बुधवार, 21 अक्टूबर 2020

चांद बूढ़ा हो गया

चांद बूढ़ा हो गया है


अब नहीं लुभाता किसी को


चांद को देर तक तकना, बातें करना


गुजरे समय की बात हो गई है।


 


इमारतें  आसमान से बातें करती हैं


हाल-चाल पूछ लेती हैं चांद का


वह जो चांद के कसीदे पढ़ते थे


उन की रातें फानूस को घूरते कटती है। 


 


नई नस्ल का लगाव नहीं अब चांद से


उनके सपने भी हाईटेक हो गए हैं


घर के बुजुर्गों जैसा हो गया है चांद


राह पर चुपचाप सा रहता है।


 


समय चिपक गया है जैसे


झुर्रियां बनकर उस के चेहरे पर


उदास आंखों से ताकत है जमीन पर


शायद कभी कोई बच्चा


चंदा मामा कहकर आवाज लगा दे।  


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