शनिवार, 30 अक्टूबर 2021

*🚩श्री शारदा सर्वज्ञ पीठम🚩*

 *🚩जय सत्य सनातन🚩*

 

🌥️ *🚩युगाब्द-५१२३

🌥️ *🚩सप्तर्षि संवत-५०९७   *🌥️    *🚩विक्रम संवत-२०७८*

⛅ *🚩तिथि - नवमी दोपहर ०२:४३ तक तत्पश्चात दशमी*

⛅ *दिनांक - ३० अक्टूबर २०२१*

⛅ *दिन - शनिवार*

⛅ *शक संवत -१९४३*

⛅ *अयन - दक्षिणायन*

⛅ *ऋतु - हेमंत

⛅ *मास - कार्तिक*

⛅ *पक्षकृष्ण

⛅ *नक्षत्र - अश्लेशा दोपहर १२:५२ तक तत्पश्चात मघा*

⛅ *योग - शुक्ल ०१ नवंबर रात्रि ०१:००  तक तत्पश्चात ब्रह्म*

⛅  *राहुकाल - सुबह ०९:३१ से सुबह १०:५७ तक*

⛅ *सूर्योदय - ०६:४१

⛅ *सूर्यास्त - १८:०२*

⛅ *दिशाशूल - पूर्व  दिशा में*

⛅ *व्रत पर्व विवरण -*

💥 *विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः २७-२९-३४)*

 

🌷 *दीपावलीः लक्ष्मीप्राप्ति की साधना* 🌷

*04 नवम्बर 2021 गुरुवार को दीपावली है।*

🎆 *दीपावली के दिन घर के मुख्य दरवाजे के दायीं और बायीं ओर गेहूँ की छोटी-छोटी ढेरी लगाकर उस पर दो दीपक जला दें। हो सके तो वे रात भर जलते रहें, इससे आपके घर में सुख-सम्पत्ति की वृद्धि होगी।*

🔥 *मिट्टी के कोरे दिये  में कभी भी तेल-घी नहीं डालना चाहिए। दिये 6 घंटे पानी में भिगोकर रखें, फिर इस्तेमाल करें। नासमझ लोग कोरे दिये में घी डालकर बिगाड़ करते हैं।*

🌹 *लक्ष्मीप्राप्ति की साधना का एक अत्यंत सरल और केवल तीन दिन का प्रयोगः दीपावली के दिन से तीन दिन तक अर्थात् भाईदूज तक एक स्वच्छ कमरे में अगरबत्ती या धूप (केमिकल वाली नहीं-गोबर से बनी) करके दीपक जलाकर, शरीर पर पीले वस्त्र धारण करके, ललाट पर केसर का तिलक कर, स्फटिक मोतियों से बनी माला द्वारा नित्य प्रातः काल निम्न मंत्र की दो मालायें जपें।*

🌷 * नमो भाग्यलक्ष्म्यै विद् महै।*

*अष्टलक्ष्म्यै धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्।।*

🍃 *अशोक के वृक्ष और नीम के पत्ते में रोगप्रतिकारक शक्ति होती है। प्रवेशद्वार के ऊपर नीम, आम, अशोक आदि के पत्ते को तोरण (बंदनवार) बाँधना मंगलकारी है।*

             

🌷 *धनतेरस* 🌷

*02 नवम्बर 2021 मंगलवार को धनतेरस हैं |*

*‘स्कंद पुराणमें आता है कि धनतेरस को दीपदान करनेवाला अकाल मृत्यु से पार हो जाता है | धनतेरस को बाहर की लक्ष्मी का पूजन धन, सुख-शांति आंतरिक प्रीति देता है | जो भगवान की प्राप्ति में, नारायण में विश्रांति के काम आये वह धन व्यक्ति को अकाल सुख में, अकाल पुरुष में ले जाता है, फिर वह चाहे रूपयेपैसों का धन हो, चाहे गौधन हो, गजधन हो, बुद्धिधन हो या लोकसम्पर्क धन हो | धनतेरस को दिये जलाओगे .... तुम भले बाहर से थोड़े सुखी हो, तुमसे ज्यादा तो पतंगे भी सुख मनायेंगे लेकिन थोड़ी देर में फड़फड़ाकर जलतप के मर जायेंगे | अपनेआपमें, परमात्मसुख में तृप्ति पाना, सुख - दुःख में सम रहना, ज्ञान का दिया जलानायह वास्तविक धनतेरस, आध्यात्मिक धनतेरस है |*

