रविवार, 19 अप्रैल 2020

सनातन  धर्म मै परमात्मा  मंगलदायी है!

 ईश्वर सबका है। हर व्यक्ति के कर्म पर उसकी नजर है।वह कल्याणकारी तो है। मूलत उसका स्वभाव ही मंगलदायी है। जैसे ही भक्त उसके निकट जाता है ।मंगल होना शुरू हो जाता है। क्युकी यह उसका स्वभाव है।जैसे आप किसी बगीचे  की तरफ जाते है तो  ठंडी हवाएं आने लगती है। कोई भी उसके पास से भी गुजरता है तो ठंडी हवाएं उसे शीतलता प्रदान करते है।  जैसे जैसे बगीचे मै पहुंचते है तो फूलों की सुगंध भी आनी शुरू हो जाती है। यानि कर्मफल मै और भी मंगलमय घटनाएं होने लगती है।क्युकी बाग़ का स्वभाव ही शीतलता प्रदान करना है।
इसी प्रकार ईश्वर मंगल दायी है।जो भी उसके  निकट जाएगा उसका मंगल ही होगा । बिच्छू का काम है डंक मारना और साधु का काम है विनम्र स्वभाव।   साधु की पूजा के समय  भले ही  बिच्छू बार बार  उसके शरीर पर चढ़ता है साधु उसे नीचे  उतार कर फिर अपनी पूजा अर्चना मै लग जाता है। दोनो का  अपना अपना स्वभाव है।  
 ब्रह्माण्ड की सर्व शक्ति मां का स्वभाव ही बच्चो से  प्यार करना है ।  कैसा भी बच्चा हो  सुंदर या कुरूप वह अपने आंचल मै  उसे सीने से लगाकर ही  दूध पिलाती है ।यह मा का स्वभाव है।
ईश्वर से  नाता जोड़े अपने सदमार्ग को अपनाएं । वह मंगल ही करेगा। अपने मंगलदाई स्वभाव से आपकी रक्षा भी करेगा। चाहें कोरोना  हो या  कुछ  ओर । 


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