गुरुवार, 26 मार्च 2020

भारत समय रहते कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर सही आकलन नहीं कर पाया

जनता कर्फ्यू से 21 दिन के लॉकडाउन के निर्णय तक पहुंचने में देश ने जो तेजी दिखाई, उसकी तारीफ के साथ ही जानकार यह भी कह रहे हैं कि शुरुआती दौर में हुई खतरे को नजरंदाज करने वाले अति विश्वास की सजा के रूप में यह हालात बने हैं। पूर्व विदेश सचिव शशांक का भी कहना है कि लग रहा है कई स्तर पर गड़बडिय़ां हो गईं। हम चीन और उसके प्रांत वुहान तथा नेपाल समेत आस-पास के देशों पर फोकस करके बाकी सब ओर से बेखबर रहे। ईरान, इटली, ब्रिटेन, यूरोप के लोग देश में आते-जाते रहे। इसी तरह से मार्च के दूसरे सप्ताह तक इंटरनेशनल कमर्शियल फ्लाइट चलती रही। शशांक भी मानते हैं कि भारत समय रहते कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर सही आकलन नहीं कर पाया।


कैसे घिरे हम कोरोना संक्रमण चक्र में?
कोरोना संक्रमण चीन के उस वुहान से सारी दुनिया में फैला जहां के लोगों के दुनिया के बहुतेरे देशों से सीधे व्यापारिक रिश्ते हैं, आना-जाना है। पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि वुहान से कोरोना दुनिया के देशों में फैलता चला गया लेकिन हमारी तैयारी और सतर्कता केवल चीन, उसके प्रांत वुहान, नेपाल और आस-पड़ोस के देश पर अधिक रही। इस दौरान दुनिया के तमाम देशों से हमारे देश में लोग आते-जाते रहे। विदेशों में रह रहे तमाम भारतीय भी आए। यह अपने गांव, घरों और क्षेत्रों में गए। जिनमें भी संक्रमण के अंश थे, उन्होंने दूसरों को संक्रमित कर दिया। अब केन्द्र सरकार और उसकी एजेंसियों को लग रहा है कि बड़ी चूक हो गई।


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