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जय सत्य सनातन
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युगाब्द-५१२५*
युगाब्द-५१२५**
विक्रमसंवत-२०८०*
विक्रमसंवत-२०८०**
तिथि - षष्ठी दोपहर 02:03 तक तत्पश्चात सप्तमी*
तिथि - षष्ठी दोपहर 02:03 तक तत्पश्चात सप्तमी**
दिनांक - 01 फरवरी 2024*
दिनांक - 01 फरवरी 2024**
दिन - गुरूवार*
दिन - गुरूवार**
अयन - उत्तरायण*
अयन - उत्तरायण**
ऋतु - शिशिर*
ऋतु - शिशिर**
मास - माघ*
मास - माघ**
पक्ष - कृष्ण*
पक्ष - कृष्ण**
नक्षत्र - चित्रा 02 फरवरी प्रातः 03:49 तक तत्पश्चात स्वाती*
नक्षत्र - चित्रा 02 फरवरी प्रातः 03:49 तक तत्पश्चात स्वाती**
योग - धृति दोपहर 12:28 तक तत्पश्चात शूल*
योग - धृति दोपहर 12:28 तक तत्पश्चात शूल**
राहु काल - दोपहर 02:17 से 03:40 तक*
राहु काल - दोपहर 02:17 से 03:40 तक**
सूर्योदय - 07:20*
सूर्योदय - 07:20**
सूर्यास्त - 06:27*
सूर्यास्त - 06:27**
दिशा शूल - दक्षिण*
दिशा शूल - दक्षिण**
ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:37 से 06:28 तक*
ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:37 से 06:28 तक**
निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:27 से 01:19 तक*
निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:27 से 01:19 तक**
व्रत पर्व विवरण -*
व्रत पर्व विवरण -**
विशेष - नीम का फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है । सप्तमी को ताड़ का फल खाया जाय तो वह रोग बढ़ानेवाला तथा शरीर का नाशक होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
विशेष - नीम का फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है । सप्तमी को ताड़ का फल खाया जाय तो वह रोग बढ़ानेवाला तथा शरीर का नाशक होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)**
फरवरी मास की योगों व तिथियाँ
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फरवरी मास की योगों व तिथियाँ
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२ फरवरी : स्वामी विवेकानंद जयंती (ति. अ), स्वामी रामानंदाचार्य जयंती*
२ फरवरी : स्वामी विवेकानंद जयंती (ति. अ), स्वामी रामानंदाचार्य जयंती**
६ फरवरी : षट्तिला एकादशी (इस दिन स्नान, उबटन, जलपान, भोजन, दान व होम में तिल का उपयोग पापों का नाश करता है ।)*
६ फरवरी : षट्तिला एकादशी (इस दिन स्नान, उबटन, जलपान, भोजन, दान व होम में तिल का उपयोग पापों का नाश करता है ।)**
७ फरवरी : प्रदोष व्रत*
७ फरवरी : प्रदोष व्रत**
८ फरवरी : मासिक शिवरात्रि, व्यतीपात योग (रात्रि ११:१० से ९ फरवरी रात्रि ७:०७ तक)*
८ फरवरी : मासिक शिवरात्रि, व्यतीपात योग (रात्रि ११:१० से ९ फरवरी रात्रि ७:०७ तक)**
९ फरवरी : माघ अमावस्या, मौनी-त्रिवेणी अमावस्या*
९ फरवरी : माघ अमावस्या, मौनी-त्रिवेणी अमावस्या**
१० फरवरी : पंचक आरम्भ ( सुबह १०:०२)*
१० फरवरी : पंचक आरम्भ ( सुबह १०:०२)**
११ फरवरी : चन्द्र दर्शन (शाम ६::२० से ०७:५५ तक)*
११ फरवरी : चन्द्र दर्शन (शाम ६::२० से ०७:५५ तक)**
१२ फरवरी : तीलकुन्द चतुर्थी*
१२ फरवरी : तीलकुन्द चतुर्थी**
१३ फरवरी : मंगलवारी चतुर्थी (सूर्योदय से दोपहर २-४१ तक), विष्णुपदी संक्रांति (पुण्यकाल : सुबह ९-५१ से दोपहर ३-५४ तक) (इस दिन किये गये ध्यान, जप व पुण्यकर्म का फल लाख गुना होता है । - पद्म पुराण)*
१३ फरवरी : मंगलवारी चतुर्थी (सूर्योदय से दोपहर २-४१ तक), विष्णुपदी संक्रांति (पुण्यकाल : सुबह ९-५१ से दोपहर ३-५४ तक) (इस दिन किये गये ध्यान, जप व पुण्यकर्म का फल लाख गुना होता है । - पद्म पुराण)**
१४ फरवरी : मातृपितृ पूजन दिवस, वसंत पंचमी (इस दिन सारस्वत्य मंत्र का अधिक-से-अधिक जप करना चाहिए ।)*
१४ फरवरी : मातृपितृ पूजन दिवस, वसंत पंचमी (इस दिन सारस्वत्य मंत्र का अधिक-से-अधिक जप करना चाहिए ।)**
१६ फरवरी : माघ शुक्ल सप्तमी (इस दिन प्रातः पुण्यस्नान, व्रत करके गुरु का पूजन करनेवाला सम्पूर्ण माघ मास के स्नान का फल व वर्षभर के रविवार व्रत का पुण्य पा लेता है । यह सम्पूर्ण पापों को हरनेवाली व सुख-सौभाग्य की वृद्धि करनेवाली है ।)*
