शनिवार, 12 सितंबर 2020

भगवान की प्रेरणा

एक न्यायाधीश बड़ा ही धार्मिक स्वभाव का था। एक बार एक चोर उसके न्यायालय में लाया गया। उसे लगा कि न्यायाधीश के सम्मुख धार्मिक बातें करने से उसे सजा नहीं होगी। अतः हाजिर होने पर वह कहने लगा जज साहब, आप जैसे साधु वृत्ति के व्यक्ति के सामने उपस्थित होकर मुझे बड़ा आनंद आ रहा है। मैंने चोरी कोई अपने वश होकर नहीं कि मुझे ऐसी प्रभु प्रेरणा ही हुई कि चोरी करूं। अतः मैंने चोरी की। इसमें मेरे हाथों का दोष नहीं। तर्क सुनकर कचहरी वाले विस्मित से रह गए, सोचने लगे कि देखें ऐसे में न्यायाधीश अब कैसा दृष्टिकोण अपनाते हैं। इस पर न्यायाधीश ने फैसला सुनाया चोर का कथन  पूर्णत मान्य है जिस भगवान ने उसे चोरी करने की प्रेरणा दी, उसी भगवान की प्रेरणा से मैं इस चोर को दंड देता हूं। 


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