अधिकारियों के मुताबिक, कई दिनों से ऐसी हेराफेरी करने की सूचना मिल रही थी। जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। बताया जा रहा है कि ये सारा खेल वर्ष 2012 से चल रहा है। आदिवासी इलाकों में चावल कम बांटा जाता था। इसमें दुकानदारों की भी मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। जिन दुकानों में चावल बंटने थे, उनमें से दो दुकानें स्वंसहायता समूह की महिलाएं चलाती हैं, जबकि एक राशन दुकान विभाग चला रहा है। इसको लेकर अब प्रशासन की ओर से इन दुकानों और वितरण को लेकर जांच की जाएगी।
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