बुधवार, 1 जून 2022

उत्तर प्रदेश: ढूंढ़ने से भी नहीं मिल रहे कांग्रेसी कार्यकर्ता

पदाधिकारी भी मीटिंग में नहीं  रहे 

प्रदेश स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर पर सन्नाटा 

उत्तर प्रदेश। हाल ही में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जुझारू, प्रतिभावान नित नए प्रयोग करने वाली कांग्रेस महासचिव के नेतृत्व में जिस प्रकार 403 सीटों में से केवल 2 सीटों पर जीत दिलाकर पार्टी की फजीहत कराई है उसे देखकर सभी सकते में है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस में कार्यकर्ताओं को लगने लगा है कि पार्टी में सब कुछ खत्म हो गया है। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर के सभी पदाधिकारी इस आशातीत हार को लेकर अचंभित नहीं है। कांग्रेस कार्यकर्ता ने चुनावों से पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि कांग्रेस से 2 सीट ही जीत पाएंगी शायद उन्हें अपनी महासचिव की प्रतिभा का पहले से ही भान हो गया था

इससे पहले कांग्रेस के युवराज 2019 में लोकसभा चुनावों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। भाजपा के स्टार प्रचारक और उनके रहते भाजपा हमेशा केंद्र की सत्ता में बरकरार रहेगी। 300 से ज्यादा सीटों पर अपनी जमानत जब्त करवाने वाले प्रत्याशी अब कांग्रेसी नेतृत्व को जमकर कोस रहे हैं, कि पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश में पूरी तरह से पार्टी का नाश कर दिया है, छोटे से छोटा कार्यकर्ता खुलकर कहने के लिए मजबूर मजबूर है कि पार्टी में जब तक मौजूदा नेतृत्व है तब तक कुछ भी नहीं हो सकेगा

कांग्रेस के पदाधिकारी महसूस करने लगे हैं कि पार्टी के इस होनहार नेतृत्व की वजह से उनका 'करियर' तबाह हो रहा है उनका इशारा सीधा नेतृत्व के अल्प ज्ञान की ओर  है और अब वह इसलिए पार्टी द्वारा आयोजित किसी भी कार्यक्रम में हिस्सा लेने से बच रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओ की संख्या नगण्य ही दिखाई दे रही है, जिस वजह से ब्लॉक अध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष काफी मायूस है उनका कहना है कि कई कई बार संदेश भेजने और फोन करने के बाद भी पदाधिकारी कार्यक्रमों में नहीं रहे हैं

लगभग 35 वर्षों से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं बनी है, लेकिन इतनी बुरी हालत कांग्रेस की कभी नहीं रहीकांग्रेस में प्रदेश स्तर के नेता जैसे जगदंबिका पाल, रीता बहुगुणा जोशी, आरपीएन सिंह, जितेंद्र प्रसाद, अमेठी के राजा संजय सिंह सहित तमाम वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने कांग्रेस छोड़ दी है, जिसका पार्टी पर व्यापक असर पड़ा है। इन सभी ने खुश होकर नहीं बल्कि राहुल प्रियंका गांधी की कार्यशैली के कारण कांग्रेस छोड़ी है। इसके अलावा हर जिले से पुराने जमीन से जुड़े हुए सैकड़ों नेता भी कांग्रेस छोड़ चुके हैं। गौरतलब है कि अभी काफी बड़ी संख्या में बचे कुचे कांग्रेसी कार्यकर्ता भी कांग्रेस छोड़ने का मन बना चुके हैं। आने वाले वक्त में केवल तीन ही लोग कांग्रेस में बचेंगे और मोदी का कथन 'कांग्रेस मुक्त' भारत सच होता दिखाई दे रहा है 

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