शुक्रवार, 15 मई 2020

 कैंसर चाहिए या जीवन ???

बीजों की वर्णसंकरता से मनुष्य की वर्णसंकरता तक संपूर्ण विनाश की साजिश या समाधान


शास्त्रों में धन-धान्य की एक विशेष परंपरा रही है क्या खाएं इसकी पूरी ज्ञान हमारे अनपढ़ पूर्वजों में व हमारे दैनिक जीवन पद्धति का हिस्सा था जो पूर्ण वैज्ञानिक तथ्यपरक और श्रेष्ठ ज्ञान पर आधारित था। आज थाली में रोटियां तो भर गई हैं और पेट फूलकर बाहर आ गया है पर देश की प्रजा कुपोषण की शिकार हो चुकी है ।अनाज या धान्य के रूप में गेहूं ने अपना स्थान बना लिया है और हम जौ, कोदो,  सांवॉ, टांगून, मेंडूआ, तो भूल ही चुके हैं अब अनाज केवल गेहूँ ही है, पर अब ये गेहूं भी जेनेटिकली मॉडिफाइड करके उसे भी विकृत कर दिया गया है हमारे नए  पढ़े लिखे  लोगों के द्वारा  बायो टेक्नोलॉजी का  एक ऐसा भ्रम जाल  डालकर  हमारे ही हाथों  हमारा विनाश किया जा रहा है।


हम लोगों को तो फिर भी  प्रकृति ने  इतना फौलाद बनाया है सब कुछ हजम हो सकता है चाहे बनावटी खाद्य पदार्थ या बनावटी करोना वायरस ही क्यों ना हो जबकि अमेरिका में 40% लोगो को यह हजम नहीं होता और अनेकों पेट के रोग हो जाते है और कुछ कि तो मृत्यु तक हो सकती है... उनका शरीर उसे बर्दाश्त नहीं कर पता और यहाँ उसे अनाज का नशा कहा जाता है... ऑर्गनिक देसी बीज का गेहूँ /जौ खाने में प्रयोग करने से एक भारतीय व्यक्ति 100 वर्ष तक जिन्दा रह सकता है जबकि एक अमरीकी 35-40 तक । विज्ञान की भाषा में यह आरोप गेहूँ के अंदर एक ग्लूटेन नमक प्रोटीन पर लगा दिया (जैसे डेंग्यू का आरोप मछर पर लगाया हुआ है.) जबकि यह नेचुरल एंटी टॉक्सिक का काम करता है, दूसरा आटा पीसने कि विधि भी अलग अलग है यहाँ चक्की का आटा होगा और वह रोलर मशीन का चक्की में ग्लूटेन कि मात्रा नेचुरल हो जाती है और रोलर में ग्लूटेन कि मात्रा बढ़ जाती है... यह देखते हुए उन्होने गेहूँ के ऐसे वर्णशंकर बीजो का निर्माण किया जिनमे ग्लूटेन कि मात्रा कम हो, अब इन वर्णशंकर बीजोंके  कारण हरियाणा पंजाब राजस्थान उत्तरप्रदेश में कैंसर के मरीजों को संख्या अत्यधिक गति से बढ़ रही है. आप ये समझे जो आने वाले 10 साल में 27% और अधिक बढ़ जाएगी. आपके आस पास कोई तीसरा या चौथा व्यक्ति कैंसर से पीड़ित होने वाला है. लेकिन विज्ञान  का क्या उसने हजारो कैंसर हॉस्पिटल खोल डाले जिसमे मरीज के ज़िंदा रहने का कोई दावा नहीं कर सकता -- अब आप बताईये हाथ चक्की से पीसने वाले वैज्ञानिक थे या वो अमरीकी जिन्होने ने दुनिया को रोगों  से भर दिया...


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