अरविंद केजरीवाल संगठन को नहीं जानते इसलिए हल्का प्रत्याशी बता रहे हैं। 2013 में केजरीवाल तो नई दिल्ली के बाहर से आए थे। तीन बार की सीएम को हरा दिया था। सुनील यादव तो यहीं पले-बढ़े हैं। वो हल्के प्रत्याशी के तौर पर सामने वाले प्रत्याशी को लेकर राय बनाना चाहते हैं। वह 3 साल से तैयारी में थे। हमें टिकट यही देना था, सरप्राइज सामने वालों को किया हुआ था।
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