उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में एक प्राइवेट स्कूल चर्चा में है। यहां प्रबंधन अपने व्यवसायिक हितों के साथ सामाजिक दायित्वों का भी बखूबी निर्वहन कर रहा है। यहां दो घंटे की पाठशाला शुरू की गई है जिसमें सिर्फ वही बच्चे पढ़ते हैं, जिनके माता-पिता की आंखों में अपने बेटे को पढ़ाने के सपने तो हैं, लेकिन उनका पेट पालना ही उनके लिए मुश्किल है। इन बच्चों को मुफ्त पढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में यहां 220 बच्चे शिक्षा ले रहे हैं। कभी इन बच्चों के लिए ABCD पढ़ पाना मुश्किल था, अब वे फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए आने वाली टीचरों का कहना है कि, सब कुछ पैसा नहीं होता है। हम चाहते हैं कि गरीब बच्चों का भविष्य संवार दें। क्योंकि ऐसा करने से दिल को सुकून मिलता है।
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