रविवार, 6 फ़रवरी 2022

*🚩श्री शारदा सर्वज्ञ पीठम🚩*

 *🚩जय सत्य सनातन🚩*

 

🌥️ *🚩युगाब्द-५१२३

🌥️ *🚩विक्रम संवत-२०७८*

⛅ *🚩तिथि - षष्ठी ०७ फरवरी प्रातः ०४:३७ तक तत्पश्चात सप्तमी*

⛅ *दिनांक - ०६ फरवरी २०२२*

⛅ *दिन - रविवार*

⛅ *शक संवत -१९४३*

⛅ *अयन - उत्तरायण*

⛅ *ऋतु - शिशिर

⛅ *मास - माघ*

⛅ *पक्ष - शुक्ल

⛅ *नक्षत्र - रेवती शाम ०५:१० तक तत्पश्चात अश्विनी*

⛅ *योग - साध्य शाम ०४:५४ तक तत्पश्चात शुभ*

⛅  *राहुकाल - शाम ०५:०७ से शाम ०८:३२ तक*

⛅ *सूर्योदय - ०७:१५*

⛅ *सूर्यास्त - १८:३०*

⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में*

⛅ *व्रत पर्व विवरण - शीतला षष्ठी (बंगाल)* 

💥 *विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः २७-२९-३४)*

 

🌷 *माघ शुक्ल सप्तमी* 🌷

  *07 फरवरी 2022 सोमवार को माघ शुक्ल सप्तमी है *

🚩 *माघ शुक्ल सप्तमी को अचला सप्तमी, रथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी, भानु सप्तमी, अर्क सप्तमी आदि अनेक नामों से सम्बोधित किया गया है और इसे सूर्य की उपासना के लिए बहुत ही सुन्दर दिन कहा गया है। पुत्र प्राप्ति, पुत्र रक्षा तथा पुत्र अभ्युदय के लिए इस दिन संतान सप्तमी का व्रत भी किया जाता है।*

🚩 *स्कन्द पुराण के अनुसार*

*यस्यां तिथौ रथं पूर्वं प्राप देवो दिवाकरः॥सा तिथिः कथिता विप्रैर्माघे या रथसप्तमी॥ .१२९ *

*तस्यां दत्तं हुतं चेष्टं सर्वमेवाक्षयं मतम्॥ सर्वदारिद्र्यशमनं भास्करप्रीतये मतम्॥ .१३० *

🚩 *भगवान सूर्य जिस तिथि को पहले-पहल रथ पर आरूढ़ हुए, वह ब्राह्मणों द्वारा माघ मास की सप्तमी बताई गयी है, जिसे रथसप्तमी कहते हैं। उस तिथि को दिया हुआ दान और किया हुआ यज्ञ सब अक्षय माना जाता है। वह सब प्रकार की दरिद्रता को दूर करने वाला और भगवान सूर्य की प्रसन्नता का साधन बताया गया है।*

🚩 *भविष्य पुराण के अनुसार सप्तमी तिथि को भगवान् सूर्य का आविर्भाव हुआ था | ये अंड के साथ उत्पन्न हुए और अंड में रहते हुए ही उन्होंने वृद्धि प्राप्त कि | बहुत दिनोंतक अंड में रहने के कारण येमार्तण्डके नामसे प्रसिद्ध हुए |*

🚩 *भविष्य पुराण के अनुसार ही सूर्य को अपनी भार्या उत्तरकुरु में सप्तमी तिथि के दिन प्राप्त हुई, उन्हें दिव्य रूप सप्तमी तिथि को ही मिला तथा संताने भी इसी तिथि को प्राप्त हुई, अत: सप्तमी तिथि भगवान् सूर्य को अतिशय प्रिय हैं |*

🚩 *भविष्य पुराण : श्रीकृष्ण उवाच शुक्लपक्षे तु सप्तम्यां यदादित्यदिनं भवेत् सप्तमी विजया नाम तव्र दत्तं महाफलम् *

