हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव कांग्रेस के लिए सबक है। पार्टी को चुनाव में बेहतर प्रदशन करना हैं, तो निर्णय भी जल्द करने होंगे। क्युकी संगठन में जुड़े फैसलों में देरी से पार्टी के प्रदशन पर असर पड़ता हैं। हरियाणा व महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव इसका उदाहरण हैं। हरियाणा में पर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और वरिष्ठ नेता अशोक तंवर का झगड़ा पुराना हैं। हुड्डा पार्टी पर अशोक तंवर को हटाने का दवाव बना रहे थे, पर पार्टी टालमटोल कर रही थी। कांग्रेस ने चुनाव से पहले प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन का निर्णय किया। बाबजूद हुड्डा खुद को साबित करने में सफल रहे और पार्टी को लड़ाई में लाकर खड़ा किया। पार्टी के एक नेता ने कहा की हुड्डा को एक साल पहले प्रदेश की कमान सौप दी होती, तो आज तस्वीर दूसरी होती। पार्टी के लिए यह भी एक सबक हैं कि मौजूदा राजनीती हालात में पुराने क्षत्रपों को साथ लेकर चलना होगा।
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