रविवार, 2 फ़रवरी 2025

महाकुंभ: भगदड़ के दर्द से कराहते लोग, इलाहाबादियों को शर्म न आई; यूं ठगते रहे, "आपदा में अवसर ": मोदी के मन्त्र को सार्थक कर दिया सनातनियो ने

 जिनकी लोग सराहना कर रहे थे, उन्हें आशीष दे रहे थे। मन से दुआ दे रहे थे। इसी बीच 29 जनवरी को शाम से कुछ ऐसे तत्व सक्रिय हुए, जो आपदा में अवसर ढूंढ रहे थे। वह परेशान, हतप्रभ श्रद्धालुओं पर गिद्ध नजरें गड़ाए बैठे थे, कि कैसे उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जाए और कैसे उन्हें लूटा जाए। वह भारत की आत्मा 'अतिथि देवो भव:' के संकल्प को भूल चुके थे। ठीक उसी प्रकार जैसे जब कोरोना महामारी आई तो कुछ पैसों के भेड़िए रेमिडीसिवर और अन्य जरूरी दवाइयों की कालाबाजारी करने में जुट गए थे। उसी प्रकार जब तीर्थराज कहे जाने वाले प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में लोग परेशान हुए, हतप्रभ हुए, अपनों से बिछड़ गए, बेहाल थे, तो कुछ तत्व इन्हें लूटने के लिए सड़कों पर उतरे। इन दृश्यों को देखकर एक बार फिर कोरोना के दौरान के लोगों को लूटे जा रहे दृश्य ताजा हो गए। 

कैमरे में कुछ ऐसे दृश्य कैद हुए, जिन्हें देखकर मानवता शर्मसार हो गई। ऐसा महसूस हुआ कि इन पैसों के भूखे भेड़ियों को वाकई संवेदनाएं मर चुकी हैं। यह सच्चाई हैरान करने वाली थी, लेकिन थी तो सच्चाई ही। भगदड़ के बाद परेशान लोग अपनों को ढूंढ रहे थे। पैदल चलकर थक चुके थे। थकावट की वजह से कई यात्री इस हाल में थे कि एक कदम भी चलना दूभर था। ऐसे में कुछ तत्व उन यात्रियों को बाइक पर उनके गंतव्य स्थान तक छोड़ने की बात कहते। फिर इनसे सौदा तय करते। एक हजार से लेकर दो हजार तक प्रति व्यक्ति उनसे वसूल कर रहे थे। 

चूंकि अधिकतर जगहों पर बाइक जाने की अनुमति नहीं थी, इसके बाद भी यह असामाजिक तत्व लोगों को मौके तक पहुंचाने की बात कहकर पैसे की उगाही कर रहे थे। सौदा तय करने के बाद उन्हें 1-2 किमी तक ले जाकर छोड़ देते और कहते बस आगे ही संगम है, या आगे ही स्टेशन है, या अस्पताल है। यानी जिसको जहां जाना होता था, उनकी मंजिल बताकर रफू चक्कर हो जाते। जब वह परेशान लोग वहां मौजूद लोगों से बात करके अपना पता पूछते, तब उन्हें पता चलता कि वह तो अपनी मंजिल से काफी दूर हैं। वास्तव में इनके साथ ठगी की गई है। 

इस तरह की लूट की घटनाएं जब बढ़ीं तो इसकी शिकायत अधिकारियों से हुई। इसके बाद चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मियों तक यह संदेश आया कि ऐसे लोगों की पहचान करें और कार्रवाई करें। बालशन चौराहे पर तैनात पुलिसकर्मियों ने ऐसे कई बाइक सवारों को पकड़ा जो बाइक पर 2-2, 3-3 सवारियां ढो रहे थे। यहां अचंभित करने वाली बात यह रही कि उन्होंने श्रद्धालुओं से पैसे के साथ एक बात यह भी तय कर ली थी कि कोई पुलिसकर्मी पकड़े और पूछे तो यह बताना कि यह हमें फ्री में छोड़ने जा रहे हैं। यह सेवा कर रहे हैं। पूछताछ में यह बात सामने आई तो लोग इन शातिरों के दिभागी चाल को सोचकर अचंभित रह गए। यानी यह श्रद्धालुओं को ठग भी रहे थे और समाजसेवी भी कहलाना चाहते थे। 


कोई टिप्पणी नहीं:

Xi Jinping in India: Can the Dragon and the Elephant Reset the Relationship?

 Maj. Gen. Rajan Kochhar What Can India Realistically Expect from the Chinese President’s Visit? The forthcoming visit of Chinese President ...