राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) और राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (एनयूएचएम) आते हैं। हालांकि सार्वजनिक स्वास्थ्य में मानव संसाधन की कमी से जूझ रहा है, बावजूद इसके प्रयास बेहतर परिणाम दे रहे हैं।
एनआरएचएम संसाधनों की कमी को बहुत हद तक दूर करने में कामयाब रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की 2016- 17 की रिपोर्ट के मुताबिक करीब एक लाख 82 हजार अतिरिक्त स्वास्थ्य कर्मी लगाए गए हैं। साथ ही एनआरएचएम ने डॉक्टर के बहुकौशल पर ध्यान दिया है। 25 हजार से अधिक आयुष डॉक्टर्स को राज्यों में लगाया गया है। त्वरित इलाज के लिए राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई है। करीब साढ़े नौ लाख आशा सहयोगिनी सामुदायिक स्तर पर देखभाल कर रही हैं। इसके अतिरिक्त मुफ्त दवा, मुफ्त जांचें, कायाकल्प, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम जैसी सार्थक पहल की गई है।
एक स्वस्थ समाज ही बेहतर राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। इसलिए हमें अपनी स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। वो भी ऐसे वक्त में जब प्रदूषण जनित रोगों में इजाफा हो रहा है और हमारा जीवन जीने का तरीका ही रोगों को दावत दे रहा है। उस पर डॉक्टर और नर्सों की कमी के चलते बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने में भी हम पूरी तरह से सफल नहीं हो रहे हैं।
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