१६ फरवरी : माघ शुक्ल सप्तमी (इस दिन प्रातः पुण्यस्नान, व्रत करके गुरु का पूजन करनेवाला सम्पूर्ण माघ मास के स्नान का फल व वर्षभर के रविवार व्रत का पुण्य पा लेता है । यह सम्पूर्ण पापों को हरनेवाली व सुख-सौभाग्य की वृद्धि करनेवाली है ।)**
१९ फरवरी : छत्रपति शिवाजी महाराज जयन्ती (दि. अ), भक्त पुंडलिक उत्सव (पंढरपुर), वसंत ऋतु प्रारम्भ*
१९ फरवरी : छत्रपति शिवाजी महाराज जयन्ती (दि. अ), भक्त पुंडलिक उत्सव (पंढरपुर), वसंत ऋतु प्रारम्भ**
२० फरवरी : जया एकादशी*
२० फरवरी : जया एकादशी**
२१ फरवरी : श्री वराह द्वादशी, श्री भीष्म द्वादशी, प्रदोष व्रत*
२१ फरवरी : श्री वराह द्वादशी, श्री भीष्म द्वादशी, प्रदोष व्रत**
२२ फरवरी : माघ शुक्ल त्रयोदशी (इस दिन से माघी पूर्णिमा (२४ फरवरी) तक प्रातः पुण्यस्नान तथा दान, व्रतादि पुण्यकर्म करने से सम्पूर्ण माघ- स्नान का फल मिलता है । - पद्म पुराण), गुरुपुष्यामृत योग (सूर्योदय से शाम ४-४३ तक)*
२२ फरवरी : माघ शुक्ल त्रयोदशी (इस दिन से माघी पूर्णिमा (२४ फरवरी) तक प्रातः पुण्यस्नान तथा दान, व्रतादि पुण्यकर्म करने से सम्पूर्ण माघ- स्नान का फल मिलता है । - पद्म पुराण), गुरुपुष्यामृत योग (सूर्योदय से शाम ४-४३ तक)**
२४ फरवरी : माघी पूर्णिमा, माघ स्नान समाप्त, संत रविदास जयंती*
२४ फरवरी : माघी पूर्णिमा, माघ स्नान समाप्त, संत रविदास जयंती**
२८ फरवरी : संकष्ट चतुर्थी (चंद्रोदय : रात्रि ९-४२), राष्ट्रीय विज्ञान दिवस*
२८ फरवरी : संकष्ट चतुर्थी (चंद्रोदय : रात्रि ९-४२), राष्ट्रीय विज्ञान दिवस**
गुरुवार विशेष
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गुरुवार विशेष
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हर गुरुवार को तुलसी के पौधे में शुद्ध कच्चा दूध गाय का थोड़ा-सा ही डाले तो, उस घर में लक्ष्मी स्थायी होती है और गुरूवार को व्रत उपवास करके गुरु की पूजा करने वाले के दिल में गुरु की भक्ति स्थायी हो जाती है ।*
हर गुरुवार को तुलसी के पौधे में शुद्ध कच्चा दूध गाय का थोड़ा-सा ही डाले तो, उस घर में लक्ष्मी स्थायी होती है और गुरूवार को व्रत उपवास करके गुरु की पूजा करने वाले के दिल में गुरु की भक्ति स्थायी हो जाती है ।**
गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति के प्रतीक आम के पेड़ की निम्न प्रकार से पूजा करें :*
गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति के प्रतीक आम के पेड़ की निम्न प्रकार से पूजा करें :**
एक लोटा जल लेकर उसमें चने की दाल, गुड़, कुमकुम, हल्दी व चावल डालकर निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए आम के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं ।*
एक लोटा जल लेकर उसमें चने की दाल, गुड़, कुमकुम, हल्दी व चावल डालकर निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए आम के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं ।* *ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः ।*
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फिर उपरोक्त मंत्र बोलते हुए आम के वृक्ष की पांच परिक्रमा करें और गुरुभक्ति, गुरुप्रीति बढ़े ऐसी प्रार्थना करें । थोड़ा सा गुड़ या बेसन की मिठाई चींटियों को डाल दें ।*
फिर उपरोक्त मंत्र बोलते हुए आम के वृक्ष की पांच परिक्रमा करें और गुरुभक्ति, गुरुप्रीति बढ़े ऐसी प्रार्थना करें । थोड़ा सा गुड़ या बेसन की मिठाई चींटियों को डाल दें ।**
गुरुवार को बाल कटवाने से लक्ष्मी और मान की हानि होती है ।*
गुरुवार को बाल कटवाने से लक्ष्मी और मान की हानि होती है ।* *
गुरुवार के दिन तेल मालिश हानि करती है । यदि निषिद्ध दिनों में मालिश करनी ही है तो ऋषियों ने उसकी भी व्यवस्था दी है । तेल में दूर्वा डाल के मालिश करें तो वह दोष चला जायेगा ।*
गुरुवार के दिन तेल मालिश हानि करती है । यदि निषिद्ध दिनों में मालिश करनी ही है तो ऋषियों ने उसकी भी व्यवस्था दी है । तेल में दूर्वा डाल के मालिश करें तो वह दोष चला जायेगा ।*
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