एक शिकारी ने हाथी का शिकार किया और उसके दांत निकाल लिए। इतने में एक सर्प निकला, उसने शिकारी को काट खाया, वह गिर पड़ा। हाथी के मरने से एक खरगोश का कचूमर पहले ही निकल चुका था। एक सियार उधर से निकला तो इतने शिकार एक साथ पड़े देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। महीनों के लिए भोजन मिल गया। उसने शिकारी का धनुष पड़ा देखा उसमें तांत की प्रत्यंचा लग रही थी। पहले इस छोटी खुराक को खत्म कर ले तब बड़ों पर हाथ डालेंगे, यह सोचकर उसने तांत को जैसे ही चबाया, वैसे ही वह टूटी और धनुष का सिरा उसके मुंह में जोर से लग गया और वह वहीं ढेर हो गया। वास्तव में लालची और अदूरदर्शी-इसी प्रकार शहद के लोभ में जान गवा बैठने वाली मक्खी की तरह जोखिम उठाते हैं।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
UGC के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) विनियम, 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट में ...
-
धर्मपरिवर्तन का बनाया दबाव कानपुर में बजरिया निवासी युवक ने धर्म छिपाकर छात्रा से दोस्ती की। फिर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया। इसके बा...
-
ग्रेटर नोएडा। सेक्टर बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने बंद घरों में चोरी करने वाले गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया हैं। इनके पास से सोने के जेवर...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें