शनिवार, 21 नवंबर 2020

फुरसत मिलते ही

 फुरसत मिलते ही

 पुरानी किताब के मुड़े पन्ने

 क्यों खोलने लगता है दिल

 फुरसत मिलते ही

 जो गुजर गया, वो गुजर गया 

यादों के नश्तर

 क्यों घूमने लगता है दिल

 फुर्सत मिलते ही

 चूड़ियों सा चहके, फूलों सा खिले

 रोकने लगता है

 क्यों नहीं देखता है दिल 

फुरसत मिलते ही

 जिस ने हाथ में हाथ दिया नहीं

 आज उसी से लगा के

 जाने क्यों बैठा है दिल. 

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