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Tarun Bhardwaj- congress

 


*🚩श्री शारदा सर्वज्ञ पीठम🚩*

 *🚩जय सत्य सनातन🚩*

 🌥️ *🚩युगाब्द-५१२३

🌥️ *🚩सप्तर्षि संवत-५०९७   *🌥️    *🚩विक्रम संवत-२०७८*

⛅ *🚩तिथि - अष्टमी  दोपहर ०२:०९ तक तत्पश्चात नवमी*

⛅ *दिनांक - २९ अक्टूबर २०२१*

⛅ *दिन - शुक्रवार*

⛅ *शक संवत -१९४३*

⛅ *अयन - दक्षिणायन*

⛅ *ऋतु - हेमंत

⛅ *मास - कार्तिक*

⛅ *पक्षकृष्ण

⛅ *नक्षत्रपुष्य  सुबह ११:३९ तक तत्पश्चात अश्लेशा*

⛅ *योगशुभ ३० अक्टूबर रात्रि ०२:०० तक तत्पश्चात शुक्ल*

⛅  *राहुकाल - सुबह १०:५७ से दोपहर १२:२२ तक*

⛅ *सूर्योदय - ०६:४१

⛅ *सूर्यास्त - १८:०३*

⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में*

⛅ *व्रत पर्व विवरण -*

💥 *विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः २७-२९-३४)*

 

🌷 *धनतेरस के दिन दीपदान* 🌷

👉🏻 *पहले बताई विधि के अनुसार यमदीपदान करें।*

🔥 *निर्धनता दूर करने के लिए अपने पूजाघर में  धनतेरस की शाम को अखंड दीपक जलाना चाहिए जो दीपावली की रात तक जरूर जलता रहे . अगर दीपक भैयादूज तक अखंड जलता रहे तो घर के सारे वास्तु दोष भी समाप्त हो जाते हैं.*

🔥 *घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रुई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें साथ ही दिए में थोड़ी सी केसर भी डाल दें।*

🔥 *घर के तेल का दीपक प्रज्वलित करें तथा उसमें दो काली गुंजा डाल दें, गन्धादि से पूजन करके अपने घर के मुख्य द्वार पर अन्न की ढ़ेरी पर रख दें। साल भर आर्थिक अनुकूलता बनी रहेगी। स्मरण रहे वह दीप रातभर जलते रहना चाहिये, बुझना नहीं चाहिये *

🌷 *दीपावली पर लक्ष्मी प्राप्ति की साधना-विधियाँ* 🌷

*02 नवम्बर 2021 मंगलवार  को धनतेरस है *

👉🏻 *धनतेरस से आरम्भ करें

*सामग्री:*

*दक्षिणावर्ती शंख, केसर, गंगाजल का पात्र,धूप , अगरबत्ती, दीपक, लाल वस्त्र l*

*विधि: साधक अपने सामने गुरुदेव लक्ष्मीजी के फोटो रखें तथा उनके सामने लाल रंग का वस्त्र बिछाकर उस पर दक्षिणावर्ती शंख रख दें l उस पर केसर से सतिया बना लें तथा कुम कुम से तिलक कर दें l*

🌹 *बाद में स्फटिक की माला से निम्न मंत्र की मालाएँ करें l तीन दिन तक ऐसा करने योग्य है l इतने से ही मंत्र-साधना सिद्ध हो जाती है l मंत्रजाप पूरा होने के पश्चात् लाल वस्त्र में शंख को बांधकर घर में रख दें l*

🌹 *कहते हैं- जब तक वह शंख घर में रहेगा, तब तक घर में निरंतर उन्नति होती रहेगी l*

🌷 *मंत्र : ह्रीं ह्रीं ह्रीं महालक्ष्मी धनदा लक्ष्मी कुबेराय मम गृहे स्थिरो ह्रीं नमः l*

 *पर्वो का पुंज दीपावली पुस्तक से*

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शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2021

ईएसआईसी: रविवार को भी ओपीडी खोलने की मांग

नोएडा। फेडरेशन ऑफ़ नोएडा इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष तरुण भारद्वाज ने ईएसआईसी के निदेशक विनोद नागपाल व जिलाधिकारी गौतम बुध नगर को पत्र लिखकर मांग की है कि ईएसआईसी अस्पतालों में रविवार छुट्टी के दिन भी ओपीडी खोली जाए। तरुण भारद्वाज ने कहा कि कार्य दिवस पर कामगारों को दैनिक दिहाड़ी /मजदूरी का नुकसान उठाना पड़ता है तथा छुट्टी के दिन ओपीडी या अस्पताल खुले होंगे तो उनकी दिहाड़ी बच जाएगी 


शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2021

*🚩श्री शारदा सर्वज्ञ पीठम🚩*

 *🚩जय सत्य सनातन🚩*

 

🌥️ *🚩युगाब्द-५१२३

🌥️ *🚩सप्तर्षि संवत-५०९७  * 🌥️  *🚩विक्रम संवत-२०७८*

⛅ *🚩तिथिद्वितीया रात्रि १२:२९ तक तत्पश्चात तृतीया*

⛅ *दिनांक २२ अक्टूबर २०२१*

⛅ *दिन - शुक्रवार*

⛅ *विक्रम संवत - 2078*

⛅ *शक संवत - १९४३*

⛅ *अयन - दक्षिणायन*

⛅ *ऋतु - शरद

⛅ *मास - कार्तिक*

⛅ *पक्षकृष्ण

⛅ *नक्षत्रभरणी शाम ०६:५७ तक तत्पश्चात कृत्तिका*

⛅ *योगसिद्धि रात्रि ०९:४० तक तत्पश्चात  व्यतिपात*

⛅  *राहुकाल - सुबह १०:५६ से दोपहर १२:२३ तक*

⛅ *सूर्योदय - ०६:३७

⛅ *सूर्यास्त - १८:०७*

⛅ *दिशाशूलपश्चिम दिशा में*

⛅ *व्रत पर्व विवरण - स्वामी रामतीर्थ जयंती  (दि..)*

💥 *विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा  बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः २७*२९*३४)*

 

🌹 *वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।*

🌹 *व्यतिपात योग माने क्या कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुऐ नाराज हुऐ, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नही थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।*

💥 *विशेष ~ २२ अक्टूबर २०२१ शुक्रवार रात्रि ०९:४१ से २३ अक्टूबर, शनिवार को रात्रि १०:२२ तक व्यतीपात योग है।*

 

🌷 *हेमन्त ऋतुचर्या* 🌷

*23 अक्टूबर 2021 शनिवार से हेमन्त ऋतु प्रारंभ।*

*शीतकाल आदानकाल और विसर्गकाल दोनों का सन्धिकाल होने से इनके गुणों का लाभ लिया जा सकता है क्योंकि विसर्गकाल की पोषक शक्ति हेमन्त ऋतु हमारा साथ देती है। साथ ही शिशिर ऋतु में आदानकाल शुरु होता जाता है लेकिन सूर्य की किरणें एकदम से इतनी प्रखर भी नहीं होती कि रस सुखाकर हमारा शोषण कर सकें। अपितु आदानकाल का प्रारम्भ होने से सूर्य की हल्की और प्रारम्भिक किरणें सुहावनी लगती हैं।*

*शीतकाल में मनुष्य को प्राकृतिक रूप से ही उत्तम बल प्राप्त होता है। प्राकृतिक रूप से बलवान बने मनुष्यों की जठराग्नि ठंडी के कारण शरीर के छिद्रों के संकुचित हो जाने से जठर में सुरक्षित रहती है जिसके फलस्वरूप अधिक प्रबल हो जाती है। यह प्रबल हुई जठराग्नि ठंड के कारण उत्पन्न वायु से और अधिक भड़क उठती है। इस भभकती अग्नि को यदि आहाररूपी ईंधन कम पड़े तो वह शरीर की धातुओं को जला देती है। अतः शीत ऋतु में खारे, खट्टे मीठे पदार्थ खाने-पीने चाहिए। इस ऋतु में शरीर को बलवान बनाने के लिए पौष्टिक, शक्तिवर्धक और गुणकारी व्यंजनों का सेवन करना चाहिए।*

*इस ऋतु में घी, तेल, गेहूँ, उड़द, गन्ना, दूध, सोंठ, पीपर, आँवले, वगैरह में से बने स्वादिष्ट एवं पौष्टिक व्यंजनों का सेवन करना चाहिए। यदि इस ऋतु में जठराग्नि के अनुसार आहार लिया जाये तो वायु के प्रकोपजन्य रोगों के होने की संभावना रहती है। जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी हो उन्हें रात्रि को भिगोये हुए देशी चने सुबह में नाश्ते के रूप में खूब चबा-चबाकर खाना चाहिए। जो शारीरिक परिश्रम अधिक करते हैं उन्हें केले, आँवले का मुरब्बा, तिल, गुड़, नारियल, खजूर आदि का सेवन करना अत्यधिक लाभदायक है।*

*एक बात विशेष ध्यान में रखने जैसी है कि इस ऋतु में रात लंबी और ठंडी होती है। अतः केवल इसी ऋतु में आयुर्वेद के ग्रंथों में सुबह नाश्ता करने के लिए कहा गया है, अन्य ऋतुओं में नहीं।*

*अधिक जहरीली (अंग्रेजी) दवाओं के सेवन से जिनका शरीर दुर्बल हो गया हो उनके लिए भी विभिन्न औषधि प्रयोग जैसे कि अभयामल की रसायन, वर्धमान पिप्पली प्रयोग, भल्लातक रसायन, शिलाजित रसायन, त्रिफला रसायन, चित्रक रसायन, लहसुन के प्रयोग वैद्य से पूछ कर किये जा सकते हैं।*

*जिन्हें कब्जियत की तकलीफ हो उन्हें सुबह खाली पेट हरड़े एवं गुड़ अथवा यष्टिमधु एवं त्रिफला का सेवन करना चाहिए। यदि शरीर में पित्त हो तो पहले एक चुटकी चूर्ण एवं मिश्री लेकर उसे निगद लें सुदर्शन चूर्ण अथवा गोली थोड़े दिन खायें।*

*विहारः आहार के साथ विहार एवं रहन-सहन में भी सावधानी रखना आवश्यक है। इस ऋतु में शरीर को बलवान बनाने के लिए तेल की मालिश करनी चाहिए। चने के आटे, लेप अथवा आँवले के उबटन का प्रयोग लाभकारी है। कसरत करना अर्थात् दंड-बैठक लगाना, कुश्ती करना, दौड़ना, तैरना आदि एवं प्राणायाम और योगासनों का अभ्यास करना चाहिए। सूर्य नमस्कार, सूर्यस्नान एवं धूप का सेवन इस ऋतु में लाभदायक है। शरीर पर अगर का लेप करें। सामान्य गर्म पानी से स्नान करें किन्तु सिर पर गर्म पानी डालें। कितनी भी ठंडी क्यों हो सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। रात्रि में सोने से हमारे शरीर में जो अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होती है वह स्नान करने से बाहर निकल जाती है जिससे शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है।*

*सुबह देर तक सोने से यही हानि होती है कि शरीर की बढ़ी हुई गर्मी सिर, आँखों, पेट, पित्ताशय, मूत्राशय, मलाशय, शुक्राशय आदि अंगों पर अपना खराब असर करती है जिससे अलग-अलग प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार सुबह जल्दी उठकर स्नान करने से इन अवयवों को रोगों से बचाकर स्वस्थ रखा जा सकता है।*

*गर्म-ऊनी वस्त्र पर्याप्त मात्रा में पहनना, अत्यधिक ठंड से बचने हेतु रात्रि को गर्म कंबल ओढ़ना, रजाई आदि का उपयोग करना, गर्म कमरे में सोना, अलाव तापना लाभदायक है।*

*अपथ्यः इस ऋतु में अत्यधिक ठंड सहना, ठंडा पानी, ठंडी हवा, भूख सहना, उपवास करना, रूक्ष, कड़वे, कसैले, ठंडे एवं बासी पदार्थों का सेवन, दिवस की निद्रा, चित्त को काम, क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष से व्याकुल रखना हानिकारक है।*

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NOIDA DARPAN INDEPENDENCE DAY WISHES