🚩जय सत्य सनातन🚩
🌥️ 🚩युगाब्द-५१२३
🌥️ 🚩सप्तर्षि संवत--५०९७--🚩विक्रम संवत-२०७८
⛅ 🚩तिथि - पंचमी सुबह 11:34 तक तत्पश्चात षष्ठी
⛅ दिनांक 17 मई 2021
⛅ दिन - सोमवार
⛅ शक संवत - 1943
⛅ अयन - उत्तरायण
⛅ ऋतु - ग्रीष्म
⛅ मास - वैशाख
⛅ पक्ष - शुक्ल
⛅ नक्षत्र - पुनर्वसु रात्रि 01:22 तक तत्पश्चात पुष्य
⛅ योग - गण्ड 18 मई रात्रि 02:50 तक तत्पश्चात वृद्धि
⛅ राहुकाल - सुबह 07:39 से सुबह 09:18 तक
⛅ सूर्योदय - 06:01
⛅ सूर्यास्त - 19:09
⛅ दिशाशूल - पूर्व दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण -
💥 विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🌷 पापनाशिनी, पुण्यप्रदायिनी गंगा 🌷
➡ 18 मई 2021 मंगलवार को श्री गंगा सप्तमी (गंगा जयंती) है ।
🚩 जैसे मंत्रों में ॐकार, स्त्रियों में गौरीदेवी, तत्त्वों में गुरुतत्त्व और विद्याओं में आत्मविद्या उत्तम है, उसी प्रकार सम्पूर्ण तीर्थों में गंगातीर्थ विशेष माना गया है। गंगाजी की वंदना करते हुए कहा गया हैः
🌷 संसारविषनाशिन्यै जीवनायै नमोऽस्तु ते।
तापत्रितयसंहन्त्र्यै प्राणेश्यै ते नमो नमः।।
🚩 'देवी गंगे ! आप संसाररूपी विष का नाश करने वाली हैं । आप जीवनरूपा है। आप आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक तीनों प्रकार के तापों का संहार करने वाली तथा प्राणों की स्वामिनी हैं । आपको बार-बार नमस्कार है।'(स्कंद पुराण, काशी खं.पू. 27.160)
🚩 जिस दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई वह दिन गंगा जयंती (वैशाख शुक्ल सप्तमी) और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर अवतरित हुई वह दिन 'गंगा दशहरा' (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) के नाम से जाना जाता है। इन दिनों में गंगा जी में गोता मारने से विशेष सात्त्विकता, प्रसन्नता और पुण्यलाभ होता है। वैशाख, कार्तिक और माघ मास की पूर्णिमा, माघ मास की अमावस्या तथा कृष्णपक्षीय अष्टमी तिथि को गंगास्नान करने से भी विशेष पुण्यलाभ होता है।
🌷 गंगा स्नान का फल 🌷
🚩 "जो मनुष्य आँवले के फल और तुलसीदल से मिश्रित जल से स्नान करता है, उसे गंगा स्नान का फल मिलता है ।" (पद्म पुराण , उत्तर खंड)
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