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जय सत्य सनातन
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युगाब्द-५१२५*
युगाब्द-५१२५**
विक्रमसंवत-२०८०*
विक्रमसंवत-२०८०**
तिथि - दशमी सुबह 06:30 तक तत्पश्चात एकादशी*
तिथि - दशमी सुबह 06:30 तक तत्पश्चात एकादशी**
दिनांक - 06 मार्च 2024*
दिनांक - 06 मार्च 2024**
दिन - बुधवार*
दिन - बुधवार**
विक्रम संवत् - 2080*
विक्रम संवत् - 2080**
अयन - उत्तरायण*
अयन - उत्तरायण**
ऋतु - वसंत*
ऋतु - वसंत**
मास - फाल्गुन*
मास - फाल्गुन**
पक्ष - कृष्ण*
पक्ष - कृष्ण**
नक्षत्र - पूर्वाषाढ़ा दोपहर 02:52 तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा*
नक्षत्र - पूर्वाषाढ़ा दोपहर 02:52 तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा**
योग - व्यतीपात सुबह 11:33 तक तत्पश्चात वरियान*
योग - व्यतीपात सुबह 11:33 तक तत्पश्चात वरियान**
राहु काल - दोपहर 12:51 से 02:20 तक*
राहु काल - दोपहर 12:51 से 02:20 तक**
सूर्योदय - 06:57*
सूर्योदय - 06:57**
सूर्यास्त - 06:45*
सूर्यास्त - 06:45**
दिशा शूल - उत्तर*
दिशा शूल - उत्तर**
ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:19 से 06:08 तक*
ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:19 से 06:08 तक**
निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:26 से 01:15 तक*
निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:26 से 01:15 तक**
व्रत पर्व विवरण - विजया एकादशी (स्मार्त)*
व्रत पर्व विवरण - विजया एकादशी (स्मार्त)**
विशेष - एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
विशेष - एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)**
विजया एकादशी - 07 मार्च 2024
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विजया एकादशी - 07 मार्च 2024
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एकादशी अवधि : 06 मार्च सुबह 06:30 से 07 मार्च प्रातः 04:13 तक ।*
एकादशी अवधि : 06 मार्च सुबह 06:30 से 07 मार्च प्रातः 04:13 तक ।**
व्रत उपवास 07 मार्च को रखा जयेगा । द्वादशी युक्त एकादशी में व्रत रखने का शास्त्रीय विधान*
व्रत उपवास 07 मार्च को रखा जयेगा । द्वादशी युक्त एकादशी में व्रत रखने का शास्त्रीय विधान**
06 और 07 मार्च दो दिन चावल खाना निषिद्ध हैं ।*
06 और 07 मार्च दो दिन चावल खाना निषिद्ध हैं ।**
महा शिवरात्रि : 08 मार्च 2024
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महा शिवरात्रि : 08 मार्च 2024
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'शिव पुराण' में आता है कि 'महाशिवरात्रि का व्रत करोड़ों हत्याओं के पाप का नाश करनेवाला है ।'*
'शिव पुराण' में आता है कि 'महाशिवरात्रि का व्रत करोड़ों हत्याओं के पाप का नाश करनेवाला है ।'**
हिमालय, सुमेरु अपनी मर्यादा छोड़ दे, समुद्र सूख जाय, कोई और रूप हो जाय या अपनी मर्यादा छोड़ दे... उनका प्रभाव भले ही नष्ट हो जाय... लेकिन महाशिवरात्रि का व्रत-उपवास करनेवाले का पुण्य-प्रभाव नष्ट नहीं हो सकता यह शास्त्र वचन है ।*
हिमालय, सुमेरु अपनी मर्यादा छोड़ दे, समुद्र सूख जाय, कोई और रूप हो जाय या अपनी मर्यादा छोड़ दे... उनका प्रभाव भले ही नष्ट हो जाय... लेकिन महाशिवरात्रि का व्रत-उपवास करनेवाले का पुण्य-प्रभाव नष्ट नहीं हो सकता यह शास्त्र वचन है ।**
महाशिवरात्रि व्रत, रात्रि जागरण, शिव-पूजन - 08 मार्च
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महाशिवरात्रि व्रत, रात्रि जागरण, शिव-पूजन - 08 मार्च
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(निशीथकाल - रात्रि 12:13 से 01:01 तक)*
(निशीथकाल - रात्रि 12:13 से 01:01 तक)**
(प्रहर:- प्रथम - शाम 06:33 से, द्वितीय - रात्रि 09:35 से, तृतीय - मध्यरात्रि 12:37 से, चतुर्थ - 09 मार्च प्रातः 03:39 से)*
(प्रहर:- प्रथम - शाम 06:33 से, द्वितीय - रात्रि 09:35 से, तृतीय - मध्यरात्रि 12:37 से, चतुर्थ - 09 मार्च प्रातः 03:39 से)**
(पारणा : 09 मार्च सूर्योदय के बाद) ।*
(पारणा : 09 मार्च सूर्योदय के बाद) ।**
शिवरात्रि पर स्वास्थ्य-लाभ
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शिवरात्रि पर स्वास्थ्य-लाभ
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'बं' शिवजी का बीजमंत्र है । जिनको भी गठिया या वायुसंबंधी तकलीफ हो, वे शिवरात्रि पर 'ॐ बं बं...' का सवा लाख जप करें । वायुसंबंधी ८० प्रकार की तकलीफों से छुट्टी मिल जायेगी ।*
'बं' शिवजी का बीजमंत्र है । जिनको भी गठिया या वायुसंबंधी तकलीफ हो, वे शिवरात्रि पर 'ॐ बं बं...' का सवा लाख जप करें । वायुसंबंधी ८० प्रकार की तकलीफों से छुट्टी मिल जायेगी ।**
जिनको वायुसंबंधी तकलीफ हो वे एक लीटर पानी में एक काली मिर्च और तीन बेल-पत्ते मसल के डालकर उसे पौना लीटर होने तक उबालें । वह पानी पीनेलायक ठंडा हो जाय तो दिन में वही पियें । इससे भी वायुसंबंधी तकलीफें कम हो जायेंगी ।*
जिनको वायुसंबंधी तकलीफ हो वे एक लीटर पानी में एक काली मिर्च और तीन बेल-पत्ते मसल के डालकर उसे पौना लीटर होने तक उबालें । वह पानी पीनेलायक ठंडा हो जाय तो दिन में वही पियें । इससे भी वायुसंबंधी तकलीफें कम हो जायेंगी ।**
एकादशी में क्या करें, क्या न करें ?
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एकादशी में क्या करें, क्या न करें ?
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1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें ।*
1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें ।**
2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें ।*
2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें ।**
हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।**राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।*
*सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।*
*एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
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3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए ।*
3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए ।**
4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें ।*
4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें ।**
5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है ।*
5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है ।**
6. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) - इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर,उड़द,चने,कोदो (एक प्रकार का धान), शाक,शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) - इनका सेवन न करें ।*
6. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) - इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर,उड़द,चने,कोदो (एक प्रकार का धान), शाक,शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) - इनका सेवन न करें ।*
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