*स्त्रांन दानं जपो होम उपवासस्तथैव सर्वें विजयसप्तम्पां महापातकनाशनम् *   

*प्रदक्षिणां यः कुरुते फलैः पुष्पौर्दिवाकरम् सर्वगुणसंपन्नं पुव्रं प्राप्नोत्यनुत्तमम *   

🚩 *भगवान श्रकृष्ण कहते हैराजन! शुक्ल पक्षकी सप्तमी तिथि को यदि आदित्यवार (रविवार) हो तो उसे विजय सप्तमी कहते है. वह सभी पापोका विनाश करने वाली है .उस दिन किया हुआ स्नान ,दान्, जप, होम तथा उपवास आदि कर्म अनन्त फलदायक होता है. जो उस दिन फल् पुष्प आदि लेकर भगवान सूर्यकी प्रदक्षिणा करता है। वह सर्व गुण सम्पन्न उत्तम पुत्र को प्राप्त करता है।

🚩 *नारद पुराण में माघ शुक्ल सप्तमी कोअचला व्रतबताया गया है। यहत्रिलोचन जयन्तीहै।  इसी को रथसप्तमी कहते हैं। यहीभास्कर सप्तमीभी कहलाती है, जो करोङों सूर्य-ग्रहणों के समान है। इसमें अरूणोदय के समय स्नान किया जाता है। आक और बेर के सात-सात पत्ते सिर पर रखकर स्नान करना चाहिए। इससे सात जन्मों के पापों का नाश होता है। इसी सप्तमी को ‘’पुत्रदायकव्रत भी बताया गया है। स्वयं भगवान सूर्य ने कहा है - ‘जो माघ शुक्ल सप्तमी को विधिपूर्वक मेरी पूजा करेगा, उसपर अधिक संतुष्ट होकर मैं अपने अंश से उसका पुत्र होऊंगा इसलिये उस दिन इन्द्रियसंयमपूर्वक दिन-रात उपवास करे और दूसरे दिन होम करके ब्राह्मणों को दही, भात, दूध और खीर आदि भोजन करावें।*

🚩 *अग्नि पुराण में अग्निदेव कहते हैंमाघ मासके शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथिको (अष्टदल अथवा द्वादशदल) कमल का निर्माण करके उसमें भगवान् सूर्यका पूजन करना चाहिये | इससे मनुष्य शोकरहित हो जाता है |*

🚩 *चंद्रिका में लिखा हैसूर्यग्रहणतुल्या हि शुक्ला माघस्य सप्तमी। अरुणोदगयवेलायां तस्यां स्नानं महाफलम्॥”*

*अर्थात माघ शुक्ल सप्तमी सूर्यग्रहण के तुल्य होती है सूर्योदय के समय इसमें स्नान का महाफल होता है *

🚩 *नारद पुराण के अनुसार* *“अरुणोदयवालायां शुक्ला माघस्य सप्तमी प्रयागे यदि लभ्येत सहस्रार्कग्रहैः समा॥* *अयने कोटिपुण्यं स्याल्लक्षं तु विषुवे फलम् ॥११२॥”*

🚩 *चंद्रिका में भी विष्णु ने लिखा हैअरुणोदयवेलायां शुक्ला माघस्य सप्तमी प्रयागे यदि लभ्येत कोटिसूर्यग्रहैः समा”*

*अर्थात माघ शुक्ल सप्तमी यदि अरुणोदय के समय प्रयाग में प्राप्त हो जाए तो कोटि सूर्य ग्रहणों के तुल्य होती है *

🕉️ *मदनरत्न में भविष्योत्तर पुराण का कथन है कीमाघे मासि सिते पक्षे सप्तमी कोटिभास्करा। दद्यात् स्नानार्घदानाभ्यामायुरारोग्यसम्पदः॥”*

*अर्थात माघ मास की शुक्लपक्ष सप्तमी कोटि सूर्यों के बराबर है उसमें सूर्य स्नान दान अर्घ्य से आयु आरोग्य संपन्न करते हैं *

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