज़ारो किलोमीटर का सफर कर उत्तर प्रदेश व बिहार आने वाले मजदूरों ने बताया कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से वे 15 दिन पहले चले थे।  इन प्रवासी मजदूरों के पास न खाने को कुछ था और न पैरों में चप्पल। कई कई दिन से भूखे इन मजदूरों ने रोंगटे खड़े करने वाले शब्दों में बताया कि मुंबई वाले किसी की मदद नहीं करते, उनकी सुध लेने वाला वहां कोई नहीं था।  कई लोगो से मदद मांगी पर किसी ने नहीं की। और अगर उन्हें मालूम चल जाये कि मदद मांगने वाला उप्र या बिहार से है तो वे मदद करना तो दूर बात भी नहीं करते। हिंदी में बात करने पर मदद करने वाले भी पीछे हट जाते हैं। महाराष्ट्र में हुए व्यवहार उनके लिए दुःस्वप्न की तरह था। 



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