काहिर की एक पुरानी मस्जिद में रहकर गुजर करने वाले अल हसन गणित, ज्योतिष और भौतिकी के असाधारण विद्वान थे। उन्होंने विज्ञान के हर क्षेत्र का नए सिरे से और पुरानी जानकारियों को बहुत कुछ सुधारा और उनमें बहुत कुछ जोड़ा। उनके ग्रंथों का पश्चिम के अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ और नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों ने अपने आविष्कारों में भारी सहायता प्राप्त की।
अल हसन को राजदरबार में जगह मिली थी और ऊचाँ वेतन भी था। किंतु उसे छोड़कर बड़े ग्रंथों की प्रतिलिपियाँ को तैयार करने का परिश्रम करके अपनी आजीविका चलाई। बादशाह नसीरुद्दीन की तरह टोपी सीकर और कुरान लिखकर रोटी कमाने का तरीका अल हसन का अपनाया हुआ रास्ता ही था। वास्तव में व्यक्तिगत जीवन में कठोर एवं परमार्थी संत अपना दायित्व निभाना भली-भांति जानते हैं। अपना आचरण वे दर्पण के समान स्वछ रखते हैं।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें