बुधवार, 28 अक्टूबर 2020

कंजूस व्यक्ति





एक धनी व्यक्ति बहुत कंजूस था। उसने घर की स्त्रियों को भी कुछ दान देने से मना कर रखा था। एक दिन एक अधिकारी उसके यहां भीख मांगने आया तो दैनिक की नवविवाहिता पुत्रवधू भिकारी से बोली हमारे यहां तुम्हें देने के लिए कुछ नहीं है। भिकारी बोला फिर तुम लोग क्या खाते हो। वह बोली हम बासी खाना खाते हैं। जब यह भी समाप्त हो जाएगा। तो हम भी तुम्हारी तरह भीख मांगेंगे सेठ ऊपर बैठा भिकारी व पुत्रवधू की बातें सुन रहा था। उसने अपनी पुत्रवधू से कहा तुम यह क्या कह रही हो कि हम भी भीख मांगेंगे। पुत्रवधू बोली पिताजी हमारे पास अभी जो भी धन है। उसे हमने पिछले जन्म में किए गए। परमार्थ कार्यों के पुणेस्वरूप आया है, परंतु अब हम परमार्थरूपी पुण्यकार्य नहीं कर रहे हैं, इसलिए पिछला पुण्य समाप्त होते ही हमें भीख मांगने पड़ेगी। सीट को अपनी भूल का भान हुआ और उसका जीवन बदल गया। 

 

 



 



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