बुधवार, 6 मार्च 2024

*🚩 श्री शारदा सर्वज्ञ पीठम 🚩*

*🚩जय सत्य सनातन🚩*


*🌥️ 🚩युगाब्द-५१२५*
*🌥️ 🚩विक्रमसंवत-२०८०*
*⛅ 🚩तिथि - दशमी सुबह 06:30 तक तत्पश्चात एकादशी*
*⛅दिनांक - 06 मार्च 2024*
*⛅दिन - बुधवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2080*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - वसंत*
*⛅मास - फाल्गुन*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅नक्षत्र - पूर्वाषाढ़ा दोपहर 02:52 तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा*
*⛅योग - व्यतीपात सुबह 11:33 तक तत्पश्चात वरियान*
*⛅राहु काल - दोपहर 12:51 से 02:20 तक*
*⛅सूर्योदय - 06:57*
*⛅सूर्यास्त - 06:45*
*⛅दिशा शूल - उत्तर*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:19 से 06:08 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:26 से 01:15 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण - विजया एकादशी (स्मार्त)*
*⛅विशेष -  एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

*🌹विजया एकादशी - 07 मार्च 2024🌹*
*🔸एकादशी अवधि : 06 मार्च सुबह 06:30 से 07 मार्च प्रातः 04:13 तक ।*
*🔸व्रत उपवास 07 मार्च को रखा जयेगा । द्वादशी युक्त एकादशी में व्रत रखने का शास्त्रीय विधान*
*🔹06 और 07 मार्च दो दिन चावल खाना निषिद्ध हैं ।*

*🌹महा शिवरात्रि : 08 मार्च 2024🌹*
*🌹'शिव पुराण' में आता है कि 'महाशिवरात्रि का व्रत करोड़ों हत्याओं के पाप का नाश करनेवाला है ।'*
*🌹हिमालय, सुमेरु अपनी मर्यादा छोड़ दे, समुद्र सूख जाय, कोई और रूप हो जाय या अपनी मर्यादा छोड़ दे... उनका प्रभाव भले ही नष्ट हो जाय... लेकिन महाशिवरात्रि का व्रत-उपवास करनेवाले का पुण्य-प्रभाव नष्ट नहीं हो सकता यह शास्त्र वचन है ।*

*🌹महाशिवरात्रि व्रत, रात्रि जागरण, शिव-पूजन - 08 मार्च🌹*

*🔸(निशीथकाल - रात्रि 12:13 से 01:01 तक)*
*🔸(प्रहर:- प्रथम - शाम 06:33 से, द्वितीय - रात्रि 09:35 से, तृतीय - मध्यरात्रि 12:37 से, चतुर्थ - 09 मार्च प्रातः 03:39 से)*

*🔸 (पारणा : 09 मार्च सूर्योदय के बाद) ।*

*🔹शिवरात्रि पर स्वास्थ्य-लाभ🔹*
*🔸'बं' शिवजी का बीजमंत्र है । जिनको भी गठिया या वायुसंबंधी तकलीफ हो, वे शिवरात्रि पर 'ॐ बं बं...' का सवा लाख जप करें । वायुसंबंधी ८० प्रकार की तकलीफों से छुट्टी मिल जायेगी ।*
*🔸जिनको वायुसंबंधी तकलीफ हो वे एक लीटर पानी में एक काली मिर्च और तीन बेल-पत्ते मसल के डालकर उसे पौना लीटर होने तक उबालें । वह पानी पीनेलायक ठंडा हो जाय तो दिन में वही पियें । इससे भी वायुसंबंधी तकलीफें कम हो जायेंगी ।*

*🔹एकादशी में क्या करें, क्या न करें ?🔹*

*🌹1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें ।*

*🌹2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें ।*

*🌹हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
*राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।*
*सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।*
*एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
*🌹3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए ।*
*🌹4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें ।*
*🌹5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है ।*

*🌹6. व्रत के (दशमी,  एकादशी और द्वादशी) - इन तीन दिनों  में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर,उड़द,चने,कोदो (एक प्रकार का धान), शाक,शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) - इनका सेवन न करें ।*🕉️

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