🚩जय सत्य सनातन🚩
🌥️ 🚩युगाब्द-५१२४
🌥️ 🚩विक्रम संवत-२०७९
⛅ 🚩तिथि - प्रतिपदा सुबह 10:49 तक तत्पश्चात द्वितीया
⛅दिनांक 30 जून 2022
⛅दिन - गुरुवार
⛅शक संवत - 1944
⛅अयन - दक्षिणायन
⛅ऋतु - वर्षा
⛅मास - आषाढ़
⛅पक्ष - शुक्ल
⛅नक्षत्र - पुनर्वसु रात्रि 01:07 तक तत्पश्चात पुष्य
⛅योग - ध्रुव सुबह 09:52 तक तत्पश्चात व्याघात
⛅राहु काल - अपरान्ह 02:25 से 04:06 तक
⛅सूर्योदय - 05:57
⛅सूर्यास्त - 07:29
⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में
⛅ब्रह्म मुहूर्त - प्रातः 04:34 से 05:15 तक
⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:23 से 01:04 तक
⛅व्रत पर्व विवरण - गुरुपुष्यामृत योग, आषाढ़ नवरात्रि प्रारम्भ
⛅ विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🌹30 जून 2022 : गुरुपुष्यामृत योग
पुण्य काल - 30 जून रात्रि 01:07 से 01 जुलाई सूर्योदय तक
🌹गुरुपुष्यामृत योग सर्वसिद्धिकर है ।
🌹पुष्टिप्रदायक पुष्य नक्षत्र का वारों में श्रेष्ठ बृहस्पतिवार (गुरुवार) से योग होने पर वह अति दुर्लभ ‘गुरुपुष्यामृत योग" कहलाता है ।
🌹गुरुपुष्यामृत योग व्यापारिक कार्यों के लिए तो विशेष लाभदायी माना गया है ।
🌹गुरुपुष्यामृत योग में किया गया जप, ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है ।
🌹गुरुपुष्यामृत योग में विद्या एवं आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना शुभ होता है ।
🌹गुरुपुष्यामृत योग में कोई धार्मिक अनुष्ठान प्रारम्भ करना शुभ होता है।
🌹गुरुपुष्यामृत योग में विवाह व उससे संबंधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित है ।
🌹आषाढ़ नवरात्रि (गुप्त नवरात्रि) 🌹
30 जून से 8 जुलाई 2022 तक
🌹हिंदू धर्म के अनुसार, एक साल में चार नवरात्रि होती है, लेकिन आम लोग केवल दो नवरात्रि (चैत्र व शारदीय नवरात्रि) के बारे में ही जानते हैं । इनके अलावा आषाढ़ तथा माघ मास में भी नवरात्रि का पर्व आता है, जिसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं ।
🔹शत्रु को मित्र बनाने के लिए🔹
🔹नवरात्रि में शुभ संकल्पों को पोषित करने, रक्षित करने, मनोवांछित सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए और शत्रुओं को मित्र बनाने वाले मंत्र की सिद्धि का योग होता है।
नवरात्रि में स्नानादि से निवृत हो तिलक लगाके एवं दीपक जलाकर 'अं रां अं' मंत्र की इक्कीस माला जप करें एवं 'श्री गुरुगीता' का पाठ करें तो शत्रु भी उसके मित्र बन जायेंगे ।
🔹माताओं बहनों के लिए विशेष कष्ट निवारण हेतु प्रयोग -१
🔹जिन माताओं बहनों को दुःख और कष्ट ज्यादा सताते हैं, वे नवरात्रि के प्रथम दिन (देवी-स्थापना के दिन) दिया जलायें और कुम-कुम से अशोक वृक्ष की पूजा करें, पूजा करते समय निम्न मंत्र बोलें :
“ अशोक शोक शमनो भव सर्वत्र नः कुले "
भविष्योत्तर पुराण के अनुसार नवरात्रि के प्रथम दिन इस तरह पूजा करने से माताओ बहनों के कष्टों का जल्दी निवारण होता है ।
🔹माताओं बहनों के लिए विशेष कष्ट निवारण हेतु प्रयोग - २
🔹शुक्ल पक्ष तृतीया (02 जुलाई, शनिवार) के दिन में सिर्फ बिना नमक मिर्च का भोजन करें । (जैसे दूध, रोटी या खीर खा सकते हैं, नमक मिर्च का भोजन अगले दिन ही करें ।)
" ॐ ह्रीं गौरये नमः "
🔹मंत्र का जप करते हुए उत्तर दिशा की ओर मुख करके स्वयं को कुम-कुम का तिलक करें ।
🔹गाय को चन्दन का तिलक करके गुड़ और रोटी खिलाएं l
🔹श्रेष्ठ अर्थ (धन) की प्राप्ति हेतु🔹
🔹प्रयोग : नवरात्रि में देवी के एक विशेष मंत्र का जप करने से श्रेष्ठ अर्थ कि प्राप्ति होती है । मंत्र ध्यान से पढ़ें :
" ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्ये स्वाहा "
🔹विद्यार्थियों के लिए🔹
🔹प्रथम नवरात्रि के दिन विद्यार्थी अपनी पुस्तकों को ईशान कोण में रख कर पूजन करें और नवरात्रि के तीसरे तीन ( 6 जुलाई से 8 जुलाई ) दिन विद्यार्थी सारस्वत्य मंत्र का जप करें ।
इससे उन्हें विद्या प्राप्ति में अपार सफलता मिलती है l
👉 बुद्धि व ज्ञान का विकास करना हो तो सूर्यदेवता का भ्रूमध्य में ध्यान करें ।
👉जिनको गुरुमंत्र मिला है वे गुरुमंत्र का, गुरुदेव का, सूर्यनारायण का ध्यान करें । अतः इस सरल मंत्र की एक-दो माला नवरात्रि में अवश्य करें और लाभ लें ।
–(वेद-व्यास जी , देवी भागवत)
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