चीनी फर्मों द्वारा स्थानीय कंपनियों को जबरन अधिग्रहण से बचाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से बिगबास्केट, पेटीएम, ओला जैसे अन्य टेक स्टार्टअप्स कौलैटरल डैमेज के रूप में उभर सकते हैं।हालांकि अगर इन कंपनियों की फंडिंग रुकी तो कंपनी के अस्तित्व के साथ हजारों रोजगार पर भी असर पड़ सकता है। साथ ही फंडिंग कहीं और से नहीं आई तो बड़ा संकट होगा। जबकि चीन को नुकसान यह है कि अगर कंपनियां डूबी तो उनका निवेश डूब सकता है। कोविड-19 के कारण हाल में भारतीय कंपनियों के मूल्यांकन में काफी गिरावट आई है। कंपनियों को अधिग्रहण से बचाने के लिए भारत सरकार ने एफडीआई नियमों में बदलाव किया है। भारत के इस कदम काे चीनी दूतावास ने डब्ल्यूटीओ यानी विश्व व्यापार संगठन के नियमों के खिलाफ बताया है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें