सुप्रीम कोर्ट ने ईशा योग केंद्र को बड़ी राहत देते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निपटारा कर दिया। यह याचिका एक पिता द्वारा दायर की गईं थी, जिसने आरोप लगाया था कि उसकी दो बेटियों को ईशा योग केंद्र में बंधक बनाकर रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की बेटियों के बयान को माना, जिसमें दोनों ने कहा कि वे अपनी इच्छा से आश्रम में रह रही हैं और कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतंत्र हैं। दोनों महिलाओं की उम्र 39 और 42 साल है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दोनों महिलाओं के पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई बंद करने का आदेश दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले का ईशा योग केंद्र के खिलाफ चल रहे अन्य मामलों पर कोई असर नहीं होगा। कोर्ट ने अपने फैसले में ईशा योग केंद्र को सलाह देते हुए कहा कि जब आपके आश्रम में महिलाएं और नाबालिग बच्चे हैं तो आपको आंतरिक शिकायत कमेटी गठित करने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि इस सलाह का उद्देश्य किसी संगठन को बदनाम करना नहीं है बल्कि सिर्फ ये बताना है कि कुछ चीजों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
UGC के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) विनियम, 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट में ...
-
धर्मपरिवर्तन का बनाया दबाव कानपुर में बजरिया निवासी युवक ने धर्म छिपाकर छात्रा से दोस्ती की। फिर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया। इसके बा...
-
ग्रेटर नोएडा। सेक्टर बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने बंद घरों में चोरी करने वाले गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया हैं। इनके पास से सोने के जेवर...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें